Top 5 Dalit news: दलितों की उठने वाली हर आवाज मनुवादियों को बगावत ही लगती है.. भले ही वो अपने लिए बेसिक अधिकार ही क्यों न मांग रहे है, लेकिन जातिवादियो को लगता है कि अगर उन्हें ये हक दे दिया गया तो वो उनसे उंचे हो जायेंगे.. फिर उनका शोषण करना मुश्किल हो जायेगा। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे… जो आपको भी सोचने पर मजबूर कर देंगे कि क्या वाकई में सरकार दलित समाज को आगे बढ़ते देखना चाहती है, या फिर उनके उत्थान की बात केवल दिखावा है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जेपी नड्डा को चिट्ठी लिखी
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुए शुद्धिकरण प्रकरण को लेकर है, जो एक महीने होने वाले है लेकिन ये विवाद शांत होने के बजाय और ज्यादा गर्माता जा रहा है। अब तक कांग्रेस के नेता इस मामले में अपना रोष जता रहे थे लेकिन अब अपमानित होने वाले कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी आगे बढ़ कर अपने लिए न्याय की आवाज उठाई है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिख के उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी से दलितों को अपमानित करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज कराने के निर्देश देने की अपील की है। बता दे कि 9अगस्त को हल्द्वानी में खड़गे की रैली के बाद स्थानीय हिंदू संगठन ने पूरे रामलीला मैदान का शुद्धिकरण किया था जिसे लेकर दलितों का अपमान का मुद्दा काफी तूल पकड़ने लगा। जेपी नड्डा ने 13अगस्त को संसद में आश्वासन दिया था कि इस मामले में उचित कार्यवाही होगी लेकिन उल्टा न्याय न मिलने पर न्याय की आवाज उठाने वाले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर ही एससीएसटी एक्ट में केस दर्ज करवा दिया गया। लेकिन खड़गे ने 2 सितंबर को खुद नड्डा को चिट्ठी लिख कर उनका वादा याद दिलाया है। वहीं ये भी साफ कर दिया है कि वो इन केस मुकदमों से भी डरते है। कांग्रेस को डराने की साजिश बंद कर दें। अब खुद खड़गे के इस मामले में न्याय की मांग करने के बाद ये विवाद और क्या रंग लेता है ये देखने वाली बात होगी, लेकिन ऐसा लगता है कि जैसे दलितों के अपमान का ये मुद्दा आगामी विधानसभा चुनावों तक चलने वाला है।
मैनपुरी में दलित छात्र को दिनदहाड़े उठाने की कोशिश
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से है, जहां बड़े तो बड़े दलितों की छोटी बच्चियों को भी गिद्ध की नजरों से देखने से बाज नहीं आते अपराधी। ताजा मामला मैनपुरी के बेवर थाना क्षेत्र का है, जहां राशन की दुकान से सामान ले कर लौट रही दलित बच्ची के साथ छेड़छाड़ करने और अश्लील हरकत करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़िता आठवीं कक्षा की छात्रा है और हॉस्टल में पढ़ती है, रक्षाबंधन के त्यौहार को लेकर वो घर आई थी इस बीच वो पास के परचून को दुकान से सामान लेने गई थी लेकिन वापिस आते वक्त गांव के ही प्रांशु ने पीड़िता को जबरन एक सुनसान घर में ले जाने की कोशिश की लेकिन जब पीड़िता ने शोर मचाया तो वो भाग खड़ा हुआ । लेकिन पीड़िता तुरंत अपने घर पहुंची और आपबीती परिजनों को बताई। जिसके बाद परिजनों ने थाने में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कराया। पुलिस की बिना किसके देरी के जांच शुरू कर दी है लेकिन आरोपी अभी फरार है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही आरोपी उसके शिकंजे में होगा, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर यूपी में वाकई ने कानून व्यवस्था इतनी लचर हो गई है कि दिनदहाड़े बच्चियों के साथ ऐसी घटना होती है और आरोपी को कानून का कोई डर नहीं है।अब देखना ये होगा कि आरोपी कब तक पुलिस के शिकंजे में आता है।
हैदराबाद में सैकड़ों दलितों के घर खतरे में
