Top 5 Dalit news: दलितों की स्थिति में वाकई में बदलाव अगर कोई ला सकता है तो वो उस राज्य की सत्ता पर काबिज सरकार है। क्योंकि कानून हो या प्रशासन सब कुछ उनके इशारे पर ही चलता है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो इस बात का साक्षी है कि कैसे दलितों का समीकरण सरकार को भी अपने सुर बदलने पर मजबूर कर सकता है। बशर्ते दलित खुद एकजुट हो..
शिवपुरी में दलित छात्र के साथ अमानवता
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला मध्य प्रदेश के शिवपुरी से है। जहां एक दलित छात्र ने अपने ही शिक्षक की बोतल से पानी क्या पी लिया, शिक्षक को ये बात इतनी नागवार गुजरी कि इसने छात्र की बड़ी बेरहमी से डंडे से पिटाई की। ये मामला शिवपुरी जिले के कोलारस थाना क्षेत्र के उकावल गांव का है। जहां शासकीय प्राथमिक स्कूल में क्लास 4 में पढ़ने वाले 8 साल के दलित छात्र के साथ ये अमानवीय हरकत की गई। पीड़ित छात्र के साथ ये घटना 27 जुलाई को घटित हुई थी, जिसके बाद 28 जुलाई को उसके पिता राज जाटव ने पुलिस में शिक्षक लोकेश शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज कराया। पिता ने ये भी आरोप लगाया कि कक्षा में कई बच्चे थे और उनके सामने ही शिक्षक ने बच्चे को जातिसूचक गालियां देनी शुरू कर दी थी। पुलिस ने इस मामले की तुरंत जांच शुरू कर दी है, हालांकि दो दिनों से ज्यादा बीतने के बाद भी अभी तक न तो शिक्षक को गिरफ्तार किया गया है और न ही स्कूल प्रशासन की तरफ से कोई बयान आया है। वहीं छात्र इस घटना के बाद से काफी सदमे में है, अब देखना ये होगा कि क्या वाकई में इस मामले में जांच हो भी रही है या मामला अंदर ही अंदर रफा दफा हो चुका है।
यूपी सीएम ने दलितों को साधने के लिए चली बड़ी चाल
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश से है, जहां आगामी विधानसभा चुनावों से पहले ही दलित सियासत अपने चरम पहुंच रही है। अब तक सपा बसपा और आसपा जैसी पार्टियां खुद को दलित हितैषी बता कर उन्हें साधने की कोशिश कर रही है, लेकिन इसी बीच सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ा स्ट्रोक खेला है, जो विपक्ष को चारों खाने चित्त कर सकता है। दरअसल यूपी के एससीएसटी वर्ग के वोटर को खुश करने के लिए पूर्व सीएम अखिलेश यादव की गलतियों को सुधारते हुए सीएम योगी ने भदोही जिले का नाम बदलकर संत रविदास जनपद कर दिया है। साल 2012 से पहले पूर्व सीएम मायावती ने ये नाम दिया था लेकिन 2012 में अखिलेश यादव के सीएम बनने के बाद उन्होंने नाम बदल कर भदोही कर दिया था। लेकिन रविदासियां समुदाय के सम्मान में सीएम योगी का ये कदम बेहद सराहनीय है, खासकर तब जब पंजाब चुनाव से पहले बीजेपी रविदासियां समुदाय को साधने के लिए संत रविदास जी के 650 जयंती से पहले समरसता संकल्प अभियान यात्रा शुरू कर रही है जो कि काशी में फरवरी 2027 में उनके जन्मस्थान पर जाकर रुकेगी। ऐसे में उससे पहले यूपी में इतना बड़ा बदलाव बीजेपी के लिए क्या पंजाब की रहे आसान करेगा, ये देखने वाली बात होगी।
बाड़मेड में पिछले 55 दिनों से दलित बुजुर्ग का धरना प्रदर्शन
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजस्थान के बाड़मेड से है, जहां जातिवादी दबंगों द्वारा अपनी जमीन हड़पे जाने के बाद एक 60 साल का बुजुर्ग पिछले 55 दिनों से जिला कलेक्टरेट के सामने अकेले ही मौन धरने पर बैठा था। भीषण गर्मी और तेज बारिश ने जब उसका हौसला कमजोर नहीं किया तब जाकर प्रशासन भी नींद से जागी। ये मामला बाड़मेड जिले के देदूसर गांव का है। पीड़ित अंबारम मेघवाल ने करीब दो महीने पहले राणा राजपूतों के खिलाफ मामला दर्ज कराने की कोशिश की थी कि उसकी पुश्तैनी जमीन को राजपूतो ने जाली दस्तावेज दिखा कर जबरन हड़प लिया है। उन्होंने कई बाद पुलिस थाने के चक्कर लगाए लेकिन जब वहां से न्याय की उम्मीद नहीं दिखी तो वो जिला मुख्यालय के सामने तंबू गाड़ कर मौन धरने पर बैठ गए। करीब 55 दिनों तक वो ऐसे ही धरना दे रहे थे, लेकिन स्थानीय मीडिया को जब उसकी खबर लगी तो उन्हें पीड़ित की अपील को सोशल मीडिया पर डाल दिया। जिसे बाद चोहाटन के स्थानीय बीजेपी विधायक अदुरम मेघवाल खुद उनकी सुध लेने पहुंचे, जिसने प्रशासन को भी नींद से जगा दिया। प्रशासन ने अब अम्बाराम को आश्वासन दिया है कि वो उसकी जाँच करेंगे, और जमीन भी उन्हें दिलाएंगे। वहीं जो भी इस फर्जीवाड़े का दोषी होगा उसे कानूनी तौर पर सजा भी होगी।
