340 BNS in Hindi: अक्सर, अपना काम निकलवाने की कोशिश में कुछ लोग जाली दस्तावेज़ तैयार कर लेते हैं, उन्हें अपने पास रख लेते हैं, और बाद में उनका असली बता कर इस्तेमाल इस तरह करते हैं मानो वे असली हों। तो कभी सोचा है कि ऐसे मामले में BNS की कौन की धारा लगती है और ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो आपको बता दें, ऐसा करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 340 लागू होती है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 340 क्या कहती है? BNS Section 340 in Hindi
आज के समय में, टेक्नोलॉजी का दुरूपयोग इतना ज्यादा बढ़ गया है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी से लेकर नकली सर्टिफिकेट बनाने तो बाएं हाथ का खेल बन गया है। लेकिन पकडे जाने पर कड़ी सजा भी होती है… वही जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 340 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 340 यह सेक्शन उस व्यक्ति पर लागू होता है जो कोई व्यक्ति जान-बूझकर किसी जाली या मनगढ़ंत दस्तावेज़/इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को ‘असली’ के रूप में प्रस्तुत करता है। या फिर सरकारी नौकरी पाने के लिए ऐसा करता है।
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BNS section 340 important points
- आपको बता दें, यह धारा पहले भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 471 के अंतर्गत आता था।BNS की धारा 340 के तहत लागू किया है।
BNS section 340 example
मान लीजिए, सुधेश नाम का कोई व्यक्ति जाली दस्तावेज़ बनाता है और उन्हें असली बताकर उनका इस्तेमाल करता है। लेकिन, यदि यह मामला सामने आता है और वह दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध BNS की धारा 339 लागू होगी।
बीएनएस धारा 340 की और सजा
इसके अलावा, BNS की धारा 340 यह तब लागू होती है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर इलेक्ट्रॉनिक फ्रॉड करता है या नकली जाली पेपर्स को ओरिजिनल बता कर यूज़ करता है। तो इस सेक्शन के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को crime करने पर कैद और जुर्माना होता है। आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है। इस अपराध में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल हैं। वही पुलिस इस अपराध के लिए बिना वारंट के भी आरोपी को गिरफ्तार कर लेती है।



