Top 5 Dalit news: दलितो की स्थिति पर रोना रोने वालों तो आपने अक्सर देखे होंगें, लेकिन वो केवल राजनीति रोटियां सेंकने के लिए होती है.. मगर जब वाकई में जमीनी स्तर पर खड़े होने की बात होती है तो वहीं अपने एसी कमरो से बाहर नहीं आते..तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओ के बारे में बतायेंगे जो उस समाज का आईना दिखा रहे जहां दलितों की स्थिति पर रोने वाले तो बहुत है लेकिन उनके लिए खड़े होने वाले चंद ही होंगे।
शाहजहांपुर में दलित मजदूर के साथ मारपीट
1,दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर से है जहां एक दलित मजदूर ने एक जातिवादी के यहां मजदूरी करने से इनकार क्या कर दिया, उस गरीब मजदूर के साथ न केवल जातिगत उत्पीड़न किया गया बल्कि इसे गांव से निकाल देने की धमकी भी दी गई। ये मामला शाहजहांपुर के थाना खुदागंज क्षेत्र के सूथा गांव की है। पीड़ित भगवान दास ने पुलिस को तहरीर की दी 14 जुलाई को जब वो अपने खेत में धान की रोपाई कर रहा था तभी उसके पास बसंत सिंह नाम के युवक ने उससे उसके खेतों में काम करने की बात की, लेकिन भगवान दास ने साफ इनकार कर दिया। जिससे बसंत सिंह के अहंकार को बड़ी ठेस लगी और वो पीड़ित से रंजिश रखने लगा। 15 जुलाई को उसे अपनी रंजिश निकालने का मौका भी मिला जब वो अपनी गाय चराने गया था। आरोपी ने पीड़ित को घेर लिया और उसे जातिसूचक गालियां देते हुए धमकी दी कि अगर वो आरोपी लिए काम नहीं करेगा तो उसे गांव में भी रहने नहीं दिया जाएगा। जब पीड़ित ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। हालांकि भीड़ इकट्ठा होते देख कर जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गया, मगर पीड़ित घायल हो गया था। हैरानी की बात है कि पीड़ित को पुलिस का भी समर्थन नहीं मिला, और मामला दर्ज करने में कई दिन लगा दिए। पीड़ित ने बताया कि आरोपी का परिवार काफी रसूख वाला है, इस कारण पहले भी उसने पीड़ित के परिवार से मारपीट की थी, मगर उसके रसूख के कारण ये मामला दब गया। ग्रामीणों के दवाब ने पुलिस ने मामला दर्ज कर क्या है, लेकिन आरोपी अब भी फरार है। अब देखना ये होगा कि क्या जनता के आक्रोश से डर कर पुलिस को ठोस कदम उठाएगी।
राजस्थान में पानी पीने के बदले बर्बरता
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजस्थान के बालोतरा जिले से है, जहां एक दलित युवक को सार्वजनिक घड़े से पानी पीने के कारण जातिवादि आतंकियो ने उसे गालियां दी और बुरी तरह से पीटा। ये मामला बलोतरा जिले के गिदा पुलिस थाना क्षेत्र के खोखसर गांव का है, पीड़ित युवक ने बताया कि 11 जून को वो चाबा जाने के लिए बस का इंतजार कर रहा था, लेकिन गर्मी के कारण उसे प्यास लगी तो वहीं वो पास राजूराम नाई की किराने की दुकान के बगल में लगे सार्वजनिक घड़े से पानी पी लेता है, लेकिन जब राजूराम नाई ने पीड़ित को ऐसा करते देखा तो वो भड़क गया, उसने तुरंत पानी के पैसे मांगे, जिस पर पीड़ित ने पैसे न होने की विवशता दिखाई तो आरोपी उसे जातिसूचक गालियां देने लगा औऱ उसे कई थप्पड़ मारे.. जिसके कारण वहां भीड़ जमा होने लगी। पीड़ित ने अपने साथ हुई घटना को लेकर पुलिस से मदद मांगने की कोशिश की तो पुलिस ने भी हाथ खड़े कर दिये उल्टा उसे ही गलत करार देकर भगा दिया। वो बार बार थाने के चक्कर लगा रहा था जो आऱोपी ने उसे धमकी दी कि अगर उसके खिलाफ कोई कार्रवाई की गई तो वो पीड़ित के हाथ पैर तोड़ देगा। पुलिस से कोई मदद न मिलती देख कर पीड़ित ने एससी एसटी कोर्ट का रूख किया… अदालत की फटकार के बाद पुलिस नींद से जाग गई है.. और एफआईआर दर्ज कर जांच शुरु कर दी है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर पुलिस इतनी लापरवाही कर क्यों कर रही थी.. क्या पीड़ित के केवल दलित होने के कारण इतना भेदभाव किया गया कि केवल मामला दर्ज करने में ही 20 महीने लग गए है। अब देखना ये होगा कि पुलिस जांच में क्या आता है।
तमिलनाडु में दलित बच्चे पर हमला
