Top 5 Dalit news: सहारनपुर सरकारी अस्पताल डॉक्टर ने आनन फानन में बनाई झूठी रिपोर्ट, चंद्रशेखर आजाद ने लगाई जमकर लताड़

Caste Discrimination with Dalits, Top 5 Dalit News
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Top 5 Dalit news: बाबा साहब ने दलितों को पानी पिलाने के अधिकार के लिए महाड़ आंदोलन तक कर दिया था, लेकिन आज भी मनुवादियों की मानसिकता जरा भी नहीं बदली.. जहां सार्वजनिक नलों से भी पानी लेने के बदले दलितों को सहनी पड़ती है लाठी.. फिर कहां हुई बराबरी… और कहां है दलितों के लिए न्याय…तो चलिए इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।

सहारनपुर में ठाकुरों और दलितो के बीच झड़प

1, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले है, जहां एक तरफ तो यूपी में दलितो के साथ अत्याचार कम होने के आकड़े दिखाये गए है तो वहीं आये दिन दलितो के साथ होने वाली घटनाओं से तो अब इन आकड़ो पर भी शक होने लगा है। जी हां, ताजा मामला सहारनपुर जिले के देवबंद के लालवाला गांव का है, जहां दलितों की जमीन को जबरन हड़पने के मामले में ठाकुरों और दलितो के बीच जमकर झड़प हुई। हैरानी की बात है कि जब दलित समुदाय की मदद के लिए भीम आर्मी के कार्यकर्ता वहां पहुंचे तो ठाकुरों ने पहले तो उनपर पत्थर फेंके औऱ फिर गोलीबारी शुरु कर दी।

पीड़ित नरेश कुमार ने बताया कि उसने ठाकुर समाज से आने वाले रविंद्र कुमार राणा को अपनी 2 बीघा जमीन संविदा खेती के लिए दी थी, लेकिन अब पीड़ित ने जमीन वापिस मांगी जो जाली दस्तावेज दिखा कर आरोपी ने जमीन को अपना बता कर देने से इंकार कर दिया .. यहां तक कि वरिष्ठ जिला अधिकारी के कहने पर भी आरोपियो ने जमीन नहीं दी.. जिससे पीड़ित ने भीम आर्मी से मदद मांगी.. लेकिन आरोपियों ने उनपर भी हमला कर दिया।

जिसके जवाब में दलित समुदाय ने भी पत्थरबाजी की.. जिससे ये हिंसा में बदल गई..लेकिन समय रहते ही पुलिस वहां पहुंच गई और मामले को शांत कराया.. फिलहाल पूरा इलाका छावनी में तब्दील कर दिया गया है, लेकिन हैरानी की बात है कि दलितों को दबे कुचले पिछड़े समझने वाले ठाकुरक आज भी उनके हक को मारने से बाज नहीं आते .. अब देखना ये होगा कि क्या पीड़ित को उनकी जमीन वापिस मिलेगी.. या उसके लिए भी दलित समाज को लंबा आंदोलन करना पड़ेगा।

छेड़खानी से तंग आकर महिला समेत 3 लोगों ने की हत्या

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला तेलंगाना के गोदावरीखानी से है, जहां एक दलित युवक के हत्या केवल इस लिए कर दी गई क्योंकि उस पर आरोप लगा कि वो एक महिला को परेशान कर रहा था। ये घटना रामगिरी मंडल के सिंगिरेड्डीपल्ली गांव का है, जहां 30 अप्रैल से ही जूला वामशी लापता था, पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी, लेकिन वामशी की सड़ी-गली लाश मंथनी मंडल के गदिदलगंडी के पास एक जंगल से बरामद हुई,, पुलिस ने जब जांच तेज की तो इस मामले में 3 आरोपी नीलम नवीन, उसकी पत्नी अलेख्या और उसका चचेरा भाई भास्कर पुलिस के शिकंजे में आ गए।

आरोपियों ने बताया कि आरोपी अलेख्या को कई सालों से तंग कर रहा था, यहां तक कि जब उसकी शादी हो गई तब भी वो अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, जिसे रोकने के लिए तीनो ने उसकी हत्या कर दी। हैरानी की बात है कि कोई महिला सालों से उत्पीड़न झेल रही थी लेकिन पुलिस में जाने के बजाय उसकी हत्या करने की हिम्मत आ गई.. क्या वाकई में ये मामला इतना सीधा है.. या कहानी कुछ और है।

