Top 5 Dalit news: सरकारी कार्यालयों में दलित उत्पीड़न की खबरें आयें दिन सुर्खियों में बनी रहती है। कहीं न कहीं आरक्षण का नाम लेकर ही उन्हें प्रताड़ित किया जाता है,लेकिन अगर दलित मदद मांगने आता है तो फिर उसके साथ भेदभाव क्यों..न तो आरक्षण ले सकते है, औऱ न ही मदद मांग सकते है? तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो आपको सोचने पर मजबूर कर देंगे कि क्या सरकारी सुविधाओं के लिए भी जातिगत ऊँच नीच की कसौटी पर तौला जाएगा।
राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी कोतवाली में मामला दर्ज
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तराखंड के नैनीताल से है, जहां हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष की रैली के बाद हुई शुद्धिकरण मामला अब भी शांत होने का नाम नहीं के रहा है। एक तरफ कांग्रेस ने उसे सीधा दलितों को अछूत समझकर उनका आन करने वाला कदम बताया है तो वहीं बीजेपी इसे साफ सफाई से जोड़कर दिखाने की कोशिश कर रही है। लेकिन 29 अगस्त को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने दूर से दिल्ली में हुई कॉन्फ्रेस में उस मुद्दे को उठाया तो वहीं अब नैनीताल में श्री राम सेना से जुड़ा एक दलित कार्यकर्ता ने राहुल गांधी के खिलाफ ही एससीएसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया है। बता दें कि राहुल गांधी ने कांग्रेस में शुद्धिकरण की घटना को “आधुनिक छुआछूत” से जोड़ा था, और दलितों और पिछड़ों का अपमान करने का नया तरीका बताया था। लेकिन राहुल गांधी के बयान के बाद वाल्मीकि समुदाय से आने वाले अमित कुमार नाम के शख्श ने हल्द्वानी कोतवाली में राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है। अमित कुमार ने कहा कि शुद्धिकरण कोई अपमान के इरादे से नहीं बल्कि साफ सफाई करने और आगामी अनुष्ठान के लिए किया गया था, लेकिन सांसद ने बिना सच जाने सच को तोड़ मरोड़ कर पेश किया है। जो उनके समुदाय के लिए भी काफी अपमानित करने वाला कदम था। हैरानी की बात है कि ये बात 9 अगस्त की ही थी, लेकिन चुनावों के बीच में ये मुद्दा शांत होने के नाम नहीं ले रहा है। अब सवाल ये उठता है कि अमित कुमार का केस करना जानबूझ कर कांग्रेस और राहुल गांधी की इमेज खराब करने के लिए तो नहीं है। आपको क्या लगता है।
अजमेर में दलित को बिजली देने से इन्कार
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजस्थान के अजमेर से है, जहां दलितों की स्थिति इतनी दयनीय है कि अगर उनके पास पक्का मकान नहीं है तो वो रोशनी के भी हकदार नहीं है। दिल को झकझोर देने वाला ये मामला अजमेर के पीसांगन स्थित सेठन गांव का है। जहां दलित मजदूर मुकेश की झोपड़ी देखने के बाद अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के पीसांगन कार्यालय ने उसकी झोपड़ी में बिजली का कनेक्शन देने से इनकार कर दिया, जबकि मुकेश ने पूरे दस्तावेज भी जमा किया थे, मुकेश ने बताया कि उसने पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए भी आवेदन किया है, लेकिन उससे पहले उसका मकान जर्जर हो गया। वो खुद किसी तरह मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालता है, तो घर कहां से बनाता, इसलिए वो अपनी ही जमीन पर कच्ची झोपड़ी बना कर रहने लगा, लेकिन जब उसने बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया तो झोपड़ी का हवाला देकर इनकार कर दिया गया। जबकि उसके आप कई ऐसी झोपड़ी है जिसमें बिजली है। इस खबर के सामने आने के बाद पंचायत ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए है, वहीं मामले को बढ़ता देख कर उच्च अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी दी है। अब देखना ये होगा क्या इनकार की वजह झोपड़ी थी या मुकेश की जाति।
यूपी में सावन के कारण ठप मीट कारोबार पर व्यापारी की गुस्सा
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से है, जहां सावन के महीने में मीट का कारोबर बंद होने की खीज दूसरे समुदाय के लोगो ने एक दलित युवक पर निकाल दिया। ये घटना अलीगढ़ के देहलीगेट के सराय मियां इलाके की है। पीड़ित अरूण ने पुलिस को तहरीर दी कि 28 अगस्त की रात को करीब साढ़े 8 बजे वो अपने भाई और मामा के साथ देहलीगेट के शर्मा ढाबे में खाना खाने जा रहा था तभी रास्ते में उन्हें हाजी जहीर बिल्डिंग के पास कुछ लोगो ने रोका,.. और उनका नाम पता, और जाति पूछने लगे। जिसके बाद वो लोग उन्हें जातिसूचक गालिंयां देने लगे, जब तीनो पीड़ितो ने इसका विरोध किया तो उनके साथ मारपीट करनी शुरु कर दी..इतनी ही नहीं जहीर बिल्डिंग के पास मौजूद मीट शॉप के ऑनर ने उसे गालियां देते हुए कहा कि तुम्हारे सावन के कारण एक महीने से हमारा कारोबार ठप हो गया, हमें बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। इस दौरान आरोपी पक्ष के 20-25 लोग और जमा हो गए.. और सभी ने तीनों को बुरी तरह से पीटा, जिसके कारण अरूण को गंभीर चोटें आई है। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। वहीं देहलीगेट थाना प्रभारी अंकित कुमार ने बताया कि करीब 30 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है औऱ आरोपियो की तलाश जारी है। ये हमला सवाल उठाता है कि आखिर हमलावर किसे निशाना बना रहे थे, पीड़ितो के दलित होने पर, या उनके हिंदू होने पर..
