Top 5 Dalit news: भीम आर्मी से लेकर संभल मस्जिद विवाद तक, जानिए 5 बड़ी घटनाएं

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Top 5 Dalit news: जरा सोचिये कि अक्सर पूंजीपतियों औऱ सरकार की लड़ाई के बीच सबसे ज्यादा नुकसान किसका होता है.. न तो सरकार का और न ही पूंजीपतियों.. बल्कि उस मासूम जनता का, जो उस लड़ाई के दायरे में आती है… और अगर नो जनता दलित है तो फिर तो उनकी फिक्र करने का फर्ज तो शायद किसी का भी नहीं बनता..तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओ के बारे में जानेंगे, जो आपको सच बतायेंगे जिसे शायद हम आज तक समझ ही नहीं पायें..किसी का समर्थन, किसी का विरोध आपको नुकसान से नहीं बचा सकता है।

भीम आर्मी चीफ पहुंचे दतिया

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है जिन्होंने उत्तर प्रदेश में चुनावी डंका बजा कर अब मध्य प्रदेश का रुख किया है। जी हां, आज पहुंच गए मध्य प्रदेश के दतिया जिला,  जहां वो दतिया में होने वाले उपचुनावों में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उम्मीदवार दामोदर यादव के समर्थन में पहुंचे। आजाद इस वक्त उत्तर प्रदेश के एक लोकप्रिय नेता है वहीं दतिया में जा कर भी उन्होंने बीजेपी सरकार के खिलाफ हुंकार भरी है। आजाद ने जंतर मंतर पर छात्रो के साथ पुलिस की बर्बरता और सरकार की अनदेखी को लेकर जमकर निशाना साधा है, यहां तक कि आजाद ने बीजेपी को जनरल डायर के बराबर बताते हुए है कि जैसे उसने जलियावालां बाग में मासूमो को कैद करके गोलियां चलाई थी वैसे ही बीजेपी राज में भी छात्रों पर लाठिया चलाई जा रही है। आजाद ने कहा कि जिस देश में बच्चियों को देवी मान कर पूजा जाता है वहां बीजेपी के राज में उनका सरेआम अपमान हो रहा है। अब जरूरी है कि बीजेपी को उसकी ही भाषा में जवाब दिया जायें। आजाद ने अपने भाषण से साफ कर दिया है कि यूपी हो या एमपी.. वो बीजेपी को उनकी मनमानी नहीं करने देंगे। आजाद की घोषणा पर आपकी क्या राय है.. क्या मध्य प्रदेश में भी आजाद झंडे गाड़ने के लिए तैयार है।

मैनपुरी में दलित महिला से मारपीट

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से है, जहां जातिवादी दबंगो ने पहले तो एक दलित महिला की परचुन की दुकान से सामान लिया, औऱ जब महिला ने सामान के पैसे मांगे तो दबंगो ने उसे जातिसूचक गालियां देते हुए धमकी देना शुरू कर दिया, मगर जब पीड़िता ने फिर भी विरोध किया तो आरोपियों ने पीड़िता के साथ मारपीट की और उसे जान से मारने की धमकी की। ये मामला मैनपुरी के बिछवां थाना क्षेत्र के विद्यार्थीपुरम गांव का है, पीड़िता सपना जाटव मे बताया कि ये घटना 21 जून की ही दोपहर में घटित हुई थी.. और वो आरोपियो के खिलाफ मामला दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन भी गई थी लेकिन पुलिस वालों उसे ही डरा धमका कर भगा दिया, जिसके बाद वो पिछले 1 महीने से उच्च अधिकारियों के ऑफिस में चक्कर लगा रही थी, करीब एक महीने बाद उसकी अर्जी स्वीकार की गई और दोनों आरोपियों आकाश और नितिन चौहान के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी गई..हैरानी की बात है कि मारपीट के एख महीने बाद 26 जुलाई को पीड़िता का मेडीकल कराया गया है, क्या पीड़िता के जख्म एक महीने पहले जैसे होंगे.. साफ समझा जा सकता है कि पुलिस आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है।

