Top 5 Dalit news: हमेशा ऐसा क्यों होता है कि दलितो के मुद्दों पर शोर तो काफी होता है लेकिन जब उनके लिए न्याय करने की बात होती है, तो उनकी जाति पहले आती है। जिन मामलों में उन्हें जल्द से जल्द न्याय मिलना चाहिए, वहां भी उन्हें सालों कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारें में बतायेंगे, जिसने भारत में दलितों को न्याय देने वाली प्रक्रिया पर ही सवालियां निशान लगा दिया है।
बहराइच में दलित महिला सिपाही ने की खुदकुशी
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के बहराइच से है, जहां एक दलित महिला सिपाही ने पुलिस स्टेशन के स्टाफ रूम में फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली। ये सनसनीखेज घटना बहराइच के हुजूरपुर थाना क्षेत्र के स्टाफ क्लार्टर में घटित हुई है। जानकारी के मुताबिक ज्योति पासवान जो कि महाराजगंज की रहने वाली थी, 2019 बैच की सिपाही थी औऱ पिछले करीब एक साल से हुजूरपुर थाने में ही तैनात थी, सोमवार को किसी काम से जिला मुख्यालय गई थी, लेकिन वहां से करीब 5 बजे शाम को लौटी और अपने सरकारी क्वाटर में चली गई, जिसके थोड़ी देर बाद स्टाफ किसी काम से ज्योति के कमरे में गए तो वो फांसी के फंदे से लटकी थी।
उसे आनन फानन में अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं महिला सिपाही की मौत को लेकर क्षेत्राधिकारी कैसरगंज धीरेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि सिपाही के आसपास कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, इसलिए आत्महत्या का क्या कारण है, अभी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है, लेकिन पुलिस सख्ती से जांच कर रही है, वहीं ज्योति पासवान के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। हैरानी की बात है कि एक महिला सिपाही खुदकुशी कर लेती है, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि उसके साथ क्या हो रहा था। अब देखना ये होगा कि पुलिस जांच के बाद क्या सामने आता है.. क्योंकि यूहीं कोई खुदकुशी नहीं करेगा.. या फिर उसके पीछे कोई गहरी साजिश है।
टिहरी में केतनलाल हत्याकांड मामले में आजाद पर भड़की रोहिणी घावरी
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ पर कीचड़ उछलने वाले रोहिणी घावरी को लेकर है, जिन्होंने फिर से चंद्र शेखर आजाद को लेकर एक वीडियो जारी किया है। एक तरफ आजाद है जो समाज के दलित और वंचितों को न्याय दिलाने के लिए लड़ाई लड़ रहे है, घावरी के तमाम आरोपो के बाद भी कभी पलटवार नहीं किया लेकिन घावरी भी आजाद का नाम लेकर लाइमलाइट में रहने का मौका खोज ही लेती है। ताजा वीडियो आजाद के टिहरी गढ़वाल में दलित युवक केतनलाल के परिवार से मिलने जाते समय पुलिस और पारामिलिट्री फोर्सेस ने जो व्यवहार किया उसे लेकर है।
घावरी ने आजाद पर निशाना साधते हुए कहा कि जो घटना 7 जून को हुई थी, चारो आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो गई, तो फिर 28 जून को आखिर आजाद पीड़ित परिवार से मिलने का नाटक क्यों कर रहे है, क्या ये वहां जानबूझ कर शर्ट फड़वाने गये थे..और जिस परिवार ने अपना बच्चा खोया है वहां 50 गाड़ियों का काफिला लेकर, और जिंदाबाद के नारे लगा कर कौन सा न्याय दिलाने का तमाशा कर रहे थे। घावरी ने सीधे कहा कि वो आजाद के तमाशों पर बात नही करना चाहती है लेकिन जरा सोच कर देखिये अगर वाकई में न्याय दिलाने की बात होती तो शोर मचाने की क्या जरूरत थी।
शांति से जा कर पीड़ितों से मिला जा सकता था, और वो भी तब जाना चाहिए था जब मामला गर्म था,, अब ये तमाशा करके आखिर साबित क्या करना चाहते है.. सच तो ये है कि इतना शोरशराबा केवल पब्लिसिटी पाने के लिए है, कोई एक भी मामला दिखा दें जो आजाद के आंदोलन करने के बाद न्याय मिला हो। घावरी ने काफी लंबे समय के बाद आजाद को लेकर काफी तीखी बातें की है,. जिसने आजाद की रैलियों को लेकर कहीं न कहीं सोचने पर मजबूर कर दिया है.. अब देखना ये होगा कि आजाद केतनलाल को वाकई में न्याय दिला पायेंगे।
हरदोई में 11 साल की दलित बच्ची के साथ गैंगरेप