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु से मदुरै से है, जहां एक दलित छात्र ने दूसरी जाति के युवको से पहले पानी क्या भर लिया.. उसके ही सहपाठियों ने उसे गालियां दी और मारपीट भी की। ये मामला तिरुनेलवेली जिले के मूलाइकरैपट्टी गांव का है, जहां के सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय में दलित छात्र के साथ 12वी के छात्रों ने जातिगत भेदभाव किया.. पीड़ित छात्र के माता पिता का कहना है कि पीड़ित स्कूल में भी पानी की टंकी में बोतल भरने गया था, लेकिन तभी थेवर समुदाय से आने वाले 2 छात्र वहां पहुंच गए.. और पहले पानी भरने को लेकर विवाद करने लगे। जिसका छात्र ने विरोध किया , मगर उसके सहपाठियों ने गुस्से में उसके सिर पर डंडा मार दिया जिससे उसकी हालात खराब हो गई वहीं हमलावर छात्र फरार हो गए..पीड़ित को तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है, वहीं पीड़ित के परिजनो का कहना है कि ये मामला जातिगत भेदभाव का है लेकिन पुलिस ने इस मामले को बरगलाने के लिए बच्चों की लड़ाई का नाम दे दिया है। फिलहाल आरोपी छात्र फरार है.. वहीं परिजनों ने मांग की है कि पुलिस इस मामले में सही औऱ सख्ती से जांच करें.,. और सच्चाई बाहर लायें, साथ ही हमला कर ने वाले छात्रों को भी गिरफ्तार करें। अब देखना ये होगा कि क्या पुलिस सच का पता लगा पायेगी।
उत्तर प्रदेश के बिल्लौर में दलित महिला के साथ अभ्रदता
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के ही बिल्लौर से है, जहां दलितों को पहले ही जातिवादी आतंकी आगे बढ़ता नहीं देखना चाहते, ऊपर से किसी तरह से वो थोड़ी मोदी जमीनों से गुजारा करते भी है तो उन पर भी जातिवादी आतंकियों की गन्दी नजर पड़ जाती है। ताजा मामला बिल्लौर के अरौल गांव से है। जहां दबंगों ने एक दलित आंगनवाड़ी महिला की जमीन हथियाने के लिए पहले तो उसे चेतावनी दी लेकिन पीड़िता को झुकी तो उन लोगों ने उसे बीच सड़क पर घेर लिया और उसके साथ अभद्रता की। पीड़िता ने बताया कि वो दलित आंगनवाड़ी में काम करती है और हाईवे के पास उसके बाप दादा की पुरानी थोड़ी सी जमीन थी। जहां पीड़ित के परिवार मवेशी बांधते है और टिनशेड बनाया हुआ है साथ ही समर सिबेल लगा हुआ है। लेकिन उसके ही पड़ोस में रहने वाले गुरु नारायण और दिलीप कटियार ने अंनतराम के साथ मिलकर उसकी जमीन को नापना और वीडियो ग्राफी शुरू कर दी। पीड़िता ने इसका विरोध किया तो वो उसके सतह गाली गलौच करने लगे और उसे अगवा करवा देने की धमकी भी दी। जिसके तुरंत आरोपी पक्ष की तरफ से ईंट पत्थर से पथराव भी शुरू कर दिया। अब पीड़िता जब भी काम पर जाती है तो आरोपी के गुंडे उसे तंग करते है। हैरानी की बात है कि पीड़िता ने पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराने की भी कोशिश की लेकिन पुलिस ने कोई कार्यवाही ही नहीं की। हालांकि एसीपी अंकिता कुमार ने बताया कि पीड़िता की तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करके अब जांच शुरू कर दी गई है। लेकिन फिर भी पीड़िता का परिवार डर के साये में जीने पर मजबूर है । ऐसे में देखना ये होगा कि क्या पुलिस जांच के बाद आरोपी गिरफ्त में होंगे या पीड़ितों को ही गांव छोड़ना पड़ेगा।
भीम आर्मी चीफ ने दी संघ और बीजेपी को खुली चुनौती
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिन्होंने आरक्षण को खत्म करने की बात करने वाली बीजेपी सरकार पर जमकर निशाना साधा और साथ ही खुली चुनौती भी है, जी हां, आजाद ने खुले तौर कहा सरकार कहती है कि वो संविधान बदल देंगे, आरक्षण खत्म कर देंगे.. मेरी खुली चुनौती है कि आप आरक्षण बदल कर तो देंखो, देश में जो भूचाल आयेगा, सरकार उसे सह नहीं पायेगी। अगर सरकार सोचती है कि जोर जबरदस्ती से, या साजिश करके बच्चों को बांटने की कोशिश की… जो साजिश करने का खामियाजा भुगतने के लिए सरकार तैयार रहें। अगर मैने अगर संघ और सरकार को दिन में तारे न दिखा दिए तो मेरा नाम चंद्र शेखर आजाद नहीं है। बता दें कि आजाद इस वक्त दतिया में है औऱ वो उपचुनावों के लिए दामोदर यादव को सपोर्ट करने पहुंचे है। आजाद की खुली चुनौती के बाद आरक्षण को लेकर जो भी अटकले उठी है क्या उन पर लगाम लगेगी।



