Rajasthan crime: हाल ही में राजस्थान के बालोतरा जिले से इंसानियत को शर्मशार करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक दलित युवक ने सार्वजनिक घड़े से पानी पीने क्या पी लिया की मनुवादी दबंगों को गुस्सा आ गया और उन्होंने पलक झपकने से पहले ही दलित युवक को जातिसूचक गालियां देना शुरू कर दिया इतना ही नहीं उसे बुरी तरह से पीटा।
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दलित को पानी पीने के बदले मिली बर्बरता
बीते कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश से एक मामला सामने आया था, जहां एक दलित मजदूर ने सिरदर्द के लिए मेडिकल स्टोर से दवा ली और पास में रखे घड़े से पानी पी लिया, जिसके बाद दुकान के मालिक ने उसे बेरहमी से पीटा। ये मामला अभी शांत ही हुआ था कि ऐसा ही मामला बलोतरा (Balotra) जिले के गिदा पुलिस थाना क्षेत्र (Gida police station area) के खोखसर गांव (Khokhsar village) का है।
दरअसल, पीड़ित युवक ने बताया कि 11 जून को वो चाबा जाने के लिए बस का इंतजार कर रहा था। इसी बीच गर्मी के कारण उसे प्यास लगी तो वहीं वो पास राजूराम नाई की किराने की दुकान के बगल में लगे सार्वजनिक घड़े से पानी पी लेता है। लेकिन जब राजूराम नाई ने पीड़ित को ऐसा करते देखा तो वो भड़क गया, उसने तुरंत पानी के पैसे मांगे, जिस पर पीड़ित ने पैसे न होने की विवशता दिखाई तो आरोपी उसे जातिसूचक गालियां देने लगा औऱ उसे कई थप्पड़ मारे.. जिसके कारण वहां भीड़ जमा होने लगी।
पुलिस से नहीं मिली कोई मदद
जिसके बाद पीड़ित ने अपने साथ हुई घटना को लेकर पुलिस से मदद मांगने की कोशिश की तो पुलिस ने भी हाथ खड़े कर दिये उल्टा उसे ही गलत करार देकर भगा दिया। वो बार बार थाने के चक्कर लगा रहा था जो आऱोपी ने उसे धमकी दी कि अगर उसके खिलाफ कोई कार्रवाई की गई तो वो पीड़ित के हाथ पैर तोड़ देगा।
पुलिस से कोई मदद न मिलती देख कर पीड़ित ने एससी एसटी कोर्ट (SC/ST Court) का रूख किया… अदालत की फटकार के बाद पुलिस नींद से जाग गई है.. और एफआईआर दर्ज कर जांच शुरु कर दी है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर पुलिस इतनी लापरवाही कर क्यों कर रही थी.. क्या पीड़ित के केवल दलित होने के कारण इतना भेदभाव किया गया कि केवल मामला दर्ज करने में ही 20 महीने लग गए है। अब देखना ये होगा कि पुलिस जांच में क्या आता है।



