Chandrashekhar Azad: हाल ही में चंद्रशेखर आजाद को लेकर खबर सामने आई है जहाँ उन्होंने सत्ता रूढ़ बीजेपी (BJP) के सवर्ण के साथ साथ पिछड़ी और वंचित जाति से आने वाले नेताओं को भी बुरी तरह से लपेटा है। इतना ही नहीं उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद पर तीखा निशाना साधा है।
कैबिनेट मंत्री संजय निषाद पर भड़के आजाद
इन दिनों जहाँ भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद आगामी चुनावों के सिलसिले में पूरे उत्तर प्रदेश में ‘सत्ता परिवर्तन यात्रा’ निकाल रहे हैं और अलग-अलग जगहों पर रैलियां कर रहे हैं, वही उन्होंने… लखनऊ में रैली में बीजेपी के नेताओ को आड़े हाथ लिया आजाद ने अयोध्या रेप केस मामले में आंसू बहाने वाले संजय निषाद को डुप्लीकेट कहते हुए कहा कि घड़ियाली आंसू बहा कर लोगों को दिखाने के कोशिश कर रहे थे कि उन्हें कितना दुख है कि वो अपने लोगों के लिए कुछ नहीं कर पा रहे है, लेकिन सवाल ये है कि अगर ऐसा है तो आप ऐसी खोखली कुर्सी को छोड़ क्यों नहीं देते।
इतना ही नहीं, संजय निषाद पर निशाना साधते हुए चंद्रशेखर आज़ाद ने आगे कहा कि अगर सत्ता या मंत्री पद पर बैठा कोई नेता अपने समुदाय और वर्ग के अधिकारों, सुरक्षा और आत्म-सम्मान की रक्षा नहीं कर सकता, तो उसे पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और उसे इस्तीफ़ा दे देना चाहिए।
“अगर मैं सरकार में होकर अपने लोगों की मदद नहीं कर पाता तो उस खुर्सी को न सिर्फ लात मारता बल्कि पेट्रोल डालकर उसे जला भी देता”
बहुजन समाज पर हो रहे उत्पीड़न पर नगीना सांसद चन्द्रशेखर आजाद का बयान 👇🏻 pic.twitter.com/u6cGJIwFcE
— Priyanshu Kumar (@priyanshu__63) August 9, 2026
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जातीय उत्पीड़न पर उठाये सवाल?
आजाद ने लखनऊ में रैली ने गरजते हुए कहा कि अगर वो संजय निषाद की जगह होते तो उस कुर्सी को केवल छोड़ते नहीं वाली पेट्रोल डाल कर आग लगा देते, जो कुर्सी उन्हें उनके लोगों की रक्षा तक नहीं करने दे रही है। आजाद ने आगे कहा कि हमारी बहन बेटियों पर अत्याचार हो रहा है, और आप निकम्में लोगों की तरह कुछ करने के बजाय केवल आंसू बहा रहे है। पिछले 4 सालों में कैबिनेट मंत्री होकर भी अपने अपने लोगों के लिए क्या किया। अगर आपको वाकई में अपने लोगों की फिक्र होती तो कुर्सी से चिके भी होते। आजाद के ये बोल चेतावनी के उन लोगों के लिये, जो भले ही दलित जाति से हो, लेकिन अगर वो भी अत्याचार के भागीदार है तो उन्हें भी बख्शा नहीं जाएगा।



