Kanpur news: हाल ही में उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात से खबर सामने आई है, जहां एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को न्याय के लिए दुआ सालों का इतंजार करना पड़ा, लेकिन कोर्ट ने उसके साथ न्याय किया और उसके गुनहगार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई साथ ही एक लाख 26 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।
10 सालो बाद दुष्कर्म पीड़िता को मिला न्याय
दलितों के ख़िलाफ़ अत्याचार कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं; ऐसा एक भी दिन नहीं बीतता जब उनके साथ कोई अमानवीय घटना न हो। लेकिन, इससे भी बुरी बात यह है कि दलितों को न्याय मिलने में सालों लग जाते हैं। दरअसल, ऐसी ही एक घटना कानपुर देहात के शिवली कोतवाली से सामने आई है, जहां न्याय मिलने में ही सालो लग गए…वही मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के मुताबिक एडीजीसी अजय त्रिपाठी ने बताया कि शिवली कस्बे के एक मोहल्ले के रहने वाले व्यक्ति ने बीते 21 मई 2016 के दिन एक युवक ने पुलिस स्टेशन ने तहरीर दी थी कि 18 मई को सुबह के करीब 5 बजे उसकी 16 साल की बेटी घर से गायब हो गई थी।
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मेडिकल जाँच में पता चला बच्ची के साथ हुआ दुष्कर्म
उसने तुरंत खोजबीन शुरू की तो उसे पता चला कि गांव का ही रोहित वर्मा रोहित वर्मा पुत्र हरीओम वर्मा उसे बहला फुसला कर ले गया है। पुलिस ने तुरंत बच्ची की तलाश शुरू की तो बच्ची आरोपी के पास से बरामद हुई, जिसके आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया और बच्ची का मेडिकल Medical) कराया गया जिसमें उसके साथ कई बार दुष्कर्म किए जाने की बात सामने आई थी।
जिसके बाद ये मामला 10 सालों से कोर्ट (Court) में चल रहा था मगर आखिरकार कोर्ट ने पीड़िता के साथ न्याय करते हुए एडीजे 15 की स्पेशल पॉक्सो एक्ट कोर्ट (POCSO Act Court) ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है साथ ही अलग अलग धाराओं में एक लाख 28 हजारा रुपए का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने दोषी को जेल भेज दिया। कोर्ट के इस फैसले ने साबित कर दिया कि न्याय में भले ही देरी हो लेकिन न्याय होगा जरूर। लेकिन न्याय मिलने के बावजूद सवाल आज भी यही है कि आखिर कब तक दलितों के साथ इस तरह के अत्यचार होते रहेंगे ?