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश से हरदोई से है, जहां 11 साल की मासूम बच्ची को पहले वहशियों ने अगवा किया और फिर उसके साथ गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया। मानवता को शर्मसार करने वाली ये घटना हरदोई के बिलग्राम थाना क्षेत्र की है। पीड़ित बच्ची 22 जून को ही लापता हो गई थी, परिवार वालो ने काफी खोजबीन की, जिसके बाद उन लोगो ने पुलिस थाने में भी मदद मांगी लेकिन पुलिस वालों के कानो पर जूं तक नहीं रेंगी.. अगले दिन भी जब बच्ची नही मिली तो पुलिस के काम खड़े हो गए.. पुलिसवालों ने पीड़िता की तलाश शुरु की , लेकिन बच्ची को 28 जून को बरामद किया गया.. उसकी स्थिति बेहद खराब थी, जिसके बाद उसे आनन फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पीड़िता के पिता ने बताया कि वो पिछले 10 सालो से कानपुर में रह कर ऑटो चलाते थे, 22 जून को उनके अपार्टमेंट में रहने वाले राहुल तिवारी, प्रशांत, उसकी पत्नी प्रिया और गुड्डू ने बच्ची को बहला कर अगवा कर लिया था। वहीं बच्ची के बरामद होने के बाद उसे डराया धमकाया जा रहा है.. बच्ची की स्थिति इतनी खराब है कि वो बोलने की स्थिति में नहीं है.. वहीं पिता ने जब आरोपियो के खिलाफ कार्यवाई करने की मांग की उसके साथ भी मारपीट की गई। वहीं भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद ने भी एक्स पर बच्ची के लिए न्याय की मांग की है। पुलिस ने इन सभी आरोपो को खारिज किया है और पीडिता के मेडीकल रिपोर्ट का इंतजार कर रहे है। साथ ही आरोपियों की भी तलाश जारी है। दलितों के मामले में पुलिस के लापरवाह रवैये से हम सभी वाकिफ है, देखना ये होगा कि क्या सच्चाई निकल कर आती है।
पश्चिम बंगाल में नई सरकार की रफ्तार पर रोक
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला पश्चिम बंगाल से है, जहां बीजेपी की नई सरकार बनने के बाद कई कड़े फैसले लिये गए थे, इन्हीं में से एक था 14 मई को जारी आदेश.. जिसमें 2011 के बाद राज्य में सभी एससी एसटी और ओबीसी वर्ग के लोगो को जारी प्रमाणपत्र को सत्यापन कराने का आदेश, लेकिन वामपंथी दलो ने इसके खिलाफ कोलकाता हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी थी, उन्होंने कहा कि इससे 1.69 करोड़ प्रमाण पत्र प्राप्तकर्ता पर असर पड़ेगा, खासकर जब एसआईआर अब भी विचारधीन है.. ये आदेश एकतरफा और अन्यायपूर्ण है।
वहीं अब सरकार के इस फैसले के खिलाप याचिका को मानते हुए न्यायाधीश तापोब्रता चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति पार्थसारथी चटर्जी की बैंच ने सरकार से सरकार से जवाब मांगा है। वहीं राज्य कॉलेज सेवा आयोग ने भी इसके खिलाफ याचिका दायर कर दी है, ऐसे में कोर्ट ने गुरुवार तक जवाब मांगा है। अब देखना ये होगा कि सरकार की तरफ से इस फैसले को लेकर क्या जवाब आता है। क्या इतनी जल्दबाजी में जातिगत प्रमाणपत्र का सत्यापन सही है या गलत.. आप खुद कमेंट करके बतायें।
10 सालो के बाद दलित पीड़ित परिवार को मिला न्याय
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला यूपी के सोनभद्र से है, जहां एक दलित युवक को अगवा करके जातिसूचक गालियां देने औऱ उससे फिरौती मांगने को लेकर पीड़ित को आखिरकार न्याय मिल ही गया। ये मामला सोनभद्र के शाहगंज थाना क्षेत्र के आशा ताली गांव का है, पीड़ित दिनेश कुमार ने 13 नवंबर 2015 को पुलिस को तहरीर दी थी आरोपी शंकर सरन ने उसे फोन करके कहा कि उसके पिता शक्तेशगढ़ मीरजापुर में रूके है, और अगर फिरौती नहीं दी तो उन्हें मार देंगे। जिससे घबरा कर पहले उसने अपने चाचा को सारी बात बताई..जब चाचा ने दिये हुए नंबर पर फोन किया था उन्हें जातिसूचक गालियां दी गई और 80 हजार रूपय की मांग की गई।
हालांकि पुलिस ने मुख्य आरोपी और उसके तीन साथियों को गिरफ्तार कर लिया औऱ ये मामला तब से कोर्ट में लंबित था, जिसके बाद आखिरकार 10 साल के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिल ही गया, विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट गोविंद मोहन ने आरोपियों को 3-3 साल की सजा और दो आरोपी पर 16-16 हजार रूपय और दो आरोपी पर 21-21 हजार रूपय का जुर्माना लगाया है।



