Top 5 Dalit news: जरा सोच के देखिये क्या दलित उत्पीड़न इसलिए ही होता है कि वो आर्थिक रूप से कमजोर है.. नहीं क्योंकि सरकारी नौकरी के उंचे पद पर बैठे अधिकारी को भी जातिगत भेदभाव सहना पड़ता है.. फिर क्या आरक्षण वकाई में उनकी रक्षा करने में पूरी तरह से सक्षम है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है जो सवाल भी उठाती है कि आर्थिक मजबूती किसी का भेदभाव मिटा सकती है।
क्रिमी लेयर मानदंड मामले में केंद्र सरकार का जवाब
1, दलितो से जुड़ा पहला राजधानी दिल्ली से है.. जहां नौकरी और एजुकेशन में एससी एसटी वर्ग के आर्थिक मजबूत लोगो पर क्रीमी लेयर’ मानदंड लागू करने को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में हलफनामा दायर कर दिया है। जहां पूरे देश में क्रिमी लेयर लागू करने की मांग की जा रही थी तो वहीं केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में इसका विरोध किया है। सरकार ने दलील दी है कि जातिगत भेदभाव किसी की आर्थिक स्थिति से परे है.. क्रिमी लेयर लागू करने से आरक्षण पर असर पड़ेगा, और आरक्षण किसी को आर्थिक सशक्तिकरण देने से ज्यादा हाशिए पर धकेले गए लोगो को सामान्य जीवन में लाने का समाधान है। ये उस ऐतिहासिक अन्याय की भरपाई है जो सदियों से एससी एसटी वर्ग पर किया जा रहा है.. संविधान के अनुसार भी क्रिमी लेयर की अवधारणा सिर्फ OBC और SEBC आरक्षण में दी गई है। बता दें कि बीते साल अगस्त में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें ये कहा गया कि एससी एसटी वर्ग के जिस भी व्यक्ति को सरकारी नौकरी मिला हो, उसके बच्चों को जातिगत लाभ नही मिलना चाहिए, जिसने एक बहस को जन्म दे दिया था.. अब केंद्र सरकार के साफ दो टूक जवाब ने साफ कर दिया है कि एससी एसटी कैटेगरी पर क्रिमी लेयर नहीं लगाया जायेगा। सरकार के इस जवाब के बाद क्या ये बहस आगे जारी रहेगी, या याचिका खारिज होगी.. ये देखने वाली बात होगी.. वैसे आप केंद्र सरकार की बात से कितने सहमत है।
फ्रेक्टर होने का इलाज कराने आये युवक की संदिग्त मौत
2, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के लखनऊ से है, जहां हाछ टूटने का इलाज कराने गए एक 38 साल के युवक की डॉक्टर की लापरवाही के कारण मौत हो गई.. लेकिन बावजूद इसके डॉक्टरो ने पीड़ित परिवार को इसकी जानकारी नहीं दी.. वहीं जब पीड़ित परिवार पुलिस से मदद की गुहार लगा रहा है तो करीब 1 महीना बीतने के बाद भी पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की। दरअसल रायबरेली के गल्ला मंडी में रहने वाले लालजी सोनकर का हाथ टूट गया था, जिसका ऑपरेशन कराने वो लखनऊ के सत्यार्थ अस्पताल पहुंचा था, जहां 14 जुलाई को डाक्टर विनय त्रिपाठी लालजी सोनकर का ऑपरेशन के लिए ले गया था लेकिन लालजी सोनकर की संदिग्ध हालात में मौत हो गई.. लालजी सोनकर के भाई ने लखनऊ के कृष्णा नगर थाने को इस घटना की जानकारी दी थी.. पीड़ित परिवार का कहना है कि ऑपरेशन के वक्त डॉक्टर नशे में था.. न ही ऑपरेशन से पहले कोई कंसेंट पेपर पर साइन कराये गए.. वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लालजी सोनकर के शरीर के कई हिस्सों पर कट लगे हुए थे। यहां तक की ऑपरेशन के दौरान हुई मौत की जानकारी भी उन्हे तब मिली जब वो लोग खुद लालजी सोनकर को देखने गए। हैरानी की बात तो ये है कि करीब 3 हफ्ते बीत चुके है लेकिन पुलिस ने न तो डॉक्टर के खिलाफ और न ही अस्पताल के खिलाफ कोई कार्यवाई की है। उल्टा पीड़ित परिवार को ही तंग किया जा रहा है जिसके बाद उन्होंने भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद से मदद की गुहार लगाई है। अब देखना ये होगा कि क्या आजाद इस मामले में पीड़ितो का साथ देने आते है.. और आजाद के पड़ने से मामले में क्या बदलाव आयेगा।
ऊना कांड को लेकर बसपा सुप्रीमो का बड़ा बयान
