भारतीय राजनीति में थोड़ी भी दिलचस्पी रखने वाले हर एक शख्स को पता है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी कट्टर हिंदूवादी विचारधारा और मनुस्मृति के कानूनों को काफी हद तक सही ठहराने वाली राष्ट्रीय स्वंय सेवा संघ की ही राजनीति शाखा है। जिसे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की लगाई इमरजेंसी के बाद कांग्रेस की दमनकारी नीतियों और उसके एकाधिकार को समाप्त करने के लिए ही बनाई गई थी, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कभी आरएसएस का हिस्सा रहे थे.. इसलिए उनकी विचारधारा भी आरएसएस से ही प्रभावित होने के आरोप लगते ही रहते है।
दलित लड़के ने मोदी से पूछा मनुस्मृति या संविधान
वहीं कई बड़े मुद्दों पर उनका मीडिया से बात न करना भी उन आरोपो को काफी हद तक सही भी साबित कर देता है, लेकिन बावजूद इसके वो एक लोकतांत्रिक देश के सर्वोच्च पद पर आसीत है ऐसे में वो किसी एक विचारधारा पर नहीं चल सकते है, सबका साथ सबका विकास की विचारधारा लेकर चलने वाले पीएम मोदी खुद किस विचारधारा को चुनेंगे… ये सबसे बड़ा सवाल है.. कुछ ऐसा ही सवाल पूछा गया था उनके ही द्वारा चलाए गए वार्षिक कार्यक्रम परिक्षा पर चर्चा में.. जब एक दलित छात्रा ने उनसे सीधा पूछा कि वो संविधान का कानून सही मानते या आरएसएस की मनुस्मृति की विचारधारा को… ऐसे में क्या था पीएम मोदी का जवाब.. जानेंगे इस वीडियो में क्या कहा पीएम मोदी ने।
पीएम मोदी का कार्यक्रम परीक्षा पर चर्चा
दरअसल साल 2018 में पीएम मोदी ने एक कार्यक्रम शुरु किया था परिक्षा पर चर्चा, इसमें देश भर से चुने हुए छात्रों को फाइनल परिक्षा से पहले पीएम मोदी से मुलाकात करके परीक्षा की तैयारियों और कैसे उसे तनावमुक्त होकर देना चाहिए उस पर चर्चा होती है.. इस कार्यक्रम में बच्चों के साथ साथ उनके माता पिता, टीचर भी शामिल होते है ताकि वो ये समझ सकें कि परीक्षा केवल खुद को परखने का एक तरीका है, जिसमें आप अपनी प्रतीभा की पहचान करते है, इसमें टाइम मैनेजमेंट, concentration, hard विषयों को कैसे समझना और उससे कैसे डील करना चाहिए उस पर सीधा पीएम मोदी से ही चर्चा होती है।
इसमें छात्रों को ऑनलाइन एग्जाम देकर एग्जाम वॉरियर्स बनना होता है और जिसका सेलेक्शन होता है वो सीधा पीएम से सवाल करते है.. लेकिन 2025 में जहां जातिगत भेदभाव ने फिर से तेजी से फैलाना शुरु कर दिया है, इस दौरान एक छात्रा ने पीएम से ऐसे सवाल किये जिसने सबको हैरान कर दिया। दरअसल ये छात्रा एक दलित जाति से आती थी, उसने एक निबंध लिखा था मुझे परीक्षा से नहीं बल्कि जातिवाद से डर लगता है,. ये निबंध इतना प्रभावशाली था कि इस दलित बच्ची का भी सेलेक्शन हुआ इस कार्यकर्म में।
इस दलित छात्रा ने कई सवाल पूछे थे
पहला सवाल – दलित भी पूरी मेहनत करते है समाज में एक बेहतर पद पाने के लिए, दिन रात मेहनत करते है, लेकिन हमारी मेहनत को आरक्षण की देन कह दिया जाता है, तो क्या हमें संविधान से शर्म आनी चाहिए.. जिस पर पीएम मोदी का जवाब सबको सुनना चाहिए.. पीएम इस सवाल का जवाब देने से पहले कुछ क्षण रूके और बड़े ढृढ़ स्वर में कहा कि मेहनत किसी की भी बपौती नहीं है, सफलता का सम्मान हर किसी को करना चाहिए।
