Top 5 Dalit news: India में करीब 33 प्रतिशत आबादी दलितों की है लेकिन फिर भी जब उनके अधिकारों, उनके सम्मान की बात आती है तो फिर ये दलित कैसे मूल आबादी से अलग थलग कर दिए जाते है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो आपको भी सोचने पर मजबूर कर देंगे कि दलित केवल वोट बैंक ही क्यों है। वो समाज का हिस्सा क्यों नहीं बन पाया।
भीम आर्मी कार्यकर्ता पर जानलेवा हमला
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी की 14 साल की छोटी कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता पर सीजेपी के आंदोलन में हुए जानलेवा हमले को लेकर है, जिसमें पीड़िता के बार बार गुहार लगाने के बाद भी दिल्ली पुलिस की लापवाही और आरोपी को बचाने की बड़ी साजिश का फर्दाफाश ही नहीं हुआ बल्कि आरोपी ने अब खुद इस बात तो स्वीकार कर लिया है कि उसने जानबूझ कर नीशु आजाद के पिता पर जानलेना हमला किया था। बता दें कि सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के दौरान इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज ने नीशु आजाद के पिता संजय कुमार के सिर पर जानलेवा हमला किया था, लेकिन तब उसे आत्मरक्षा का नाम देकर दबाने की कोशिश की.. लेकिन अभी हाल ही में स्वतंत्र भारद्वाज ने एक पॉडकास्ट में शेखी बघारते हुए इस हमले को साजिशन बताया था.. जिसके बाद तो उसके खिलाफ एससी एसटी एक्ट और जान से मारने की कोशिश की धाराओ के साथ मामला दर्ज कराया गया। इस दौरान खुद नगीना सांसद भी नीशू आजाद के साथ दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचे थे। उन्होंनें पुलिस को 72 घंटो का अल्टीमेटम दिया है कि अगर तुरंत आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई..जिसके बाद पुलिस ने बिना किसी देरी के बुलंदशहर के चोली थाना क्षेत्र से उसे गिरफ्तार भी कर लिया। अब देखना ये होगा कि स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ पुलिस का क्या रूख होगा.. और अब तक जो बचता आया था, क्या अपने ही चाल में फंस चुका है.. ये देखना बेहद दिलचस्प होगा..
सुल्तानपुर में दलित युवक पर हमला
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूपी के सुलतानपुर से है, जहां मामूली सी कहासुनी पर एक सफाई कर्मचारी ने दलित व्यक्ति को बुरी तरह से पीटा, उसे जातिगत गालियां देकर अपमानित किया गया। ये घटना सुलतानपुर के चांदा कोतवाली क्षेत्र के गोपालपुर गांव की है.. पीड़ित सुनील रजक ने पुलिस को बताया कि किसी पुरानी रंजिश के चलते गांव के ही एक सफाई कर्मचारी शेषनाथ पाल ने पहले तो उसे रोककर किसी बात पर बहस शुरु कर दी.. और उसे गालियां देना शुरु कर दिया..लेकिन जब पीड़ित ने इसका विरोध किया तो अपनी नौकरी औऱ जाति का दंभ भरते हुए उसने लाठी डंडो से उस पर हमला कर दिया। पीड़ित ने इस हमले को जानबूझ कर उकसा कर किया जाने वाला हमला करार देते हुए आऱोपी के खिलाफ मामला दर्ज कराया… वहीं पीड़ित को कई गंभीर छोटे भी आई है.. जिसे देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्यवाई शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक मामले की जांच जारी है औऱ आरोपी जल्द ही पुलिस की गिरफ्त में होगा।
तमिलनाडु में दलित ग्राम पंचायत अध्यक्ष ने की आत्मदाह की कोशिश
