पिछले 24 घंटे में दलितों से जुड़े 5 बड़े मामले, कहीं जातीय उत्पीड़न तो कहीं न्याय के लिए सड़क पर प्रदर्शन – Top 5 Dalit news

Caste Discrimination with Dalits, Top 5 Dalit News
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Top 5 Dalit news: क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में सबसे ज्यादा धर्म परिवर्तन के मामले दलितो और पिछड़ो के साथ ही क्यों होते है.. क्योंकि सदियों से अवहेलना झेल रहे दलितों को सामाजिक न्याय और समानता देने के नाम पर बरगलाना आसान होता है.. लेकिन सवाल ये है कि क्या वाकई में उन्हें सामाजिक न्याय मिलता भी है या नहीं। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो उन लोगो के लिए एक आईना है जो ये सोचते है कि धर्म बदलने से उनकी जिंदगी आसान हो जायेगी।

संतकबीर नगर में दलित मुसलमानों ने उठाई आवाज

1, दलितो से जुड़ा पहला उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर से है, दक्षिण भारत में जहां दलित इसाईयों को एससी के दायरे में लाने और उन्हें लाभ देने की लड़ाई लड़ी जा रही है तो वहीं अब यूपी में भी दलित मुसलमानों को अनूसूचित जाति में शामिल करने की मांग तेज हो गई है। अपनी मांगो को लेकर पीस अनुसूचित मोर्चा के अधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने जिलाध्याक्ष पंचराम चौहान के नेतृत्व में खलीलाबाद करेक्ट्रेट के सामने जमकर प्रदर्शन किया..अपनी मांग को लेकर पीस अनुसूचित मोर्चा ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा है जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति आदेश, 1950 के अनुच्छेद 341 के पैरा-3 में संशोधन की मांग करते हुए कहा कि जब तक भारत में ब्रिटिश रूल था, अनूसूचित जाति का दायरा किसी धर्म तक सीमित नहीं था लेकिन 1950 में इसे केवल हिंदू धर्म तक सिमित किया गया, और फिर 1956 में सिख और 1990 में बौद्ध धर्म को भी जोड़ा गया, लेकिन 2006 से ही दलित मुसलमान और दलित ईसाई को भी अनूसूचित जाति के दायरे में लाने की मांग की जा रही है लेकिन सरकार इस पर बेहद सख्त क्यों है। पहले दलित इसाई और फिर दलित मुसलमान.. इस बढ़ती मांगो के बाद क्या सुप्रीम कोर्ट इस पर फिर से विचार करेगा। वैसे आपको क्या लगता है क्या संशोधन होना चाहिए या नहीं।

कन्नूर डेंटल कॉलेज छात्र की मौत मामले में हाई कोर्ट सख्त

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला केरल के कन्नूर से है, जहां डेंटल कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र नीतिन राज की आत्महत्या के बाद कोर्ट में सुनावई शुरु हो चुकी है..और जितना ये मामला गर्म हुआ था, हाईकोर्ट का रवैया भी उतना ही गर्म नजर आ रहा है। इस मामले में मुख्य आरोपी डॉ. एम. कोडंडा राम की अग्रिम जमानत पहले ही खारिज की जा चुकी है वहीं कोर्ट ने राज्य सरकार को भी घेर लिया है.. कोर्ट ने इस मामले में डॉ. एम. कोडंडा राम को गिरफ्तार करके बिना ठीक से जांच किये ही रिहा कर देने वाले पुलिस कर्मी को अब तक निलंबित न किये जाने को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछे। जस्टिस ए बदरुद्दीन ने सीधे तौर पर पूछा कि इस मामले में पुलिस कर्मी की गंभीर चूक और लापरवाही भरा रवैया साफ नजर आ रहा है फिर अब तक उसके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। बता दें कि 10 अप्रैल 2026 को जातिगत उत्पीड़न से तंग आकर नीतिन राज ने कॉलेज की तीसरी मंजिल से छलांग लगा कर खुदकुशी कर ली थी.. लेकिन पुलिस ने मुख्य आरोपी के खिलाफ जरूरी साक्ष्य नहीं जमा कराये जिससे उसे निचली अदालत को छोड़ना पड़ा था, लेकिन मृतक के माता पिता की याचिका पर सीबीआई शुरु हुई और मुख्य आरोपी जेल में है। केरल हाई कोर्ट का रवैया साफ है कि जो जाति के नाम पर उत्पीड़न करेगा.. और उस मामले में लापरवाही करने वालों को बख्शा नहीं जायेगा।

