Abhijeet Dipke: हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को लेकर एक खबर सामने आई है। जिन्होंने नीट पेपर लीक मामले में आंदोलन करके दीपके ने एक तरफ स्टूडेंट पावर दिखाई तो वहीं सत्तारूढ़ बीजेपी (BJP) ने उन्हें रोकने और छात्रों के साथ दगाबाजी करने का भारी दवाब बनाया। ये खुलासा खुद सीजेपी (CJP) के अध्यक्ष ने किया है।
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अभिजीत दिपके बीजेपी पर साधा निशाना
क्या भारत का युवा अब जाति नहीं, बल्कि रोजगार और शिक्षा के मुद्दे पर सरकार को झुकाने की ताकत रखता है, NEET पेपर लीक के खिलाफ CJP आंदोलन ने देश की राजनीति को एक नया नया नजरिया दिया है। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के एक गरीब किसान-इंजीनियर परिवार से ताल्लुक रखने वाले दलित युवा अभिजीत दीपके ने इस आंदोलन की कमान संभाली, लेकिन खास बात ये थी। कि उन्होंने जाति या आरक्षण को नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे राष्ट्रीय मुद्दों को केंद्र में रखा।
दिपके ने बीजेपी की पोलपट्टी खोली
वही दिपके ने यूपी के छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे थे जहां उन्होंने मीडिया के सामने बीजेपी की पोलपट्टी खोलते हुए कहा कि बीजेपी ने आंदोलन के दौरा उन्हें बार बार धमकी दी। वो उनपर दवाब बना रहे थे कि अभिजीत बीजेपी ज्वाइन कर कर वरना उनका रिजल्ट उनकी फैमिली को भुगतना पड़ेगा। अभीजित ने आगे कहा कि उनपर देश की संस्कृति को भ्रष्ट करने का संगीन आरोप लगा है लेकिन अगर देश के भविष्य के लिए लड़ना, लोकतंत्र की रक्षा के लिए सरकार से सवाल करना, अगर संस्कृति को भ्रष्ट करना तो वो भ्रष्ट है। लेकिन वो अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
अभीजित ने जेन जी की तारीफ
अभीजित ने जेन जी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि जेन जी भारत की संस्कृति, लोकतंत्र और देश को अब अच्छी तरह संभाल सकती है। वहीं जंतर मंतर पर पुलिस की बर्बरता को लेकर भी उन्होंने बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया जिनके इशारे पर छात्रों के साथ आतंकियों जैसे व्यवहार किया गया। सरकार के लगाए सारे इल्ज़ाम केवल जुबानी है, उनके पास कोई सबूत नहीं है। ये केवल उनकी तानाशाही दिखाती है। दीपके के इस खुलासे के बाद बीजेपी की छवि को इससे क्या नुकसान होगा, और क्या अभिजात भी यूपी में बीजेपी की जमीन खोदने के लिए लगे गये है।
जंतर-मंतर पर लगातार 36-37 दिनों protest
इसके अलवा आप को बता दें, जून 2026 में अमेरिका से लौटकर अभिजीत ने जंतर-मंतर पर लगातार 36-37 दिनों तक भारी बारिश के बावजूद छात्रों के साथ डटे रहे, और नतीजा..25 जुलाई 2026 को सरकार के साथ बातचीत हुई। जिसके बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया और छात्रों पर दर्ज केस वापस लिए गए। यह बदलाव रातों-रात नहीं आया। महाराष्ट्र की धरती ज्योतिराव फुले और बाबासाहेब डॉ. बी.आर. आंबेडकर जैसे महापुरुषों की रही है। जिन्होंने सिखाया कि “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो,अभिजीत ने भी इसी सोच के साथ हाथ में संविधान थामकर अधिकारों की निष्पक्ष लड़ाई लड़ी।