दलित इसाइयों को फिर से बराबरी देने के लिए याचिका

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला  राजधानी दिल्ली से है, जहां सुप्रीम कोर्ट कई बार कह चुकी है कि वो धर्म बदल कर इस्लाम और ईसाई धर्म अपनाने वालें दलितो को एट्रोसिटी एक्ट के तहत मिलने वाले लाभ नहीं देंगे.. और न ही ऐसे किसी कानून पर चर्चा की जायेगी, तो वहीं दलित इसाईयों के तऱफ से भी लोग हार मानने के लिए तैयार नहीं है। इसी कड़ी में धर्मांतरण के बाद अनुसूचित जाति का दर्जा रद्द किये जाने वाले 24 मार्च 2026 के एससी के फैसले पर फिर से पुनर्विचार याचिका की गई थी.. लेकिन कोर्ट ने इसे पहली ही सुनवाई में फिर से रद्द कर दिया है। कोर्ट अपने पुराने फैसले पर अडिग है, उसने सीधा सा जवाब दिया कि दलितों को तब तक ही अनुसूचित जाति के लाभ दिये जायेगें जब तक वो हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म में हो, इसके अलावा दलित कोई धर्म अपनाता है कि उसके सारे अधिकार खुद खत्म हो जायेंगे। दलित इसाई इस कानून के खिलाफ काफी समय से लड़ाई लड़ रहे है, लेकिन अभी तक उन पर कोई नरमी नही की गई है.. जबकि आकड़ों की बात करें तो धर्म बदल कर ईसाई या मुसलमान बनने के बाद भी दलितो को उनकी जाति के नाम पर प्रताड़ित किया जाता है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या उनकी मांग गलत है… क्या वाकई में उनके लिए कानून में बदलाव नहीं होना चाहिए।

कर्नाटक में दलितों को साधने के लिए कांग्रेस का बड़ा दाव

4, दलितो से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक से है, पिछले कुछ महीनों से कर्नाटक की राजनीति में चल रही उथल पुथल के बाद जब सरकार बदली तो थोड़ी शांति आई है, ऐसे में कांग्रेस फिर से कोई ऐसी हरकत नहीं करना चाहती जिससे दलितों के बीच उनकी मिट्टी पलीत हो.. राज्य में दलितों को साधने के लिए कांग्रेस ने एक बड़ा कदम उठाते हुए कर्नाटक जिला कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) के अध्यक्षों के चुनावो को लेकर एससी एसटी और ओबीसी वर्ग के लोगो के लिए 50 प्रतिशत सीट आरक्षित कर दी है। कांग्रेस द्वारा कर्नाटक में शांति स्थापित करके वोटर्स का लुभाया जाये उसके लिए संगठन सृजन अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत ही पार्टी ने एससी एसटी और ओबीसी वर्ग के प्रतिभागियों को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐलान किया है। कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने कांग्रेस की रणनीति की जानकारी देते हुए कहा कि पूरे भारत में कांग्रेस के पास  1,054 जिले हैं, जिसमें 762 डीसीसी अध्यक्षों की घोषणा  की जा चुकी है. बाकियों में अभी चर्चा जारी है। कांग्रसे का मास्टर स्ट्रोक केवल इसी लिए है कि दलित और पिछड़े प्रत्याशी होने के कारण दलित जनता का भरोसा बढ़ेगा, जिससे कांग्रेस का वोट बैंक भी बढ़ेगा.. साथ ही, जो स्थानिय क्षेत्र का हो, वो अपने लोगो की परेशानियों को करीबवसे समझ सकता है। अब देखना ये होगा कि क्या कांग्रेस का ये दाव वाकई में उनके काम आयेगा।

संभल में दलित मुसलमान को मस्जिद में आने से रोका

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के संभंल से है, जहां एक दलित मुसलमान परिवार को न केवल 120 साल पुरानी मस्जिद में नामज पढ़ने से रोका गया बल्कि उसके पूरे परिवार को भी बाहर निकाल दिया गया। ये मामला संभल के ऐचोडा कंबोह पुलिस थाना क्षेत्र के मंडली समसपुर गांव का है, धुन्ना समुदाय से आने वाले मोहम्मद वसीम ने  तुर्क समुदाय के लोगों के खिलाफ तहरीर दी कि गांव के 120 साल पुराने मस्जिद में वो दान देने गया था, जहां उसने नमाज अदा करने के बारे में सोचा, लेकिन वहां खड़े तुर्क समुदाय के लोगो ने न केवल उसका दान लेने से इंकार कर दिया बल्कि उसकी जाति पर टिप्पणी करते हुए उसे मस्जिद में नमाज भी नही पढ़ने दिया गया… पुलिस ने तुरंत इस मामले में संज्ञान लिया और 5 लोगो के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है। हालांकि पुलिस की तरफ से अभी तक कोई बयान नहीं आया है और न ही किसी की गिरफ्तारी हुई है। ऐसे में देखना ये होगा कि दलित होने के कारण भेदभाव सहने वाले दलित मुसलमान के लिए कानून कैसे न्याय करता है।

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