Top 5 Dalit news: आपने सड़को पर चलने वाली ऑटो के पीछे अक्सर कहीं न कहीं देखा ही होगा कि प्रचार नहीं तो व्यापार नहीं,,बड़ी राजनैतिक पार्टियां बढ़चढ़ अपना प्रचार करती है.. वहीं छोटी और पिछड़ी जातियों के लिए बनाई गई पार्टियों को बड़ी पहचान भी नहीं मिलती..ऐसा क्यों..ब़ड़ी पार्टियों की ये चंकाचौंध किसके कारण होती है। तो चलिए आपको इस लेख में, पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो आपको ये सोचने पर मजबूर कर देंगे कि आखिर क्यों दलित और पिछड़ी जातियों के लिए राजनैतिक पार्टियों को दबा देने की पूरी कोशिश की जाती है।
लखीमपुर खीरी में दलित बच्ची की संदिग्ध मौत
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से है, जहां एक दलित नाबालिक बच्ची की कथित तौर पर दुष्कर्म करके उसका गला दबा कर हत्या करने का मामला सामने आने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। ये मामला लखीमपुर खेरी जिले के नीमगांव थाना क्षेत्र का है.. मृतका के पिता के बयान के मुताबिक उनकी बच्ची किसी काम से बाहर निकली थी और जब वो नहीं लौटी तो उसकी तलाश शुरु की गई.. और गाव के पास ही बच्ची का शव बरामद हुआ…लेकिन जिस स्थिति में बच्ची का शव बरामद हुआ.. उससे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्ची के साथ क्या हुआ है। वहीं संगिग्ध परिस्थिति में मिले बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है.. और फोरेंसिक टीम को जांच के लिए लगा दिया गया है। पुलिस का कहना है कि जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी..वहीं पिता ने भी किसी पर भी शक नही जताया है… ऐसे में जांच को रिपोर्ट के आधार पर ही आगे बढ़ाई जायेगी। पुलिस ने इस मामले में कई टीमे गठित की है.. ऐसे में देखना ये होगा कि रिपोर्ट में क्या आता है वहीं पिता का शक कहां तक सही है.. वहीं सबसे बड़ा सवाल ये है कि एक 15 साल की दलित बच्ची की संदिग्ध हालात में मौत कैसे हो गई.. और वो भी दिनदहाड़े.. गांव के पास।
नगीना सांसद ने पूर्व पीएम वीपी सिंह को भारत रत्न देने की मांग की
2, दलितो से जुड़ा अगला मामला नगीना सांसद और भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जो किसी न किसी बात से सुर्खियों में ही रहते है। ताजा मामला है पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह जी को भारत रत्न देने की मांग करने का.. आजाद ने कहा कि भले ही वीपी सिंह क्षत्रिय समुदाय से आते है लेकिन उन्होंने सामाजिक न्याय को सदैव प्राथमिकता दी और अपने कार्यकाल में ओबीसी समाज के लिए मंडल कमीशन को लागू किया… इसका नतीजा ही था कि जातिवादी बीजेपी ने अपना समर्थन वापिस ले लिया था और सरकार गिरा दी थी.. यहां तक कि जातिवादियों ने देशभर में जमकर विरोध भी किया था, लेकिन वीपी सिंह अपने फैसले पर कायम रहे। आजाद ने कहा कि वीपी सिंह को सही मायने में भारत रत्न मिलना चाहिए और अगर उनकी सरकार आई तो वो मंडल कमीशन की सिफारिशों पर भी काम करेंगे और वीपी सिंह जी को उनके सामाजिक न्याय के लिए भारत रत्न देने की मांग को और तेज करेंगे.. ताकि केंद्र सरकार तक उनकी आवाज पहुंचे। वैसे आजाद की बातों से आप कितने सहमत है। क्या वीपी सिंह जी को भारत रत्न मिलना चाहिए।
बड़गांव में मॉब लिंचिग हत्याकांड में पुलिस का रवैया संदिग्ध
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला झारखंड के बड़गाव से है, जहां एक दलित बच्ची को अगवा कर दुष्कर्म करने के मामले में पकड़े गए आरोपी की मॉब लिंचिंग के बाद हुई मौत का मामला राजनैतिक रंग पकड़ चुका है। इस मामले में पुलिस वालों ने दलित बस्ति के निर्दोष लोगो को भी आरोपी बना कर उन्हें घेर लिया है..