Top 5 Dalit news: दलितों के लिए समाज में बदलाव की कितनी भी कोशिशें की जायें, लेकिन जब तक मानसिक रूप से विकृत लोगों के मन से छूआछूत की भावना नहीं जाती तब तक न तो कोई शिक्षा काम आयेगी और न ही दलितो का उत्पीड़न रूकेगा.. दलित तो आगे बढ़ रहे है लेकिन मनुवादी मानसिकता के लोगों की सोच और गिर रही है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
गुजरात में दलित दूल्हे को बीच में घोड़ी से उतारा
1, दलितो से जुड़ा पहला मामला गुजरात के अहमदाबाद से है। जहां दलित समाज की बारात को रास्ते में ही रोकना पड़ा क्योंकि उंची जाति के कुछ लोगों ने दूल्हे को घोड़ी से उतार दिया था। ये घटना मेहसाना जिले के विजयपुर तालुका की लाडोल पुलिस थाना क्षेत्र के मडी गांव की है, पीड़ित भाविक रावत ने पुलिस को तहरीर दी कि 10 मई को उसके भाई मयंक रावत की शादी थी, लेकिन जब बारात निकलने लगी तो गांव के ही युवराजसिंह चौहान और निकुलसिंह चौहान ने दलित जाति से होकर घोड़ी पर बारात निकालने के कारण मयंक को रास्ते में ही घोड़ी से जबरन उतार दिया।
इतना ही नहीं विरोध करने वाले लोगो को जातिसूचक गालियां देते हुए भयंकर खामियाजा भुगतने की धमकी भी दी। आरोपियो ने ये भी कहा कि गांव के केवल दरबार समुदाय के लोगो को ही शादी का जुलुस निकालने की इजाजत है। आरोपियो ने दूल्हे के साथ मारपीट की… और साथ ही कहा कि वो नहीं माने तो किसी को जिंदा नहीं रहने देंगे। इस मामले में पुलिस ने दोनो आरोपियो के खिलाफ मामला दर्ज करके जांच शुरु कर दी है लेकिन अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
महाराष्ट्र के नांदेड़ में दलितों के साथ बर्बरता
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले से है, जहां सालों को कोशिश के बाद बाबा साहब आंबेडकर की जयंती मनाने की परमिशन दी गई थी वो भी 24 अप्रैल को , लेकिन जातिवादी आतंकियों को वो भी नागवार गुजरा, समारोह कर रहे सैकड़ों अंबेडकरवादियों पर जातिवादियों ने हमला कर दिया.. महिलाओं के साथ अभद्रता की गई, नाबालिग बच्चियों के साथ छेड़छाड़ की गई, घरों में घुसकर तोड़फोड़ और निर्दोष लोगों पर जानलेवा हमला किया गया। जब पीड़ितो ने पुलिस से मदद लेनी चाही तो प्रशासन ने उल्टा पीड़ित पक्ष के लोगों को बड़ी संख्या में गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया है जबकि एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
ये घटना नांदेड़ जिले के धर्माबाद तहसील के मौजे माष्टी गांव में घटित हुई थी, जिसकी पिक्चर औऱ वीडियो भी वायरल हो रही है, लेकिन बावजूद इसके प्रशासन ने जो रवैया दलितो के प्रति अपनाया है वो राज्य में लचर कानून व्यवस्था का जीवंत उदाहरण है। इस मुद्दे पर अब भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद ने रोष व्यक्त करते हुए प्रशासन से दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर दलितो को न्याय और उचित मुआवजा देने की मांग की है। अगर ऐसा नहीं होता है तो भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कांबले ने प्रदेशव्यापी ‘जेल भरो’ आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है। ऐसे में देखना ये होगा कि आजाद के इस मामले में पड़ने के बाद प्रशासन का क्या रूख होता है।
बदायुं में दलित महिला का दिनदहाड़े अपहरण
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के बदायुं से है, जहां आरोपियो के हौसले इतने बुलंद है कि दिनदहाड़े एक दलित महिला को जबरन अगवा किया गया और फिर उससे दुष्कर्म किया गया..ये घटना बदायुं के मूसाझाग थाना क्षेत्र के एक गांव का है। पीड़िता के पिता ने बताया कि उनकी बेटी तो घर के बाहर केवल कूड़ा फेंकने गई थी, लेकिन तभी गांव के ही एक युवक ने उसे अगवा कर लिया औऱ गांव के बाहर एक खंडहर में ले गया जहां उसने पीड़िता के साथ पहले मारपीट की और फिर उसका दुष्कर्म किया… हालांकि पीड़िता ने जब शोर मचाना शुरु किया तो पकड़े जाने के डर से आरोपी पीड़िता को वहीं छोड़ कर भाग खड़ा हुआ।
