Congress DCC Chief Selection: हाल ही में कर्नाटक से एक खबर सामने आई है। जहाँ, पिछले कुछ महीनों से कर्नाटक (Karnataka) की राजनीति में चल रही उथल पुथल के बाद जब सरकार बदली तो थोड़ी शांति आई है, ऐसे में कांग्रेस फिर से कोई ऐसी हरकत नहीं करना चाहती जिससे दलितों के बीच उनकी मिट्टी पलीत हो.. राज्य में दलितों को साधने के लिए कांग्रेस ने एक बड़ा कदम उठाते हुए कर्नाटक जिला कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) के अध्यक्षों के चुनावो को लेकर एससी एसटी और ओबीसी वर्ग (OB Category) के लोगो के लिए 50 प्रतिशत सीट आरक्षित कर दी है।
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दलितों को साधने के लिए कांग्रेस का बड़ा दाव
कुछ महीने पहले, कर्नाटक में दलित मुख्यमंत्री की मांग के बीच कांग्रेस ने डी.के. शिवकुमार को नया मुख्यमंत्री नियुक्त किया। तब से, पार्टी दलितों के हितों की वकालत करने में लगातार सक्रिय रही है। वही कांग्रेस द्वारा कर्नाटक में शांति स्थापित करके वोटर्स का लुभाया जाये उसके लिए संगठन सृजन अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत ही पार्टी ने एससी एसटी और ओबीसी वर्ग के प्रतिभागियों को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐलान किया है। कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने कांग्रेस की रणनीति की जानकारी देते हुए कहा कि पूरे भारत में कांग्रेस के पास 1,054 जिले हैं, जिसमें 762 डीसीसी अध्यक्षों की घोषणा की जा चुकी है।
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DCC अध्यक्ष चयन में 50% हिस्सेदारी तय
वही कांग्रेस कर्नाटक, केरल, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पुडुचेरी, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लद्दाख, चंडीगढ़ और दिल्ली के केंद्र शासित प्रदेशों के लिए डीसीसी प्रमुखों की घोषणा करने की तैयारी कर रही है। बाकियों में अभी चर्चा जारी है। इतना ही नहीं वेणुगोपाल ने आगे कहा, “DCC अध्यक्षों के चुने जाने के बाद, इसी प्रक्रिया के तहत DCC के पदाधिकारियों और ब्लॉक, मंडल व बूथ कमेटियों का भी गठन किया जाएगा। अभी यह प्रक्रिया केरल, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश समेत कुछ ही राज्यों में पूरी होनी बाकी है। अब हम कर्नाटक के साथ-साथ केंद्र-शासित प्रदेशों – में भी इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि देश में हालात काफी चिंताजनक हैं; इसलिए कांग्रेस को ज़्यादा सावधानी और जीत के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना चाहिए। मुझे पूरा भरोसा है कि डी.के. शिवकुमार और सिद्धारमैया के नेतृत्व में हम 2028 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों में फिर से सरकार बनाएंगे। कांग्रसे का मास्टर स्ट्रोक केवल इसी लिए है कि दलित और पिछड़े प्रत्याशी होने के कारण दलित जनता का भरोसा बढ़ेगा, जिससे कांग्रेस का वोट बैंक भी बढ़ेगा.. साथ ही, जो स्थानिय क्षेत्र का हो, वो अपने लोगो की परेशानियों को करीबवसे समझ सकता है। अब देखना ये होगा कि क्या कांग्रेस का ये दाव वाकई में उनके काम आयेगा।