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के विल्लुपुरम से है, जहां जातिगत उत्पीड़न से तंग आकर कोडुंगल ग्राम पंचायत अध्यक्ष को भी न्याय के लिए आत्मदाह का सहारा लेना पड़ा। रूंह कंपा देनी वाली ये घटना विल्लुपुरम के कोडुंगल की है.. पुलिस के मुताबित कोडुंगल ग्राम पंचायत अध्यक्ष जी मलारविझी पिछले काफी समय से पंचायत उपाध्यक्ष, उसके कुछ रिश्तेदार और कुछ स्थानीय अधिकारियों द्वारा लगातार की जारी जातिगत भेदभाव से तंग आ गई थी.. इतना ही नहीं उन्हें उनके ही कार्यलय में बैठने की जगह नहीं दी गई.. उनके काम में लगातार बधा डाली जाती है, यहां तक कि 15 अगस्त को भी उन्हें झंडा नहीं फहराने दिया गया.. करीब 4 सालो से वो ये सब सह रही है.. उन्होंने इसके खिलाफ कई बार शिकायत भी की लेकिन प्रशासन कानों में तेल डाल कर बैठा है। जिससे मजबूरी में उसे ये संगीन कदम उठाना पड़ा था। पीड़िता को पुलिस ने वत्त रहते बचा लिया.. लेकिन अब इस मामले मेम बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर जब दलितो को उनकी शक्ति देनी ही नहीं है, तो फिर आरक्षित सीट के नाम पर उनसे धोखा करने की जरूरत ही क्या है। आपको क्या लगता है क्या 4 सालों से न्याय इंतजार कर रही पीड़िता को अब भी न्याय मिलेगा।
रायचूर में गैंगरेप के बाद हत्या की गई मृतका के परिवरा को सहायता
4, दलितो से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक के रायचूर से है, जहां 22 साल की दलित युवती के साथ गैंगरेप करने औऱ फिर उसकी हत्या करने के बाद उसके शव को कुंए में फेंकने के मामले में घिरी सरकार ने पीड़ित परिवार को सांत्वना के तौर पर सरकारी नौकरी देने की पेशकश की है। ये घटना रायचूर के सिरवार तालुक के होकरणी गांव का है, जब 19 अगस्त की शाम को शौच के लिए गई युवती घर नहीं लौटी, अगली सुबह उसका शव कुएं में मिला.. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गैंगरेप की बात सामने आई.. जिसके बाद से ही लोगो का गुस्सा काफी भड़का हुआ था, मामले में 4 आरोपी को गिरफ्तार किया गया और 4 पुलिस वालो को लापरवाही करने के आरोप में निलंबित भी कर दिया गया था। वहीं अब समाज कल्याण मंत्री के एच मुनियप्पा ने खुद पीड़ित परिवार से मुलाकात कर मृतका के भाई को सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र दिया है। साथ ही उचित सहायता देने का भी आश्वासन दिया है। पीड़ित परिवार के लिए जिस तरह के प्रशासन औऱ शासन खड़ा था.. अगर ऐसा ही होता है तो वो दिन दूर नही जब दलितों, वंचितो को न्याय के लिए दर दर नहीं भटकना पड़ेगा।
जातिवादी वकील अनिल मिश्रा का विवादित बयान
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के विवादित वकील अनिल मिश्रा को लेकर है.. जिसने प्रस्तावित सवर्ण आयोग को बनाने के बजाये तीखे शब्दों में जातिगत आधारिक कानूनों का अंत करने की मांग की है। अनिल मिश्रा ने इस बात पर भी जोर दिया कि आरक्षण को खत्म करने की मांग करने वाला आंदोलन खत्म नहीं हुआ है.. ये आंदोलन और मजबूत होगा.. नेताओं को हमारी मांग माननी ही होगी.. जातिगत आरक्षण देश की प्रगति में बाधा है.. और आरक्षण के कारण लोग जातिगत रूप से बंटे हुए है.. इसलिए यूजीसी हो, एससी एसटी एक्ट हो या आरक्षण.. इन सभी काले कानूनो को खत्म होना ही होगा। आरक्षण एक कैंसर है, जिसने देश की तरक्की को रोका हुआ ..जात बिरादरी के लिए लागू हर कानून को पूरी तरह से खत्म होना चाहिए.. देश में किसी और धर्म की जगह ही नहीं है..वो भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता है। सवाल ये उठता है कि क्या वाकई में आरक्षण देश की तरक्की में बांधा है या फिर अनिल मिश्रा जैसे जातिवादी के लिए दलितो का हनन करने में बाधा पैदा करते है.. आरक्षण दलितो को आर्थिक मजबूती देता है.. और उसे खत्म करके वो फिर से दलितो को हाशिये पर लाने की कोशिश में है.. जो बाबा साहब अंबेडकर जैसे महापुरुष और महाज्ञानी व्यक्ति की दूरदर्शिता को नहीं समझ सकता, वो दलितों और सवर्णो को बराबरी पर लाने की बात करता है। आप क्या अनिल मिश्रा की बातों से सहमत है।