जो भी इस बात का तंज कसता है कि तुम्हारी मेहनत आरक्षण की देन है तो वो अपनी दकियानूसी सोच और हार को छिपाने की कोशिश कर रहा है.. इसलिए संविधान से शर्मिदा होने के बजाये उस हक को जियो जो तुम्हें सम्मान से जीने का सफल होने का अधिकार देता है, शर्मिदा तो उन्हें होना चाहिए जो तुम्हारी जाति की आड़ में अपनी हार छिपा रहे है।
दूसरा सवाल क्या पूछा
दलित लड़की ने फिर से पूछा कि स्कूल जाये या किसी भी उंचे संस्थान में,, नाम से पहले जाति क्यों पूछी जाती है, क्या ये मेरी शिक्षा की परिक्षा है या समाजिक जाति नीति की.. ये सवाल समाज का वो आईना था, जिसे भारत की लाखों करोड़ो दलित बच्चे शायद रोजाना झेलते है.. पीएम मोदी ने इस बार बड़े गंभीर स्वर में कहा कि संविधान सभी जाति धर्मो को समान शिक्षा का हक देता है, इसलिए अगर कोई भी स्कूल में आपके साथ भेदभाव करता है ।
तो ये केवल आपका अपमान नहीं होता बल्कि संविधान की भावना का भी अपमान होता है जिसके सभी को समान अधिकार दिया है, पीएम ने कहा कि वो इस बात पर शर्मिंदा महसूस करते है कि स्कूल जैसी जगह पर जहां से ये सब खत्म होने की शिक्षा मिलनी चाहिए थी, वहीं से ये सब शुरु कर दिया जाता है।
तीसरा सवाल क्या पूछा
तीसरा सवाल उस व्यवस्था की सच्चाई थी, जब दलितों को इंसानों के बराबर भी नहीं समझा जाता. लड़की ने पूछा कि जब कोई दलित टॉपर होता है तो तुरंत कहा जाता है कि वो आरक्षण के दम पर टॉपर हुआ है, लेकिन जब कोई गटर में मरता है तब कोई उसके लिए आवाज क्यों नहीं उठाता.. अच्छा करें तो सबको परेशानी है लेकिन बुरा हो तो कोई जिम्मेदारी क्यों नहीं लेता..पीएम ने इस सवाल का जवाब देने में थोड़ा समय लिया और कहा कि ये सवाल समाज का वो आईना है।
जिसे सही में कोई देखना नहीं चाहता है। सच तो ये है कि किसी दलति छात्र का टॉप करना आरक्षण के तराजू पर तोलने से ये केवल उसकी मेहनत का ही नहीं संविधान का भी अपमान है। लेकिन दलित के मौत पर चुप रहना हमारी सबसे बड़ी कमी को दर्शाता है, ये समाज की सबसे बड़ी हार है।
क्या आपको परिक्षा से पहले कभी डर लगा
छात्रा ने पूछा कि पीएम सबका साथ सबका विकास की बात करते है तो आज भी दलितों को मंदिरों में प्रवेश पर रोक क्यों है, जबकि भगवान तो सबके लिए है उन पर किसी का कॉपीराइट नहीं है, पीएम ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि जो ये भेदभाव कर रहा है वो किसी आस्था के कारण नहीं हो सकता है, वो केवल अंधविश्वास है। जब तक हर जाति का, हर वर्ग का व्यक्ति मंदिर से लेकर देश के संसद तक आजादी से आ जा नहीं जाता तब तक सबका साथ सबका विकास संभव ही नही होगा। लड़की ने फिर अगला सवाल पूछा- क्या आपको परिक्षा से पहले कभी डर लगा।
क्योंकि उसे कभी परिक्षा के सवालो से नहीं बल्कि उन नजरो से डर लगता है जो सफल होने पर उसकी सफलता को आरक्षण की कसौटी पर तौलेंगे। जिस पर पीएम ने लड़की के दर्द को करीब से समझते हुए कहा, वो इस दर्द से खुद गुजर चुके हैं ऐसा कई बार हुआ जब उनकी पहचान को उनकी काबिलियत से ज्यादा महत्ता दी गई.. लेकिन तब सवाल नहीं उठते थे लेकिन अब उन्हें फक्र है कि देश की बहादुर बेटियां सवाल कर रही है, . सवाल करने की ताकत ही उन्हें समाज में बराबरी दिलायेगी। वो अपने अधिकारों को समझ पायेंगे। ये सवाल उस व्यवस्था का भी आईना था जो आज भी बच्चों को जाति के आधार पर तौलते है, उनकी काबिलियत से नहीं।