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला तेलंगाना के हैदराबाद से है, जहां 5 दशक से घर बना कर रहे दलितों के सिर से प्रशासन की लापरवाही के कारण आखिर छत ही हट गई। ये मामला हैदराबाद के करीमनगर जिले गंगाधरा मंडल का है, जहां पहले तो सरकार ने दलित को आवास देने के लिए इंदिराम्मा आवास बनाये थे लेकिन अब अचानक सैकड़ों घर सरकार द्वारा जारी प्रतिबंधित संपत्ति के दायरे में आ गए है। जो कि पंजीकरण अधिनियम की धारा 22 ए के तहत मानी जा रही है। इस सूचित में गंगाधरा मंडल के 6 गांव आ गए है, ये जमीन वहां रहने वाले दलितों को 1975-76 में ही दी गई थी, लेकिन अचानक इतने सालों के बाद ये जमीन धारा 22ए के तहत प्रतिबंधित सूची में कैसे आ गई। इस मामले की जानकारी मिलते ही आवास मिलने वाले दलित समुदाय के लोगों ने सूची से बाहर करने के लिए जद्दोजहद शुरू कर दी है। वहीं जब ये मामला कलेक्टर तक पहुंचा तो पता चला कि सूची बनाने में बहुत बड़ी गलती हुई है, और उनकी घरो की जमीनों को सूची से हटाया जाएगा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि जो दलित करीब 5 दशकों से वहां रह रहे थे, उन्हें सरकार अब भी अपने नागरिकों के नहीं गिनती है क्या। अचानक सूची में शामिल होना वाकई में गलती थी या उन्हें वहां से उखाड़ फेंकने की साजिश। आपको क्या लगता है।
वर्धा में 6 छात्रों को कॉलेज में प्रवेश पर रोक
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला महाराष्ट्र के वर्धा से है, जहां अपनी बेसिक मांगो के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे 6 दलित और पिछड़ी जाति के छात्रों पर यूनिवर्सिटी ने प्रवेश पर रोक लगा दिया है। ये मामला महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय का है, जहां पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से दलित और ओबीसी छात्रों ने 2022-23 के पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को पूरा करने, 24 घंटे लाइब्रेरी, खाना, पानी और दवाइयां उपलब्ध कराने को लेकर प्रदर्शन कर रहे है लेकिन उनकी मांगो को पूरा करने के बजाय उनके खिलाफ FIR दर्ज करा दी, जिसकी आड़ में 6छात्रों पर शांति भंग करने का आरोपी लगा कर प्रवेश को ही रोक दिया। वहीं पीड़ित छात्रों ने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा उनपर जो भी आरोप लगे है वो केवल उचित जांच के बाद भी साबित किया जा सकता है कि आरोप सही है या गलत। लेकिन उनपर पहले ही कार्यवाही बताती है कि उन्हें जानबूझ कर टारगेट किया गया है। लेकिन वो अब भी अपनी मांगो पर अड़े है। गौरतलब है कि यूनिवर्सिटी का कहना है कि केवल उचित जांच तक उनके प्रवेश पर रोक है। अब सवाल ये उठता है कि क्या वाकई में हम एक संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े है, क्योंकि जहां दलित पिछड़े हक की आवाज उठाने लगते है वहीं उनपर संगीन आरोप लगा कर दबा दिया जाता है।
भीम आर्मी चीफ की चेतावनी, दूध पीता बच्चा न समझें
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ और नगीना सांसद चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिन्होंने वीडियो जारी कर आरोक्षण विरोधियो के साथ साथ सरकार को भी खुली चेतावनी दी है.. उन्होंने कहा कि 24 सितंबर को ही पूना पैक्ट हुआ था, भले ही वहां बाबा साहब को झुकना पड़ा था लेकिन जो आंदोलन दिल्ली के जंतर मंतर पर होगा वो हर हाल में सफल और ऐतिहासिक आंदोलन होने वाला है। उन्होंने कहा कि जो लोग आरक्षण को हटाने के लिए पर्दे के पीछे से समर्थन दे रही है वो भी सामने से आ कर लड़े। आजाद ने भविष्य में और बड़े आदोंलन की भी चेतावनी दी है। आजाद ने कहा कि सरकार हमें दूध पीता बच्चा समझती है कि वो हमें चिकडनी चुपड़ी बातों से शीशे में उतार लेगी.. लेकिन दलित अब जागरूक होने लगा है। हम किसी को अपने अधिकारों को निगलने नहीं देंगे। बता दें कि नगीना सांसद इस वक्त जौनपुर में रैली कर रहे है.. जहां तेज बारिश में भी वो भाषण दे रहे है तो वहीं बारिश की परवाह किये बिना ही सैकड़ो लोग आजाद को सुनने के लिए खड़े है। आजाद की रैलियों में जो भीड़ जमा हो रही है.. उनके पीछे उमड़ रहा समर्थन सरकार की नींदे उड़ाने के लिए काफी है.. दलित समाज आजाद में अपना नया सीएम ढूंढ रहा है तो वहीं बीजेपी के लिए इस बार विधानसभा चुनाव के रास्ते कांटो भरे नजर आ रहे है। अब देखना ये होगा कि 2027 के चुनाव के बाद यूपी में कौन सा नया इतिहास रचा जायेगा।



