Bhakta Charan Das: अभी हाल ही में शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ.. और खबरे तेज हुई कि धर्मेंद्र प्रधान का ओहदा बीजेपी के लिए इसलिए काफी मायने रखती है क्योंकि अकेले उड़ीसा की राजनीति में धमेंद्र प्रधान बीजेपी का चेहरा है.. 2024 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बाजी मारी थी.. वहीं कांग्रेस ने कुछ हद तक वापसी की थी। जिससे कांग्रेस की 2029 के चुनाव की तैयारी अभी से शुरु 2025 से ही हो गई.. औऱ उड़ीसा की कमान कांग्रेस के कद्दावर नेता और दलितों के एक बड़े चेहरे भक्त चरण दास के हाथों में सौंपी गई। उड़ीसा में कांग्रेस को वापसी के लिए एक ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जो जमीनी स्तर पर यहां के लोगो के बीच जा सकें, उनका अपना हो.. ऐसे में भक्त चरण दास से बेहतर चेहरा कौन होता। कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें 2025 में ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। अब सवाल ये है कि कांग्रेस भक्त चरण दास पर उतना भरोसा क्यों कर रही है.. कौन है कांग्रस के ये कद्दावर नेता। अपने इस वीडियो में दलित अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए लड़ने वाले कांग्रसे नेता भकत् चरण दास के बारे में जानेंगे।
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कौन हैं Bhakta Charan Das?
26 नवंबर 1958 को ओडिशा राज्य के भवानीपटना के कालाहंडी में जन्में भक्त चरण दास एक दलित जाति से है। उनके पिता दिबाकर दास और मां बिलाशा दास आम मजदूर थे। आर्थिक तंगी होने के कारण भी माता पिता ने भक्त चरण दास को पढ़ाने लिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने भवानीपटना से इंटरमीडियेट करने के बाद उन्होने संबलपुर यूनिवर्सिटी से पहले बीए किया औऱ फिर लॉ की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने सुनंदा दास से शादी की है औऱ उनके बेटे सागर चरण दास भी कांग्रेस के सदस्य है और 2024 में उड़ीसा विधानसभा के सदस्य बने है। अपनी पढ़ाई के दौरान ही भक्त चरण दास ने 1977 में जेपी मूवमेंट की छात्र विंग युवा छात्र संघर्ष वहिनी में शामिल होकर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई और इंद्रावती हाइड्रो एंड इरीगेशन प्रोजोक्ट में लोकल यूथ के लिए नौकरी देने का आंदोलन में सफलता हासिल की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दो करियर एक साथ किया था।
दलित नेता भक्त चरण दास का राजनीतिक सफर
वो एक तरफ वकालत की भी प्रेक्टिस करते तो वहीं वो बतौर पत्रकार भी लेख लिखा करते थे। इस दौरान भी वो स्टूडेंट मूवमेंट से जुड़े रहे थे। हालांकि उनका पूरा फोकस उस दौरान उड़ीसा के ग्रामीण क्षेत्र पर थे। उन्होंने समाजिक असामनता, जातिगत भेदभाव, दलितों और पिछड़ो की गरीबी और भूखमरी के साथ साथ आर्थिक पिछड़ेपन को लेकर कई महत्वपूर्ण लेख के जरिये ऐसे मुद्दों को उठाया था.. जिसके कारण उनकी लोकप्रियता बढ़ने लगी.. वो एक तरफ एक पत्रकार बन कर जहां ऐसे संवेदनशील मुद्दों को घर घर पहुंचाने का काम करते तो वहीं गरीब, वंचितो और पिछड़ो के न्याय के लिए वो खुद अदालत में खड़े होकर मुकदमें लड़ा करते थे। धीरे धीरे वो दलितों के लिए आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और उनके अधिकारों के लिए वाले लीडर बन गए… इस दौरान उन्होंने महसूस किया है कि अगर वाकई में बदलाव लाना है तो वहां पहुंचना होगा जहां से सारे फैसले होते है.. और उन्होंने 1985 में सक्रिय राजनीति में आने का फैसला किया।
अपने पैतृक क्षेत्र भवानीपटना से लोकसभा चुनाव में खड़े हुए.. और पहले ही अटेंम्प में विधायक बन कर ये दिखा दिया कि जनता के लिए उन्होंने वाकई में क्या किया है। 1985 से लेकर 1989 तक उन्होंने राज्य स्तर पर जो अहम मुद्दों उठाये थे उसके कारण उन्हें जल्द ही राष्ट्रीय राजनीति में आने का मौका मिला। उन्होंने जनता दल के नेतृत्व में कालाहांडी लोकसभा सीच से चुनाव लड़ा और सांसद चुन कर संसद पहुंचे। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्र शेखर सिंह से करीबी रिश्ता होने के कारण उन्हें जल्द ही राजनीति में बड़ी पहचान मिली और वहीं एक्स पीएम वीपी सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के उप मंत्री के तौर पर नियुक्त किया गया था। जिसके बाद जब चंद्र शेखर सिंह पीएम बने तो भी उनका औहदा सरकार में काफी मायने रखता था..औप उन्हें भारत सरकार के रेल मंत्रालय में राज्य मंत्री चुना गया। लेकिन वहीं जनता दल में पड़ती फूट और नेतों के बढ़ते अहंकार के कारण उन्हें अहसास हुआ कि वो जनता दल का हिस्सा नहीं रह सकते औऱ उन्हें रेल मंत्री बनने के कुछ समय के बाद जनता दल छोड़ दिया।
जिसके बाद उन्होंने 1996 में हुए चुनावों में निर्दलिय चुनाव लड़ कर भी संसद पहुंच गए.. कांग्रेस ने उनका पोटेंशियल देखा और उन्हें अपने पाले में लाने में जरा भी देरी नहीं की.. 1996 में भक्त चरण दास ने कांग्रेस को जॉइन कर लिया था। जिसके बाद 1998 में लोकसभा भंग हो गई लेकिन वो कांग्रेस के लिए एक मजबूत स्तंभ बन गए थे। जिसके बाद 2009 तक भक्त चरण दास सांसद के तौर पर पद पर आसीत रहे थे। 2009 में उन्होंने एक बार फिर जीत हासिल की और सांसद के साथ साथ भारत के वित्त आयोग के सदस्य के तौर पर पर भी काम किया। हालांकि 2014 के आम चुनावों में बीजेपी के आने के बाद भले ही भक्त चरण दास कालाहांडी सीट बीजेडी उम्मीदवार अर्का केशरी देव से हार गए थे, लेकिन बावजूद इसके उनकी भूमिका अब राष्ट्रीय स्तर पर काफी बढ़ गई।
उन्हें ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी में बिहार, मिजोरम और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के लिए हाई-प्रोफाइल प्रभारी नियुक्त किया.. वहीं 2019 और 2024 के आम चुनावों के दौरान ओडिशा कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष के तौर पर काम किया, लेकिन कांग्रसे की हार के कारण उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.. मगर कांग्रेस ने उनपर फिर से भरोसा जताया और फरवरी 2025 में फिर से ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष पद उन्हें दे दिया गया। कांग्रेस जानती है कि भक्त चरण दास ही वो नेता है जो जनता के बीच कांग्रेस के लिए फिर से भरोसा कायम कर सकते है।