जिसे लेकर बीजेपी ने अब आवाज उठानी शुरु कर दी है इतना ही नहीं पूर्व सीएम बाबूलाल मारांडी भी गांव के पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे। जहां उन्होंने पीड़िता के परिवार से भी मुलाकात की। ये घटना चतरा जिले के टंडवा थाना क्षेत्र में 4 अगस्त को घटित हुई थी.. जब 15 साल की आदिवासी नाबालिग को आरोपी इमरोज अगवा कर अपने घर ले गया था और दो दिनो तक उसका दुष्कर्म किया था। बच्ची किसी तरह से उसके चंगुल से बच निकली और अपने परिवार तक पहुंची थी। जहां उसकी आपबीती जानने के बाद घर वालों ने गुस्से में आरोपी को घेर कर पीटना शुरु कर दिया था,, इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। गांव वालो के मुताबित जब मारपीट की घटना हो रही थी तब पुलिस वालों के सामने ही गांव के मुखिया बिजय चौबे और उनके साथ दर्जनों लोग भीड़ को रोकने गए थे, लेकिन पुलिस वाले अब उन्हें ही आरोपी बना कर गिरफ्तार करने के लिए घर घर पहुंच रहे है। जो कि पूरी तरह से अन्नायपूर्ण है। हैरानी की बात तो ये है कि पुलिस जानबूझ कर दलितो को बलि का बकरा बना रही है.. उन्होंने बच्ची को भी तलाशने की कोशिश नहीं की.. जबकि वो 2 दिनो तक लापता थी..लेकिन गरीब होने के कारण वो दलित बस्ती के ही 100 से ज्यादा लोगो को फंसा रहे है। जबकि जांच पीड़िता के साथ हुई घटना की होनी चाहिए। अब देखना ये होगा कि इस मामले में हो रही राजनीति के बाद ये घटना क्या रंग लेती है।
मुथुंगा आंदोलन की याद में आदिवासी सम्मेलन का आयोजन
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला केरल के वायनाड से है, जहां 9 अगस्त को मनाये जाने वाले विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर 2003 में भूमि आंदोलन में हुई गोलीबारी में मारे गए युवक जोगी के लिए एक बार फिर से आवाज उठाई गई है। इस मौके पर वायनाड के सुल्तान बाथरी में एक आदिवासी-दलित सम्मेलन का आयोजन किया गया जहां 2003 में मुथंगा भूमि आंदोलन में पुलिस की बर्बरता के शिकार हुए पीड़ित आदिवासियों ने अब भी इस मामले मे न्याय न मिलने पर फिर से आवाज बुलंद की है। ये आदंलोन तत्कालीन सरकार की वादाखिलाफी को लेकर किया गया था जब वादा करने के बाद भी आदिवासियो को जमीन नहीं दी गई थी.. जिसके बाद 4 जनवरी 2003 को करीब 1000 से ज्यादा आदिवासी परिवालों ने वायनाड के मुथुंगा के जंगलो पर कब्जा कर लिया था.. लेकिन पुलिस ने उनके खिलाफ हिंसक कार्यवाई करते हुए 19 फरवरी को, आदिवासियों की झोपड़ियों में आग लगा दी थी, उनपर लाठीचार्ज किया था, और गोलीबारी शुरु कर दी थी.. जिसमें एक युवक जोगी और एक पुलिस वाले विनोद की मौत हो गई थी। लेकिन इस मामले में सैकड़ो आदिवासियों और आदिवासी नेताओ को ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। करीब 23 साल बीत जाने के बाद भी पीड़ितों को जमीन के लिए अब भी संघर्ष करना पड़ रहा है। इस मामले में अब आदिवासी गोत्र महासभा और अंबेडकरवादी लोकतांत्रिक मोर्चा ने मावनाधिकार उल्लंघन करने औऱ आदिवासियों के साथ अन्याय करने को लेकर न्याय की मांग की है। अब देखना ये होगा कि आदिवासियों को न्याय के लिए और कितने दशकों तक इंतजार करना पड़ेगा।
लखनऊ में नगीना सांसद आजाद का बड़ा खुलासा
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूपी के लखनऊ से है, जहां विधानसभा चुनाव से पहले आजाद समाज पार्टी और नगीना सांसद ने सत्ता रूढ़ बीजेपी और सीएम योगी आदित्यनाथ पर एक बड़ा हमला किया है। उन्होंने लखनऊ में रैली को संबोधित करते हुए खुलासा किया कि पिछले 9 साल में यूपी सरकार ने केवल अपना प्रचार प्रसार करने में ही 7 हजार करोड़ रूपय खर्च कर दिये.. सीएम को हिसाब देना चाहिए कि ये पैसे क्या वो अपनी जेब से इस्तेमाल कर रहे थे। क्या वो जमीन बेच कर लाये थे.. नहीं, ये पैसे जनता का पैसा था, तो फिर उन पैसों से उन्होंने उनके भले का काम क्यों नहीं किया। अगर 7 हजार करोड़ रूपय जनता के भले के लिए इस्तेमाल करते तो 8 आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थाम बन जाते, जिससे हमारे बच्चों का भला होता.. लेकिन सरकार ने वो पैसा पानी की तरह बहा दिया। जनता के खून पसीने की कमाई अपना महिमामंडन में बर्बाद कर दिया.. आखिर इसका हिसाब कौन देगा। आजाद का घोषणा और तीखी बातें साफ इशारा करती है कि अगर राज्य में उनकी सरकार आई तो वो बीजेपी सरकार में किये गए घोटालों की पोल पट्टी खोल कर रख देंगेष वैसे आपको क्या लगता है.. खुद को साफ सुथरी कहने वाली बीजेपी वाकई में पवित्र दामन वाली है।



