Meerut: ललिता गौतम केस में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गैर-जमानती धाराएं हटाईं गईं

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Meerut: हाल ही में, उत्तर प्रदेश के मेरठ में पुलिस ने बिना वारंट के कुछ लोगों को गिरफ़्तार किया, जो ललिता मर्डर केस को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। हालांकि, इस मामले में अब एक अच्छी खबर है: जिन बेगुनाह लोगों को पुलिस ने ज़बरदस्ती हिरासत में लिया था, उन्हें अब ज़मानत मिल गई है।

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ललिता गौतम मामले में प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत

उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक खबर सामने आई  है, जहां आखिरकार प्रशासन को पता चल ही गया कि अगर दलित और पिछड़े एकजुट हो जाए तो चट्टान को हिला सकते है, फिर उनकी लठिया क्या कर लेगी। जी हां ललिता गौतम हत्याकांड में पुलिस द्वारा हुई लापरवाही को लेकर 8 जुलाई को धरना कारण रहे निहत्थे लोगों पर एसएसपी ने फोर्स ने लाठियां बरसाई थी, तब पुलिस भारी थी, लेकिन वहीं अब राज्य के किसान ट्रैक्टर लेकर कलेक्ट्रेक्ट में घुस गए, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हुई कि उन्हें रोक सके, शायद इसे ही कहते है कि समय ही सबसे ज्यादा बलवान होता है।

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ट्रेड डील को लेकर किसान सड़को पर उतर आए

दरअसल, अमेरिका में चल रहे ट्रेड डील को लेकर मेरठ के सभी जाट किसान सड़को पर उतर आए है जिनका नेतृत्व किसान नेता राकेश टिकैत (Farmer leader Rakesh Tikait) कर रहे है। इस दौरान पुलिस की कमजोरी साफ जाहिर हुई कि वो केवल दलितों और कमजोरों को ही निशाना बना सकती है, वहीं खबरें आ रही है कि ललिता गौतम हत्याकांड (Lalita Gautam Murder Case) में खुद सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने 19 जुलाई को पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी। इतना ही नहीं उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाक़ात की और उन्हें पाँच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी। साथ ही उन्हें नौकरी, घर और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का वादा किया। जिसके बाद अब 8 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार हुए दस लोगों के खिलाफ गैर जमानती आरोप हटा दिए गए है।

दलित नेताओं ने कलेक्ट्रेक्ट जाकर ज्ञापन दिया

बता दें कि ललिता गौतम हत्याकांड में दो महीने बीतने के बाद भी कई आरोपी गिरफ्त से बाहर थे, जिसे लेकर उसके परिवार समेत दलित नेताओं और संगठनों ने कलक्ट्रेट में जाकर डीएम को  ज्ञापन देने की कोशिश की थी, लेकिन प्रशासन ने उन्हें जाने ही नहीं दिया, जिसके बाद वो सभी धरने पर बैठ गए थे। मगर कानून को अपनी जागीर समझने वाले पुलिसवालों ने निहत्थे लोगों को पीटना शुरू कर दिया। जिसके कारण सपा, आसपा समेत कई पार्टियों के शीर्ष नेताओं ने राज्य सरकार की काफी फजीहत की थी। आरोपियों को मिली इस राहत के बाद ये तो साफ है कि न्याय भले ही देर से हो, लेकिन होता जरूर है।

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