Jantar Mantar: पिछले कुछ दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर का एक मामला सुर्खियों में छाया हुआ है, जहाँ बड़ी संख्या में छात्रों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया है; गौरतलब है कि कई प्रमुख संगठन भी इस मुहिम के समर्थन में आगे आए हैं। इस बीच, भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने भी इस मामले में न्याय की मांग को लेकर संसद भवन में बाबासाहेब की प्रतिमा के नीचे बैठकर धरना शुरू कर दिया है। साथ ही 25 संसद मार्च का भी ऐलान कर दिया है।
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संसद भवन के अंदर बाबा साहब आंबेडकर की मूर्ति के नीचे बैठे
दरअसल, राजधानी दिल्ली (Delhi) से एक मामला सामने आया था है, यह मामला संसद के मानसूत्र सत्र (Manasutra Session) के दौरान भीम आर्मी चीफ (Bhim Army Chief) और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद (Nagina MP Chandrashekhar Azad) की मांगो को लेकर है, जिन्होंने 20 जुलाई को जंतर मंतर (Jantar Mantar) पर संसद (Sansad) मार्च करने की तैयारी कर रहे छात्रों पर पुलिस की क्रूरता के बाद इनके लिए न्याय की मांग करते हुए खुद धरने पर बैठ गए हैं। आजाद ने वीडियो जारी ये भी ऐलान किया कि पीड़ित बच्चों को न्याय दिलाने के लिए देश भर में 25 जुलाई को भीम आर्मी व ASP समस्त देशभर में जिला मुख्यालयों पर बड़ा आंदोलन करेगी।
पेपर लीक और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर कल जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के दौरान हुई सरकारी बर्बरतापूर्ण कार्रवाई तथा जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर चलाने के आदेश के विरोध में भीम आर्मी–आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) 25 जुलाई को पूरे देश के जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन देगी। pic.twitter.com/AKY0vvc8jd
— Aazad Samaj Party – Kanshi Ram (@AzadSamajParty) July 21, 2026
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संसद भवन के अंदर बाबा साहब आंबेडकर की मूर्ति के नीचे बैठे
इसी दौरान नीट पेपर लीक की घटना और दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने जो छात्रों पर लाठी चार्ज किया है उसे लेकर जिला मुख्यालयों (District headquarters) ने ज्ञापन भी देंगे। इतना ही नहीं आजाद ने धरना स्थल से ही संदेश दिया कि सरकार द्वारा जौहर यूनिवर्सिटी (Jauhar University) पर बुलडोजर चलाने का आदेश बेहद क्रूर और अन्यायपूर्ण है, इसपर सरासर रोक लगनी चाहिए। आजाद छात्रों के लिए न्याय की आवाज उठाने के लिए खुद संसद भवन के अंदर बाबा साहेब आंबेडकर (Babasaheb Ambedkar) की मूर्ति के नीचे बैठे है, दिल्ली में जहां लगातार बारिश हो रही है, लेकिन बावजूद इसके आजाद के हौसले उससे कमजोर नहीं होने वाले है।
उनका संदेश साफ है कि सरकार को अपने लिए अन्याय का हिसाब देना होगा, वहीं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही होगा। हालांकि अब देखना ये होगा कि क्या आजाद का संसद भवन में ऐसे अनशन करना सही है, और क्या ऐसा करने से सरकार को कोई असर पड़ने वाला है। क्योंकि इतना व्यापक आंदोलन हो गया लेकिन सरकार बातचीत तक करने को तैयार नहीं हुई है, ऐसे में क्या आजाद अकेले बदलाव ला पाएंगे।



