Ravi Tamta: पिछले कुछ दिनों से एक एक खबर काफी सुर्खियों में बनी हुयी है। दरअसल, उत्तराखंड के हल्द्वानी के रहने वाले दलित युवक रवि टम्टा ने कुछ ऐसा कर दिखाया है जिसकी हर जगह चर्चा हो रही है। जी हाँ, सालों की कड़ी मेहनत के बाद रवि ने एक उड़ने वाली कार बनाई है। तो चलिए आपको इस लेख में रवि टम्टा के बारे में विस्तार से बताते है।
कौन है रवि टम्टा? Who is Ravi Tamta?
आप सभी ने यह कहावत ज़रूर सुनी होगी कि अगर आपमें कड़ी मेहनत और जुनून हो, तो कुछ भी किया जा सकता है और कुछ भी हासिल किया जा सकता है। पहाड़ों से निकला एक ऐसा हुनर जिसने पूरे देश को हैरान कर दिया, बिना किसी साइंस की पढ़ाई के, केवल इंटरनेट के दम पर उत्तराखंड के एक युवा ने भारत की अपनी पहली स्वदेशी ‘Flying Car’ बनाकर इतिहास रच दिया है। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के काफलीखान गांव के रहने वाले रवि टम्टा ने अपनी कंपनी ‘Hapida Sky Private Limited’ के तहत HAPIDA SKYNeX नाम के एक इलेक्ट्रिक पर्सनल एरियल व्हीकल का सफल परीक्षण किया है। अल्मोड़ा के आर्मी हेलीपैड पर जब इस स्वदेशी फ्लाइंग कार के प्रोटोटाइप ने हवा में करीब 1 मिनट तक उड़ान भरी, तो वहां मौजूद हर शख्स दंग रह गया।
रवि के पिता एक मोटर मैकेनिक हैं और रवि ने कोई इंजीनियरिंग या साइंस की पढ़ाई नहीं की, बल्कि नैनीताल से Arts में ग्रेजुएशन किया है। साल 2015 में उड़ने वाली कार का सपना देखने वाले रवि ने हार नहीं मानी, इंटरनेट और यूट्यूब से तकनीकी ज्ञान हासिल कर, करीब डेढ़ साल की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने देश-विदेश के पुर्जों को मिलाकर यह प्रोटोटाइप तैयार कर दिखाया। यह 100% पर्यावरण-अनुकूल और इलेक्ट्रिक है, रवि का मानना है कि फ्यूचर में यह तकनीक उत्तराखंड जैसे दुर्गम पहाड़ी इलाकों में वरदान साबित होगी..रवि टम्टा ने साबित कर दिया कि हौसले बुलंद हों, तो पहाड़ जैसी चुनौतियां भी छोटी पड़ जाती हैं।
हवा में उड़ने वाली कार के बारे में जानकारी
- बता दें, इस कार का नाम HAPIDA SKYNeX है।
- यह पूरी तरह से इलेक्ट्रिक (eVTOL) सिंगल-सीटर एयर व्हीकल है, जिसे ड्रोन टेक्नोलॉजी में बड़े बदलाव करके बनाया गया है।
- पहाड़ी इलाकों की लंबी और घुमावदार सड़कों से जुड़ी चुनौतियों को दूर करना।
- रवि के अनुसार, सड़क मार्ग से 90 मिनट (लगभग 40 किमी) का सफर इस वाहन से हवा के रास्ते सिर्फ़ 10 से 15 मिनट में पूरा किया जा सकता है।
- इसके अलवा अल्मोड़ा के एक खुले मैदान/हेलीपैड पर सफल फ़्लाइट टेस्ट किया गया, जिसमें वाहन हवा में उड़ा।
हालाँकि इस पहले भी रवि ने कई प्रयोग किए हैं। इससे पहले, उन्होंने एक ऐसी छड़ी बनाई थी जो मोबाइल फ़ोन को चार्ज कर सकती थी और फ़्लैशलाइट का काम भी कर सकती थी। 2007 में, उन्होंने एक बोतल के अंदर बनाई गई बैटरी का इस्तेमाल करके बल्ब जलाया था। 2019 में, उन्होंने एक इलेक्ट्रोलाइट पंप मशीन बनाने का दावा किया था; उनका कहना था कि इस टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रिक गाड़ियों को कम समय में चार्ज किया जा सकेगा। इसके अलावा, रवि ने मोबाइल-चार्जिंग वाले जूते और शुरुआती दौर के हेलिकॉप्टर मॉडल जैसे इनोवेशन पर भी प्रयोग किए हैं।



