S. Kamali: 4 मई 2026 को तमिलनाडु समेत 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित हुए और तमिलनाडु की राजनीति में 5 दशक के बाद वो बदलाव हुआ जिसने एक नए सूरज को जन्म दिया.. मात्र 2 साल पहले बनी साउथ फिल्म इंडस्ट्री के थालापति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कज़गम’ (TVK) ने दशको पुरानी पार्टी को धोबी पछाड़ देते हुए थलापति जिनके नाम का मतलब ही होता है सेनापति.. तो भला वो जिस सेना की कमान संभाले वो फेल कैसे हो सकती है। पहले ही चुनाव में 108 सीटों के साथ प्रचंड जीत दर्ज करके वो तमिलनाडु के सीएम की कुर्सी पर बैठे.. विजय की जीत में उनके सबसे बड़े सूत्रधार रहे राज्य के दलित, पिछड़े और गरीब लोग.. जिनकों ध्यान में रख कर ही विजय चुनावी रण में उतरे थे।
28 साल की दलित कैबिनेट मंत्री एस कमाली
बाबा साहब अंबेडकर की विचारधारा को फॉलो करने वाले विजय की ही कैबिनेट में शामिल हुई एक 28 साल की कैबिनेट मंत्री.. जिसने एक दलित जाति में पैदा होने के बाद भी वो कर दिखाया, जो शायद उनके समाज की महिलायें सोटती भी नहीं होंगी.. हम बात कर रहे एस कमाली की.. जिन्हें प्रंचड जीत के साथ साथ सीएम जोजफ विजय के मंत्रीमंडल में पशुपालन विभाग भी मिला.. जानेंगे कैसे एक ट्यूशन टीचर से कमाली ने तय किया मंत्री बनने का सफर।
तमिलनाडु के तिरूप्पुर जिले के रासीपुरम में 1998 में जन्मी एस कमाली एक दलित परिवार से आती है, उनके पिता सेंथिलनाधन, जो कि विजय रासिगर मंड्रम के सदस्य हैं लेकिन फिर भी कमाली राजनीति में आने का सपना नहीं देखती थी, उन्होंने तो 2018 में रासीपुरम के पावई गर्ल्स आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में मास्टर ऑफ आर्ट्स करने के बाद 2023 में गुरुस्वामीपालयम के विद्या मंदिर कॉलेज से बी.एड. की डिग्री हासिल करके वो टीचर बन कर अपने समाज के बच्चों के लिए कुछ करना चाहती थी। इस कारण नौकरी न लगने की सूरत में भी कमाली ने बच्चों को पढ़ाना जारी रखा। कमाली की शादी तमिलनाडु के नमक्कल जिले के सलेम शहर के उपनगर रासीपुरम का रहने वाले पचामुत्थु से हुई है जो कि रासीपुरम मे ही एक ई-सेवा केंद्र चलाते हैं।
चुनावों में कमाली के सामने आई कड़ी चुनौती
कमाली इसी एरिया में रहती भी है और एक ग्रहणी के तौर पर रह रही थी, साथ ही वो दलित पिछड़े बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाती थी, इस दौरान कमाली ने अपने क्षेत्र में सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया करती थी, बच्चों को शिक्षित करने की उनकी कला और अपने समाज के लोगों के लिए हमेशा खड़े रहने के कारण कमाली की लोकप्रियता बढ़ने लगी, इस दौरान जब विजय ने चुनावी रण में उतरने का फैसला किया तो कमाली ने भी उनके इस मिशन में हिस्सा बनने का फैसला किया। कमाली को अपने क्षेत्र में मिल रहे सपोर्ट के कारण टिकट मिला और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में वो अविनाशी विधानसभा क्षेत्र से आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हुई। इस दौरान कमाली के सामने चुनौती बड़ी थी, भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के साथ साथ कमाली के सामने 14 प्रतिद्वंदी खड़े थे। लेकिन कमाली ने जार नहीं मानी।
अविनाशी विधानसभा क्षेत्र में अपनी प्रचंड जीत
वो अपने चार महीने के बच्चे को लेकर चुनावी रण में उतर गई। झाँसी की रानी की तरह उन्होंने भी बिना रुके दिन रात की लड़ाई लड़ी और 4 मई को उनके संघर्ष का फल मिला। एस कमाली ने सभी को पछाड़ते हुए एल मुरुगन को 15,000 से भी ज्यादा वोटों के अंतर से हराकर अविनाशी विधानसभा क्षेत्र में अपनी प्रचंड जीत दर्ज की। कमाली पहली ही बार में राजनीति की धुरंधर बन गई। उनकी इस जीत में चार चांद लगा दिया सीएम विजय ने, जब कमाली को अपनी कैबिनेट में पशुधन मंत्री बना दिया। यानी कि पहली ही बार में विधायक और फिर सीएम की कैबिनेट में मंत्री पद। एस कमाली विजय की कबिनेट में सबसे कम उम्र की दलित मंत्री बन गई है। इस दौरान कमाली का एक वीडियो भी काफी वायरल हुआ, जिसमें वो अपने घर में पारंपरिक रंगोली बनाती नजर आ रही है। जो उनके अपनी संस्कृति और परम्परा के करीब होने को दर्शाता है।
वहीं 4 महीने के बच्चे को संभालने के साथ साथ वो अपनी मंत्री पद की जिम्मेदारी को निभा रही है, जो नारी शक्ति की मजबूत मिसाल है। कमाली खुद सीएम विजय की फैन है और उनके सपोर्ट में खड़ी होकर वो बेहद उत्साहित है। वो कहती है कि उन्हें खुशी है कि वो विजय के कैबिनेट का हिस्सा है। उन्होंने समाजित बराबरी और सम्मान को सबके लिए अनिवार्य कर दिया है। कमाली मानती है कि राज्य में जातिगत बराबरी के लिए विजय के उठाते हुए कदम बेहद सराहनीय है। जो राज्य में दलितों और पिछड़ों को भी सम्मान पूर्वक जीने की सीख देते है।



