जंतर मंतर पर पुलिसिया कार्रवाई शांतिपूर्ण आंदोलन पर लाठीचार्ज, Bhim Army chief के पहुंचते ही गरमाया माहौल

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Bhim Army Chief Jantar Mantar:  हाल का मामला राजधानी दिल्ली से सामने आया है, जहां पुलिस की दादागिरी और अत्याचार का नया नमूना देखने को मिला है। अब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर जंतर मंतर पर करीब तीन हफ्ते से धरना प्रदर्शन करने वाले पर न तो पुलिस और न ही सरकार ध्यान दे रही थी, लेकिन जैसे ही भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद ने वहां का दौरा किया, पूरे आंदोलन का रंग ही बदल गया, कार्य नेताओं का समर्थन मिलने लगा, जिसका नतीजा वहीं हुआ , जो बीजेपी के शासन में अपने हक की आवाज उठाने वाले के साथ होता है।

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सोनम वांगचुक को जबरन उठा ले गयी पुलिस

दिल्ली पुलिस सादे कपड़ों में वहां पहुंची, भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक को जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया। पुलिस ने इसे हाईकोर्ट के आदेश और गिरती सेहत के हवाले से की गई कार्रवाई बताया है, वहीं वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए प्रशासन को चेतावनी दी है कि उनकी अनुमति के बिना वांगचुक को कोई भी दवा या इलाज न दिया जाए। आखिर पुलिस को सुबह-सुबह ये कदम क्यों उठाना पड़ा और क्या है इस कार्रवाई की वजह? वहीं प्रदर्शनकारियों पर जमकर लाठी बरसायी गई। उनके समर्थकों को पुलिस उठा ले गई। लगातार अनशन के कारण शनिवार को उनके उपवास का 21वां दिन था, जिससे उनका वजन गिरकर मात्र 56.55 किलोग्राम रह गया था और डॉक्टरों ने उनके अंगों (Organs) के डैमेज होने की चेतावनी दी थी। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 20 जुलाई को होने वाले ‘संसद मार्च’ को रोकने के लिए पुलिस ने यह जबरन कार्रवाई की है।

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आज़ाद ने सरकार को जमकर घेरा

जिसके बाद इस मुद्दे पर नगीना सांसद ने सरकार को जमकर घेरा है। उन्होंने सीधा पूछा की इससे पहले वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर महीनों तक धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों  हो या, महिला पहलवानों के शांतिपूर्ण आंदोलन हो, सभी के साथ ऐसा ही तुगलगी व्यवहार किया जा गया, ताकि उनके आंदोलन का आवाज सरकार के कानों तक पहुंचे ही न.. क्या क्या शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार केवल सत्ता की सुविधा तक ही सीमित रह गया?

वही इस घटना के संबंध में, आज़ाद ने पुलिस की कार्रवाई को बेहद निंदनीय बताया। और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार बताया है। इस छात्रों के साथ ये व्यावहार आखिर किस लोकतंत्र की निशानी है.. जो केवल अपने अधिकारों और अपने साथ हुए अन्यायों के लिए आवाज उठा रहे थे, फिर भला जो देश का भविष्य है उनके साथ ऐसा खिलवाड़ क्यों.. इसकी जवावदेही किसकी होगी।

अभिजीत दीपके का बयान

इस बीच, सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने के बाद, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने एक बयान जारी किया; उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी और मारपीट की। अभिजीत ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से तानाशाही करार दिया। साथ ही सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने के तुरंत बाद, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने खुद जंतर-मंतर पर आमरण अनशन की शुरुआत कर दी है। दीपके ने स्पष्ट किया कि 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘संसद मार्च’ (चलो संसद) का कार्यक्रम अपने तय समय पर ही होगा। उन्होंने कहा कि सरकार यह सोचकर आंदोलन खत्म नहीं कर सकती कि उसने सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती करा दिया है, यह प्रदर्शन ऐसे ही जारी रहेगा। दीपके ने यह भी आरोप लगाया कि जब वांगचुक को उठाया गया, तब पुलिस ने उनके साथ भी मारपीट की और उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया।

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