Top 5 Dalit news: आपने अक्सर मनुवादियों को इस बात का रोना रोते देखा होगा कि दलितो को सबकुछ मिला है.. लेकिन ऊंची जाति वालों के साथ अन्नाय हुआ है। लेकिन क्या वाकई में दलितो पिछड़ो को सबकुछ मिला है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो इस आपको ये सोचने पर मजबूर कर देंगे कि जो अधिकार दलितों को मिले.. क्या वो उसका इस्तेमाल भीकर पाते है या नहीं।
झांसी में 9 साल की बच्ची के साथ मंदिर में छेड़छाड़
1, दलितो से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के झांसी से है, जहां दलितो की बहू बेटियों की उम्र चाहे कितनी भी हो… मनुवादियों के लिए वो केवल उत्पीड़न का सामान मात्र ही है। ताजा मामला झांसी जिले के समथर थाना क्षेत्र का है, जहां वैसे तो दलितो को मंदिरों में प्रवेश करने के नाम पर भी आंखे निकलती है, लेकिन गांव के मंदिर के एक पुजारी ने 9 साल की बच्ची को मंदिर के ही एक कमरे में ले जाकर अश्लील हरकतें की, तब जातिवादियों को ये सही लगा। ये घटना 28 जुलाई को घटित हुई थी, जिसके बाद बच्ची की मां ने पुलिस को तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस की कार्यवाई से नाराज गांव की पंचायत ने 2 अगस्त को पूरे परिवार का दूध-पानी, दुकान, खेत और रास्ते तक बंद करने का फरमान सुना दिया। साथ ही केस वापिस लेने का भी दवाब बनाया गया, लेकिन जब पीड़ित परिवार नहीं माना तो 5 सितंबर को पूरे परिवार के साथ मारपीट की गई.. हैरानी की बात है कि इस मामले को करीब डेढ़ महीने बीत चुके है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई ही नहीं है.. और न पंचायत के खिलाफ कोई एक्शन लिया गया है। इस खबर के सामने आने के बाद भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद ने पीड़ित परिवार के लिए आवाज उठाई है.,.उन्होंने सीएम से पीड़ित परिवार की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है.. साथ ही आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की.. अब देखना ये होगा कि डेढ़ महीने से न्याय का इंतजार कर रहे पीड़ित परिवार को क्या अब भी न्याय मिलेगा।
बाबा साहब का अपमान करने वालों के खिलाफ प्रदर्शन
2, दलितो से जुड़ा अगला मामला पंजाब के लुधियाना से है, जहां बाबा साहब का अपमान करने वालों के खिलाफ दलित समाज ने न केवल मोर्चा खोल दिया बल्कि उन्होंने नेशनल हाइवे जाम करके तुरंत आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दरअसल लुधियाना के जांलधर बाईपास चौर पर बाबा साहब की प्रतिमा के आरोपियों ने पहले तो क्षतिग्रस्त कर दिया और फिर उन्हें जूतों की माला पहना कर अपमानित करने की साजिश की गई थी। जाहिर है ये घटना दलित समाज को ठेस पहुंचाने के लिए अंजाम दी गई थी.. बाबा साहब के अपमान के विरोध में दलित और वाल्मिकी समाज ने 9 सितंबर को लुधियाना में बंद बुला कर चक्का जाम कर दिया.. इस कारण नेशनल हाइवे करीब पांच घंटो तक बाधित रहा.. वहीं इस प्रदर्शन को शांत करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, साथ प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया गया कि वो जल्द आरोपियों को धर दबोचेंगे। जिसके बाद धरना खत्म हुआ.. दूसरी तरफ पुलिस लगातार सीसीटीवी कैमरे खंगाल रही है ताकि आरोपियो को जल्द से जल्द पकड़ा जा सकें.. अब देखना ये होगा कि क्या ये मामला ऐसे ही शांत हो जायेगा, या इस पर बड़ा राजनीति रंग सामने आने वाला है।
जातिवादी अजीत भारती एससी एसटी एक्ट के खिलाफ पहुंचा हाईकोर्ट