दलित नेता होता दलितों के लिए क्या किया

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिन्होंने सत्ता रूढ़ बीजेपी के सवर्ण के साथ साथ पिछड़ी और वंचित जाति से आने वाले नेताओं को भी बुरी तरह से लपेटा है। आजाद ने अयोध्या रेप केस मामले में आंसू बहाने वाले संजय निषाद को डुप्लीकेट कहते हुए कहा कि घड़ियाली आंसू बहा कर लोगों को दिखाने के कोशिश कर रहे थे कि उन्हें कितना दुख है कि वो अपने लोगों के लिए कुछ नहीं कर पा रहे है, लेकिन सवाल ये है कि अगर ऐसा है तो आप ऐसी खोखली कुर्सी को छोड़ क्यों नहीं देते। आजाद ने लखनऊ में रैली ने गरजते हुए कहा कि अगर वो संजय निषाद की जगह होते तो उस कुर्सी को केवल छोड़ते नहीं वाली पेट्रोल डाल कर आग लगा देते, जो कुर्सी उन्हें उनके लोगों की रक्षा तक नहीं करने दे रही है। आजाद ने आगे कहा कि हमारी बहन बेटियों पर अत्याचार हो रहा है, और आप निकम्में लोगों की तरह कुछ करने के बजाय केवल आंसू बहा रहे है। पिछले 4 सालों में कैबिनेट मंत्री होकर भी अपने अपने लोगों के लिए क्या किया। अगर आपको वाकई में अपने लोगों की फिक्र होती तो कुर्सी से चिके भी होते। आजाद के ये बोल चेतावनी के उन लोगों के लिये, जो भले ही दलित जाति से हो, लेकिन अगर वो भी अत्याचार के भागीदार है तो उन्हें भी बख्शा नहीं जाएगा।

रूद्रपुर में दलित युवक की पिटाई का मामला गर्माया

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तराखंड के रूद्रपुर से है, जहां गलती से एक स्कूटर बीजेपी पदाधिकारी पारस चुघ की कार से क्या टकरा गई, कार में सवाल पारस चुघ, उसके भाई और उसके साथियों ने स्कूटर पर तीन लड़को को जातिसूचक गालियां देते हुए लाठी और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। इस मामले में 20 साल अभिषेक वाल्मिकी बेहद गंभीर है और वेंटिलेटर पर है..वहीं 7 अगस्त को घटी इस घटना की जानकारी उसी दिन पुलिस को दे दी गई थी, लेकिन पुलिस में शिकायत देने के बाद भी पुलिस ने केवल चुघ के भाई सनी चुघ को गिरफ्तार कर मामले को शांत करने की कोशिश की लेकिन मुख्य आरोपी पर कार्रवाई न करने को लेकर वाल्मीकि समुदाय के सैकड़ों लोगों ने रुद्रपुर में दिल्ली-हल्द्वानी नेशनल हाइवे को ही घेर लिया है.. उनकी मांग है कि पुलिस जानबूझ कर लापरवाही कर रही है.. जबकि इस मामले में 10 से भी ज्यादा आरोपी है.. लेकिन केवल एक आरोपी को गिरफ्तार कर हमारे लोगों को बरगलाने की चाल चली जा रही है। वहीं पीड़ित अभिषेक की मां नगर निगम में सफाई कर्मचारी है, और मामले में पुलिस का रवैया देखकर उनके साथ साथ कई कर्मचारियों ने न्याय मिलने तक काम स्थगित करने का फैसला किया है। पुलिस की लापरवाही है या सत्ता की ताकत, हम आसानी समझ सकते है। अब देखना ये होगा कि क्या पुलिस किसके साथ खड़ी होती है,, न्याय के साथ या ताकत के साथ।

शराब के नशे में फौजी ने दलित परिवार को दी गालियां

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से है, जहां एक फौजी ने वर्दी का रौब दिखाने हुए शराब पीकर पहले तो एक दलित परिवार के घर में जबरन घुस कर जातिसूचक गालियां दी। पीड़ित परिवार ने जब इसका विरोध किया तो फौजी ने मारपीट शुरू कर दी। यहाँ तक की इस हंगामे के बीच में पुलिस वालों को बुलाया गया, लेकिन फौजी ने कानून की परवाह किए बिना पुलिस वालों के साथ भी हाथपाई की। जिसमें उनकी खाकी वर्दी कई जगह से फट गई। यूपी की लचर कानून व्यवस्था के बीच दलित के साथ साथ पुलिस वालों की बेज्जती करने का ये मामला फतेहपुर के बिंदकी थाना क्षेत्र के कुशरा गांव का है। पीड़िता छाया देवी ने पुलिस को बताया कि वो अपने पति और बेटी के साथ राधानगर थाना क्षेत्र का जयराम नगर में रहती है। लेकिन बिंदकी में वो अपने मायके आई हुई थी, वहीं गांव का ही कृष्ण प्रताप उनके परिवार से पुरानी रंजिश रखता था, जिस कारण उसने शराब के नशे में धुत्त होकर उसके घर में घुसकर गाली गलौच शुरू कर दिया था। मामला बिगड़ता देख तुरंत पुलिस को बुलाया गया लेकिन आरोपी ने पुलिस वालों के साथ भी अभद्र व्यवहार किया। फिलहाल पुलिस ने सभी को मेडिकल के लिए भेज दिया है, वहीं आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है, लेकिन देखना ये होगा कि इस मामला में पुलिस क्या एक्शन लेती है क्योंकि मामला एक फौजी से जुड़ा है। तो कानून उसके लिए एक जैस होंगे। आपको क्या लगता है।

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