Dalit MBBS student: हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक दलित MBBS छात्रा अपने कॉलेज कैंपस में हो रहे मानसिक उत्पीड़न और जाति-आधारित भेदभाव के बारे में बात कर रही है। जिसमे वो कहती हुयी नजर आ रही है, कि समाज में इतने सारे पढ़े-लिखे लोगों के होने के बावजूद, लोगों की सोच में कोई बदलाव नहीं आया है।
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क्या है पूरा मामला?
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में पीड़ित छात्रा ने रोते हुए अपनी आपबीती साझा की। उसने आरोप लगाया कि कॉलेज के कुछ क्लासमेट और सीनियर छात्र द्वारा उसकी जाति को लेकर अभद्र टिप्पणियां की गईं और उसकी योग्यता पर सवाल उठाए गए। छात्रा का कहना है कि उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे उसकी पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा है। इतना ही नही छात्रा ने बताया की मनुवादी मानसिकता के पीठ पीछे बात करते है। अगर चमारों के बच्चे पढ़-लिख गए, तो नालियां कौन साफ़ करेगा?”—<
‘च*मार के बच्चे पढ़ेंगे तो नाली कौन साफ करेगा’ यूनिवर्सिटी में जातीय भेदभाव पर फूटा छात्र का गुस्सा…#CasteDiscrimination #UniversityCampus #EndCasteism #StandAgainstDiscrimination #SocialJustice #BheemSena pic.twitter.com/iclxxdOYGE
— Bheem Sena (@BheemsenaBheem) July 18, 2026
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इंटरनेट पर नेटिजन्स का गुस्सा फूट पड़ा
वही वीडियो के सामने आने के बाद इंटरनेट पर नेटिजन्स का गुस्सा फूट पड़ा है और लोग आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आपको बता दें, यह महज़ जातिवादी और अपमानजनक टिप्पणी नहीं है; यह उस सामंती और संकीर्ण सोच का सबूत है जो हमारे समाज के एक बड़े हिस्से में गहराई से बसी हुई है।
मेडिकल और टेक्निकल संस्थानों में बढ़ता भेदभाव
किसी प्रतिष्ठित संस्थान में ऐसी घटना होने का यह पहला मामला नहीं है। आईआईटी (IIT) और विभिन्न मेडिकल कॉलेजों जैसे संस्थानों में दलित और आदिवासी छात्रों के उत्पीड़न की खबरें पहले भी सामने आई हैं। अक्सर, मानसिक उत्पीड़न इतना गंभीर हो जाता है कि छात्र अपना जीवन समाप्त करने जैसा चरम कदम उठाने के लिए प्रेरित हो जाते हैं। हाल के उदाहरण में, एनईईटी परीक्षा पेपर लीक (NEET exam paper leaked) के सदमे के कारण कई छात्रों की आत्महत्या हो गई; इस बीच, कई छात्रों को स्कूलों में शिक्षकों द्वारा उत्पीड़न का भी सामना करना पड़ता है – जैसे कि दूसरों के साथ बैठने या खाने की अनुमति से इनकार करना – यह घटना अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में देखी जाती है। इसके अलवा आपको बता दें, मेरिट के नाम पर आरक्षित वर्गों के छात्रों को निशाना बनाना और उन्हें मानसिक रूप से कमजोर महसूस कराना एक गंभीर सामाजिक समस्या बन गई है।