मैनपुरी में दलित युवती को तुगलगी सजा

3, दलितो से जुड़ा अगला मामला यूपी के ही मैनपुरी से है, जहां दलितों को आज भी सार्वजनिक स्थानो से पानी लेने के बदले तुगलगी सजा को सहना पड़ता है, ताजा मामला मैनपुरी से है… सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक युवक हैंडपंप पर पानी भरती महिला को लाठी से पीट रहा है, महिला का कसूर केवल इतना था कि वो छोटी जाति से आती है और उसने हैंडपंप से पानी भर लिया था। जिससे गुस्साएं जातिवादी आतंकी ने महिला पर लाठी से हमला कर दिया.. पीड़िता पहले तो वहां खड़ी रही लेकिन जब उसे लगा कि शायद आरोपी रूकेगा नहीं तो वो हैंडपंप छोड़ कर अलग खड़ी हो गई।

ये घटना यूपी में जातिवाद की बढ़ती कुंठा को प्रदर्शित करता है। पिछले एक महीने में मैनपुरी से ये दूसरी घटना है जो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है, इससे पहले भी 6 मई को मैनपुरी के नगला रते गांव में एक दलित परिवार के घर में घुसकर इसलिए मारपीट की क्योंकि उनके घर से नाली का पानी सार्वजनिक नाली में निकल रहा है। जिससे नाराज होकर पड़ोसी ने उनके घर में घुस कर मारपीट की थी.. पीड़िता ने शिकायक भी दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई.. वहीं अब मैनपुरी में हुई इन अमानवीय घटना के बाद भी पुलिसा की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.. ऐसे में अब सवाल उठने तो लाजमी है कि आखिर वाकई में दलित उत्पीड़न कम हुआ है या केवल चुनावी हथकंडा है।

भीम आर्मी चीफ पहुंचे सहारनपुर सरकारी अस्पताल

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिन्होंने यूपी विधानसभा चुनावो से पहले ही दिखा दिया है कि भले ही वो सीएम बने या न बने लेकिन दलितों के लिए वो हमेशा सबसे आगे खड़े रहेंगे। अमेरिका से लौटने के बाद आजाद लगातार एक्शन मोड में नजर आ रहे है, एक तरफ बुल्डोजर रोकने के लिए पहुंचे तो वहीं अब वो सहारनपुर के लालवाला प्रकरण में एक सरकारी अस्पताल में एक पीड़ित की पुकार पर जांच के लिए पहुंचे…

जहां उनकी आने की खबर सुनकर डॉक्टरों ने आनन फानन में 45 मिनट पहले रिपोर्ट तैयार कर दी.. लेकिन आजाद भले ही दलित जाति से है लेकिन शिक्षा का महत्व वो भी जानते है, उनकी पारखी नजरो से डॉक्टरो का चलाकी छिप न सकी और उनकी पोल खुल गई। आजाद ने सरकार अस्पताल के डॉक्टरो को जमकर लगाड़ लगाई। शिक्षा हो या स्वास्थ्य यूपी सरकार हर मामले में फेल होती नजर आ रही है ऐसे में विधानसभा चुनावों में आखिर क्या होगा.. ये देखना अब दिलचस्प होने लगा है।

मध्य प्रद्रेश में गंदा पानी पी रहे दलित-आदिवासी

5, दलितो से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रर्देश के मंडला से है, जहां दलित और आदिवासी समाज को गंदा पानी पीकर अपना गुजारा करना पड़ रहा है लेकिन कई बार शिकायत करने पर भी उनकी अर्जी को अनसुना कर दिया गया। ये मामला मंडला ग्राम पंचायत का है जहां दलितों और आदिवासियों को पीने तक के पानी के लिए पहले तो कोई बंदोबस्त नहीं किया गया और जहां से वो पानी लाते है उसे देखकर शायद आप वहां खड़े भी न हो, लेकिन बिमारियों का घर बन चुका ये छोटा सा तालाब ही यहां रह रहे लोगो के पीने के पानी का एकमात्र स्त्रोत है।

हैरानी की बात है कि गांव वाले कई बार जिला कलेक्ट्रेट के पास अर्जी दे चुके है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब तक गांव वालों को डर सताने लगा है कि कहीं गांव वाले किसी बड़ी बिमारी का शिकार न हो जाये। वहीं भीम आर्मी ने इस मामले में सीएम मोहन यादव से अपील की है वो इस मामले में ध्यान दें.. वरना उन्हें न्याय के लिए आंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा। अब देखना ये होगा कि क्या सरकार कोई कार्यवाई करती है।

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