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला राजधानी दिल्ली से है, जहां दलित समाज की एकता ने बता दिया है कि दलित अब कमजोर नहीं है.. अब वो ईंट का जवाब पत्थर से देना जानते है। जी हां, अपने यूट्यूब चैनल पर दलित समाज की बहू बेटियों का अपमान करने, बाबा साहब का अपमान करने और नगीना सांसद चंद्र शेखर आजाद का अपमान करने वाले अजीत भारती को भी अब कानून और दलित समाज की असली ताकत का अंदाजा हो गया है। एक तरफ पटियाला कोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी तो वहीं अब खबरे आ रही है कि एससी एसटी एक्ट में अपनी गिरफ्तारी रोकने के लिए अजीत भारती दिल्ली हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी में है। वहीं अजीत भारती की एससी एसटी एक्ट मामले में फंसे होने के बाद भी गिरप्तारी न होने से कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होने लगे है। बता दें कि 22 अगस्त को अजीत भारती ने आरक्षण हटाओ आंदोलन को लेकर एक प्रोग्राम में कई जातिगत टिप्पणी की थी, औऱ आजाद को लेकर भी अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था.. जिसे लेकर आसपा ने भारती के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। सोर्सेज की माने तो हाई कोर्ट अजीत भारती की जमानत को लेकर अगले हफ्ते सुनवाई कर सकती है। अब देखना ये होगा कि अजीत भारती को बेल मिलती है या वो दलित अपमान के गुनाह में जेल की हवा काटेंगे।
सपा का कपड़े का रंग बदलने पर ओपी राजभर की चुटकी
4, दलितो से जुड़ा अगला मामला यूपी से है, जहां अब पक्ष हो या विपक्ष सभी दलित मतदाताओं को साधने के लिए नए नए हथकंडे अपना रहे है तो वहीं उनके विपक्ष चुटकी लेने से पीछे नहीं हट रहे है.. दरअसल अभी हाल ही में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने यूथ विंग में नीली रंग की टीशर्ट पहनने की पहल की है, साथ ही उन्होंने सम्राट अशोक जयंती की छुट्टी की मांग की है, लेकिन अखिलेश यादव की इन हरकतो को लेकर कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने जमकर चुटकी लेनी शुरु कर दी है। उन्होंने अखिलेश यादव को घेरते हुए कहा कि केवल रंग बदलने से विश्वास नहीं बदल जाता। सपा का सियासी सगूफा और अखिलेश का पीडीए अब सब समझ गए है। इतना ही नहीं नीले रंग को उन्होंने बसपा का प्रतीक कहा है। सच तो ये है कि सपा राज में सबसे ज्यादा दलितो की ही अवहेलना हुई। महापुरुषो के स्मारकों का काम रोका गया और कांशीराम और बाबा साहब के नामो से जुड़े स्थानो के जानबूझ कर उंची जाति का वोटबैंक बनाने के लिए नाम बदल दिये गए। केवल कपड़े बदल लेने से शख्सियत नही बदलती .. और अखिलेश की ये चाल अब जागरूक हो चुके दलितो पर काम नहीं आयेगी। ओपी राजभर ने तीखे शब्दों को अखिलेश यादव की political planning को जीरो कहा है। अब देखना ये होगा कि राजभर के तंज का अखिलेश क्या पलटवार करते है।
भीम आर्मी कार्यकर्ता नीशू आजाद की बढ़ी मुश्किलें
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला यूपी के गाजियाबाद से है, जहां 14 साल की भीम आर्मी कार्यकर्ता नीशु आजाद की सुरक्षा औऱ जातिवादियों द्वारा लगातार किये जा रहे प्रताड़ना का एक और नमूना देखने को मिला। दरअसल नीशू के पिता पर हमला करने वाले स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ लिये गए एक्शन के बाद नीशू का उसके ही घर में रहना दूभर हो गया है। उसके पिता पर लगातार आरोप लग रहे है कि उन्होंने ये मामला पैसे लेकर उछाला है, तो वहीं अब उन्हें उनकी सोसाईटी में घर खाली करने का दवाब बनाया जा रहा है.. नीशू आजाद लगातार अपने पिता औऱ अपने लिए न्याय की मांग कर रही है.. वायरल वीडियो के बाद खुद नगीना सांसद चंद्र शेखर आजाद ने नीशू आजाद के साथ दिल्ली में एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसके बाद 5 सितंबर को उसे गिरफ्तार किया था,..लेकिन 7 सितंबर को पटियाला हाउस कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिनों की रिमांड पर भेज दिया है, जिससे बौखलाए उसके समर्थक लगातार प्रदर्शन कर रहे है साथ ही वो नीशू आजाद और उनके पिता संजय कुमार को भी टारगेट कर रहे है। हैरानी की बात है कि संजय कुमार पर जानलेना हंमला हुआ तब भी प्रशासन चुप था, और जब नीशू को न्याय मांगने के लिए टारगेट किया जा रहा है तब भी प्रशासन चुप है। अब देखना ये होगा कि 14 दिन की रिमांड के बाद कोर्ट का क्या रूख होगा।



