Gujarat news: हाल ही में गुजरात से एक चौंकाने वाली और परेशान करने वाली घटना सामने आई है, जहाँ दलित समुदाय के लोगों ने जाति-आधारित भेदभाव की बाधाओं को तोड़ने की कोशिश की; इससे ‘मनुवादी’ सोच वाले लोग इतने नाराज़ हुए कि उन्होंने एक अनावश्यक विवाद खड़ा कर दिया। इतना ही नहीं उन्होंने उनको जतिसुचक शब्द कहकर भी अपमनित किया।
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दलित परिवार के मंदिर प्रवेश पर आक्रोश
ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें दलित समुदाय के लोगों को मंदिरों में प्रवेश करने से रोका गया या उन्हें अपमानित किया गया। ऐसा ही मामला गुजरात के राजकोट से है, जहां दलित समाज के लोगों ने जातिगत भेदभाव की दीवार तोड़ने की कोशिश क्या की, जातिवादियों को ये इतना चुभा कि उन लोगों हंगामा शुरु कर दिया। दरअसल, ये मामला राजकोट (Rajkot) शहर के कुवाडवा रोड पुलिस स्टेशन (Kuvadva Road Police Station) के तहत रतनपर्णा पाटिया (Ratanparna Patiya) में आने वाले जलाराम सोसायटी (Jalaram Society) का है।
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महिला सरपंच के घर जाकर की बहस
पीड़ित सपनाबेन जादव ने पुलिस को तहरीर दी कि वो वहां की सरपंच है औऱ उसने जातिगत भेदभाव को दूर करने के लिए सोसाइटी के सभी दलित और पिछड़े लोगो को सोसाईटी के बने हनुमान मंदिर में पूजा करने के लिए प्रेरित किया था। लेकिन महिला सरपंच की ये हरकत सोसाइटी के ही राजूभाई रामावत, मयूर रामावत, हेतलबेन भालसोड़ और चंद्रेशभाई भालसोड़ को इतनी नागवार गुजरी कि उन लोगो ने सरपंच के घर जाकर काफी बहस की।
इस दौरान सरपंच का पति और उसका बेटा सबको शांत कराने आये तो आरोरियों ने सबको जातिसूचक गालियां देकर अपमानित किया। वहीं मंदिर मे दुबारा प्रवेश करने की कोशिश करने पर जान से मारने की धमकी दीं। डरे सहमे परिवार ने पहले पुलिस से कोई मदद नहीं ली, जिसके बाद दलित समाज के नेताओ ने कुवाडवा रोड पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरु की है। हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नही हुई है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर कब तक दलितों को जाति के नाम पर ये अपमान सहना पड़ेगा।