गांव के कुछ लोगो को पीड़िता काफी बुरी हालत में मिली थी, फिलहाल पुलिस ने पीड़िता को मेडिकल के लिए जिला अस्पताल भेजा है, वहीं इस मामले को दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरु कर दी है। प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र तोमर के मुताबिक मामले को गंभीरता से लेकर उसकी जांच की जा रही है। हैरानी की बात है कि तमाम दावो के बाद भी यूपी में महिला सुरक्षा पर रोजाना धब्बे लग रहे है, फिर कैसे महिलाओं की सुरक्षा के इतने दावे किये जा रहे है। क्या वाकई में राज्य में महिला अपने घर में भी सुरक्षित है… जवाब आप खुद दीजिये।
ओडिशा के बालासोर में आदिवासी महिला का शव का अपमान
4, दलितो से जुड़ा अगला मामला ओडिशा के बालासोर का है, जहां एक आदिवासी समाज की मृत महिला को साइकिल पर लिटा कर 15 किलोमीटर दूर पुलिस स्टेशन तक ले जाना पड़ा, ताकि पीड़ित परिवार ये साबित कर सकें कि महिला की हत्या की गई है। इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें मृतका का शव साइकिल पर रख कर परिवार के कई सदस्य पुलिस स्टेशन जा रहे है, जो कि उनके गांव से करीब 15 किलोमीटर दूर है। ये घटना बालासोर जिले के खैरा थाना के अंतर्गत हरिपुर गांव की है, जहां जमीन के विवाद में दलित महिला, कमला सेठी की हत्या करने का मामला सामने आया है।
पीड़ितो ने पुलिस और एम्बुलेंस दोनो को कॉल करके बुलाने की कोशिश की थी, लेकिन दोनों में से कोई नहीं पहुंचा, जिससे नाराज परिजन साइकिल पर ही शव लेकर थाने पहुंच गए। पीड़ितो ने बताया कि छत बनाने और जमीन की सीमा विवाद को लेकर उनके पड़ोसी से 5 साल से विवाद चल रहा था, लेकिन 10 मई को विवाद इतना बढ़ गया कि पड़ोसी ने फावड़े और हथौड़े से हमला कर दिया जिससे महिला की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस के रवैये ने नाराज परिवार वालो ने थाने के सामने शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस नींद से जागी, और एक आरोपी को गिरफ्तार कर बाकियों की तलाश कर रही है। सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्यों है कि दलितों और आदिवासियों को हर बार न्याय के लिए आंदोलनों का सहारा लेना पड़ता है।
7 साल पहले हुए दुष्कर्म मामले में पीड़िता को न्याय
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला यूपी के कुशीनगर से है… जहां की कानून व्यवस्था दलित महिलाओं को लेकर इतनी कमजोर होती जा रही है कि न तो वो महिला सुरक्षा कर पा रही है और न ही उन्हें आसानी से न्याय मिल रहा है..औऱ कभी कभी तो न्याय के इंतजार में पीड़ित दुनिया ही छोड़ देते है। ताजा मामला कुशीनगर के पडरौना के कसया थाने की है, जहां बलात्कार की पीड़िता एक मंद बुद्दि बच्ची को न्याय मिलने में 7 साल लग गए.. ये घटना 30 जनवरी, 2019 की है जब पीड़िता बकरी चराने के लिए बगीचे में गई थी, लेकिन तभी रामनाथ पटेल ने पीड़िता को दबोच लिया, और उसके साथ मारपीट करने के बाद दुष्कर्म किया।
बच्ची किसी तरह से अपने घर पहुचीं जहां उसने अपनी आपबीती बताई.. जिसके बाद परिजनो ने पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया। हैरानी की बात है कि इन सात सालों में न्याय के इंतजार में वादी की मौत पहले ही हो गई.. वहीं अब विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट इफराक अहमद की अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है और 56,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जिसमें से आधा पीड़िता को मिलेगा। अपराध तो रोजाना अनगिनत होते है लेकिन न्याय रोजाना कितनो को मिलता है।