न्याय में मिली देरी के बाद पिता ने उठाया संगीन कदम
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला गुजरात के अहमदाबाद से है, जहां पुलिस की गैरकानूनी फायरिंग के कारण 14 साल पहले दो दलित युवको समेत तीन युवको की हत्या के मामले मे न्याय की गुहार लगा रहे एक युवक के पिता ने ट्रेन से कट कर आत्महत्या कर ली है। दिल को झकझोर देने वाली ये घटना अहमदाबाद के थंगान की है… औऱ मरने वाले है मृतक पंकज सुमरा के पिता अमरीश सुमरा.. जिन्होंने न्याय में मिल रही देरी से त्रस्त हो कर अपने ही बेटे की स्मृति स्थल से कुछ दूरी पर ये संगीन कदम उठाया। उन्होंने दूरंतो एक्सप्रेस के सामने कूद कर जान दे दी। दरअसल साल 2012 में सुरेंद्रनगर जिले के थानागढ़ मं आयोजित हुए तरणेतर मेले में हुई हिंसा में पुलिस की कथित अंधाधुंध फायरिंग के कारण मेहुल राठौड़, प्रकाश परमार और पंकज सुमरा की गोली लगने से मौत हो गई थी। जिसके बाद तीनो के पिता अपने बेटे के लिए न्याय के लिए कोर्ट के चक्कर लगा रहे है, मगर न्याय तब भी नही। इस अनदेखी को देखकर प्रकाश के पिता की साल 2015 में हार्ट अटैक से मौत हो गई थी, वहीं करीब 14 सालों से संघर्ष कर रहे अमरीश भाई ने भी जब उम्मीद खो दी तो उन्होंने ऐसा कदम उठाया। वहीं मेहुल राठौर के पिता का कहना है कि 14 सालों में उन्हें एक रिपोर्ट तक नहीं दिखाई गई कि आखिर इस केस में चल क्या रहा है.. पुलिस के ऐसे लचर रवैये के कारण ही दोनो की मौत हुई है। अब सवाल ये उठता है कि क्या किसी की खुदकुशी प्रशासन को नींद स जगा सकता है।
बदायूं में पुलिस कस्टडी में दलित की मौत
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिन्होंने यूपी के बदायूं में पलिस कस्टडी में टॉर्चर के कारण मारे गए दलित युवक राजेश कोरी के लिए न्याय की आवाज बुलंद की है। उन्होंने उस वायरल वीडियो का भी जिक्र किया जिसमें राजेश की स्थिति इतनी बुरी थी कि वो पानी तक नहीं पी पा रहा था। वहीं पुलिस का कहना है कि वो लोग राजेश को केवल पूछताछ के लिए ले गए थे उसके साथ कोई मारपीट नहीं की गई थी.. पोस्टॉमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उसके शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं है.. उसकी मौत हार्टअटैक से हुई है.. बता दें कि ये मामला दातागंज थाना क्षेत्र के अटसेना गांव का है, जहां भंडारे में शराब के नशे में दो पक्षों में विवाद हुआ था, जिसके सिलसिले में ही पुलिस राजेश कोरी को पूछताछ के लिए ले गई थी। पूछताछ के दौरान वो टॉयलेट गया था, जहां से आने के बाद ही उसकी हालत खराब होन लगी.. जब उसे दातागंज के सामुदायिक स्वास्थय केंद्र ले जाया गया तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। लेकिन इस मामले ने अब राजनैतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस ने इसे जंगलराज बताया तो वहीं आप के सांसद संजय़ सिंह ने प्रशासन पर निशाना साधते हुए इसे प्रशासनिक हत्या करार दिया है। वहीं आजाद ने इस मामले में उच्च स्तरिय जांच की मांग की है। ऐसे में देखना ये होगा कि सरकार का इस पर क्या रवैया होता है।