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला गुजरात के ऊना से है। जहां 2016 में दलित परिवार के साथ हुई बर्बरता के मामले में निचली अदालत ने सभी आरोपियो को बरी कर दिया है, जिसके बाद से ही पीड़ित परिवार काफी डरा हुआ है.. एक तरफ पीड़ित परिवार ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में गुहार लगाई है। वहीं अब इस मामले में फिर से राजनीति शुरु हो चुकी है। बसपा सुप्रीमों मायावती ने पीड़ित परिवार के लिए आवाज उठाते हुए कहा कि गुजरात के सोमनाथ गिर जिले मके ऊना में 2016 में तथाकथित गौरक्षको ने दलितों पर जघन्य अत्याचार किये थे, उसमें निचली अदालत में मार्च में 40 में से 35 आरोपियों बरी कर दिया.. लेकिन क्या वाकई में न्याय हुआ.. इन 10 सालो में पीड़ित परिवार का आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। उनके लिए केस लड़ना कितना मुश्किल है। उन्होंने पीड़ितो का दर्द बयां करते हुए कहा कि उन्होंने खुद उस परिवार की स्थिति देखी थी। उन्होंने मांग की थी राज्य सरकार पीड़ित परिवार को न्याय दिलाये, उनकी सुरक्षा करें, लेकिन 10 साल बीतने के बाद भी उनकी स्थिति में कोई बदलाव न आना राज्य सरकार का दलितों के प्रति सरकारी द्वेष, उनके हितों और सुरक्षा के लेकर लापरवाही और उदासीनता को दर्शाता है। मायावती ने गुजरात सरकार को चेतावनी दी है कि अभी भी समय है वो अपनी गलती को सुधार लें.. वर्ना परिणाम उन्हें जनता दिखायेंगी… हैरानी की बात है कि जो मामला इतना उछला था। आज उस मामले में कोई बोलना भी नहीं चाहता है.. मायावती के इस मामले में आवाज उठाने के बाद क्या गुजरात सरकार पीड़ितो के लिए संवेदनशील होगी।
शिवपुरी में दलित छात्र की पिटाई का मामला आयोग पहुंचा
4, दलितो से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के शिवपुरी से है, जहां एक दलित बच्चे द्वारा शिक्षक की बोतल से पानी पीने पर बच्चे के साथ की गई बर्बरता को लेकर अब मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पास पहुंच गया है। ये मामला 27 जुलाई का है, जब कोलारस तहसील के उकावल गांव में शासकीय प्राथमिक विद्यालय 8 साल के बच्चे को बुरी तरह से पीटा गया, उसे जातिसूचक गालियां दे कर बेज्जत किया गया था क्योकि छात्र ने एक सवर्ण टीचर के बोतल से पानी पी लिया था। छात्र ने मातापिता को जब इसकी जानकारी दी तो उन्होंने टीचर के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया.. जिसके बाद एक तरफ तो पुलिस ने टीचर को नोटिस भेजा है.. और जांच शुरु की तो वहीं मामला शांत होने के बजाय और ज्यादा भड़क गया। अब इस मामले में खुद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी पड़ चुका है। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और शिवपुरी के पुलिस अधीक्षक को एक नोटिस भेजा है जिसमें दो हफ्तों के अंदर रिपोर्ट मांगी गई है,. आयोग ने कहा कि अगर किये गए दावे सही है तो मानव अधिकार का उल्लंघन है, साथ ही स्कूल में बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो सकते है। ऐसे में जांच के बाद साफ हो जायेगा कि क्या ये पहला मामला था या उससे पहले भी इस तरह की घटना स्कूल में हुई है।
केरल सरकार ने दी एससी एसटी महिलाओं को सौगात
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला केरल के तिरुवनंतपुरम से है, जहां एससी एसटी जाति (SC/ST caste) की महिलाओ के शसक्तिककरण में केरल सरकार विशेष ध्यान दे रही है। अभी हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने नई घोषणा करते हुए सभी सरकारी अस्पतालों में एचडीएस (हाई स्कूल सर्विस) का पुनर्गठन शुरु करने का आदेश दिया है.. लेकिन इस पुनर्गठन में सबसे अहम भूमिका एससी एसटी महिलाओ की होने वाली है। राज्य सरकार ने कहा कि एचडीएस पुनर्गठन में एससी एसटी जाति की महिलाओ के शामिल होने को सरकार द्वारा अनिवार्य किया गया है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य में सभी जातियो की सामाजिक भागीदारी के लिए ये फैसला किया गया है.. ये महिलाएं सरकारी प्रतिनिधियों के रूप में शामिल होंगी। सरकार ने अपने फैसले में कहा कि अब से एचडीएस के सभी निकायों, परिवार स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक एससी एसटी जाति की महिला प्रतिनीधि को शामिल किया जाना अनिवार्य किया गया है। इस फैसले से एक तरफ उनकी भागीदारी बढ़ेगी वहीं दूसरी तरफ वो आर्थिक रूप से मजबूत होंगे। सरकार के इस फैसले को लेकर आपका क्या कहना है।