भीम आर्मी चीफ ने सदन में लगाई हुंकार
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ औऱ नगीना सांसद चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिन्होंने एक तरफ सदन में जंतर मंतर पर छात्रों के साथ हुए व्यावहार को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार छात्रों से ऐसे डील कर रही है जैसे वो किसी आतंकी से डील करती है.. हैरानी की बात तो ये है कि सदन में जब आजाद ने बोलना शुरु किया तो उन्हें बीच में ही रोकने की कोशिश की गई.. लेकिन हमेशा की तरह आजाद अन्याय के खिलाफ खड़े रहे.. जिसे देखते हुए उन्हें अपनी बात कहने दी गई.. वहीं उन्होंने पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बोंस के इस्तीफे की मांग को लेकर कहा कि जो गलत होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी.. चाहे वो किसी भी राज्य का शिक्षा मंत्री ही क्यों न हो.. जरूरी है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार किये जाये ताकि बच्चों का भविष्य़ खराब न हो। आजाद के संदेश ने साफ कर दिया है कि वो केवल अन्याय के खिलाफ खड़े है.. जो अन्याय करेगा, उसे आजाद का सामना करना पड़ेगा.. चाहे वो केंद्र सरकार हो या राज्य की सरकार। आजाद ने अपने संदेश के जरिये ये बता दिया है कि अगर उनकी सरकार आती है तो राज्य में शिक्षा व्यवस्था को प्रायोरिटी पर रखा जायेगा।
मेरठ में पॉश इलाके में भी दलित बस्ती का बुरा हाल
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ से है जहां अमीर और पढ़े लिखे लोगों की बस्ती में भी कैसे जातिवाद का बोलबाला है, इसका नमूना देखने को मिला। दरअसल मेरठ के वार्ड 16 इलाके को जिले का काफी रहीस इलाका माना जाता है लेकिन वार्ड 16 अजंता कॉलोनी के ही दलित बस्ती को प्रशासन ने पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है। बाहर से तो ये काफी विकसित लगता है लेकिन दलित बस्ती में न तो सड़के है और न ही बिजली पानी की सटीक व्यवस्था। बिजली के नंगे तार लटक रहे है, जो यहां के लोगों को मौत के साये में जीने पर मजबूर कर रहा है। इतना ही नहीं स्थानीय लोगों ने कई बार इसके लिए शिकायत भी की की लेकिन प्रशासन कानों में तेल डाल कर सोई है। दलितों की बस्ती को अलग थलग करने के लिए जिन सड़कों का पक्का निर्माण करवाया गया वो भी बस्ती से ऊंचा है। बारिश के दिनों में दलितो के घरों में गंदा और दूषित पानी घुस जाता है.. न तो पानी निकासी की व्यवस्था की गई और न ही अब तक कोई कूड़ा गाड़ी की… सड़को पर गंदगी कई कई दिनों तक फैली रहती है.. यहां रहने वाले पीड़ित परिवारों का कहना है कि वो इस नारकीय जिंदगी को जीने के लिए मजबूर है, नेता केवल चुनावों के समय चेहरा दिखाते है, और फिर उनका हाल तक जानने की जरूरत किसी को महसूस नहीं होती। उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जाता हैं जैसे वो कोई भारत के नागरिक नहीं बल्कि बाहर से विस्थापित होकर आए है। वहां रहने वाले नागरिको का कहना है कि राज्य में विकास भी जातिगत भेदभाव के आधार पर हो रहा है… इस खबर के सामने आने के बाद एरिया की पार्षद ने सफाई पेश की है क्षेत्र में सफाई कर्मचारी की कमी है इसलिए काम में देरी हो रही है..सोचने वाली तो ये है कि जो हालात दलित बस्ती के है वो दो चार दिन में होने वाले हालात तो है नहीं.. फिर क्या माना जाये.. क्या दलित बस्ती होने के कारण ही उन्हें अनदेखा नहीं किया गया।



