Top 5 Dalit news: जब बात दलितों की आती है तो आखिर क्यों जातिवादी खुद को कानून और खुद को ही जज क्यों समझने लगते है। क्या इस देश का कानून दलितों और उंची जाति वालो के लिए अलग अलग काम करता है। जब ये देश लोकतंत्र है तो फिर दलितो के लिए समाज न्याय क्यों करने लगता है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओ के बारे में जानेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है। साथ ही सवाल उठाती है कि देश किसके कानून से चलता है।
जंतर मंतर पर दिल्ली पुलिस की दादागिरी
1, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजधानी दिल्ली से है, जहां पुलिस की दादागिरी और अत्याचार का नया नमूना देखने को मिला है। अब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर जंतर मंतर पर करीब तीन हफ्ते से धरना प्रदर्शन करने वाले पर न तो पुलिस और न ही सरकार ध्यान दे रही थी, लेकिन जैसे ही भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद ने वहां का दौरा किया, पूरे आंदोलन का रंग ही बदल गया, कार्य नेताओं का समर्थन मिलने लगा, जिसका नतीजा वहीं हुआ , जो बीजेपी के शासन में अपने हक की आवाज उठाने वाले के साथ होता है। दिल्ली पुलिस सादे कपड़ों में वहां पहुंची, भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक को जबरन उठा कर अस्पताल ले गई, वहीं प्रदर्शनकारियों पर जमकर लाठी बरसायी गई। उनके समर्थकों को पुलिस उठा ले गई। इस मुद्दे पर नगीना सांसद ने सरकार को जमकर घेरा है। उन्होंने सीधा पूछा की इससे पहले वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर महीनों तक धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों हो या, महिला पहलवानों के शांतिपूर्ण आंदोलन हो, सभी के साथ ऐसा ही तुगलगी व्यवहार किया जा गया, ताकि उनके आंदोलन का आवाज सरकार के कानों तक पहुंचे ही न.. क्या क्या शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार केवल सत्ता की सुविधा तक ही सीमित रह गया? आजाद ने पुलिस की इस कार्यवाई को त्यंत निंदनीय और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार बताया है। इस छात्रों के साथ ये व्यावहार आखिर किस लोकतंत्र की निशानी है.. जो केवल अपने अधिकारों और अपने साथ हुए अन्यायों के लिए आवाज उठा रहे थे, फिर भला जो देश का भविष्य है उनके साथ ऐसा खिलवाड़ क्यों.. इसकी जवावदेही किसकी होगी।
भिंड में जातिगत मामलों को तेजी से निपटाने के लिए सख्ती
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के भिंड से है, उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश एक ऐसा राज्य है जहां दलित, पिछड़ों और आदिवासी समाज से आने वाले लोगों के साथ अत्याचार की घटनाएं काफी तेजी से बढ़ी है। दलितों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर सरकार को काफी मिट्टी पालित भी हुई है , ऐसे में छवि सुधारने के लिए अब मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग खुद ऐसे मामलों की देखरेख में जुट गया है जो प्रशासन की लापरवाही के कारण अभी तक लंबित पड़े है। इसी काफी में आयोग भिंड पहुंचा, जहां दलितों से जुड़े मामलों में प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली की जांच की, साथ ही काफी लंबे समय से लंबित 42मामलों को लेकर जमकर फटकार भी लगाई। आयोग के अध्यक्ष डॉ. कैलाश जाटव ने जिला प्रशासन, पंचायत, नगरीय निकाय और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठकें करके सबको सख्त हिदायत दी है कि एससीएसटी मामलों में देरी और लापरवाही किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी के साथ दलितों के लिए जारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंच भी रहा है या नहीं उसका भी विश्लेषण किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि दलितों से जुड़ा हर मामला, चाहे वो उत्पीड़न का हो, उन्हें सरकारी लाभ देने का, उनके लिए विकास कार्य करने का या फिर उनके बच्चों के लिए छात्रावास की सुविधा हो, इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की है कि लाभ उन तक पहुंचे, अन्यथा जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। अब से अयोग खुद उन मामलों पर निगरानी रखेगी जिसका लाभ दलितों को हुआ है। आयोग की ये सख्ती वाकई में काबिले तारीफ तो है, लेकिन सवाल ये है कि ये सख्ती कही हाथी के दांत की तरह तो नहीं है, खाने के कुछ, और दिखाने के कुछ।
शाहजहांपुर में दलित बच्चे को बंधक बना पीटा
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर से है, जहां जातिवादी आतंकियों ने केवल दलितों को उनकी औकात दिखाने के लिए घर के बाहर खेल रहे एक मासूम बच्चे को पकड़ा , उसे बुरी तरह से पीटा, और जानवरों का भूसा रखने वाले कमरे में बंद कर दिया। इतना ही नहीं बच्चे को बचाने के लिए जब मां दौड़ी दौड़ी गई तो उसके साथ भी मारपीट की गई, उसे जातिसूचक गालियां दी गई। जब पीड़िता बार बार बच्चे को छोड़ने की गुहार लगाती रही तो वहां गांव वाले जमा हो गए, जिसके बाद आरोपी फरार हो गया। ये मामला शाहजहांपुर जिले के निगोही थाना क्षेत्र के जिंधपुरा गांव का है। हैरानी की बात तो ये है कि बच्चे के साथ ये अमानवीय घटना 30 जून को ही घटित हुई थी, लेकिन जब पीड़िता अपने बच्चे को लेकर थाने पहुंची तो करीब 2 हफ्ते तक तो पुलिस ने मामला भी दर्ज नहीं किया। जिसके बाद पीड़िता ने जिला कार्यालय में अपनी अर्जी दी। पीड़िता के मुताबित 30 जून को पीड़िता बच्चा घर के बाहर खेल रहा था, तभी वहां उनका पड़ोसी आया और उसके दरवाजे पर खेलने को लेकर नाराज हो गया, वो बच्चे को जबरन ले गया, उसे पीटा और भूसा रखने वाले कमरे में बंद कर दिया। बीच बचाव करने गई बच्चे की मां के साथ भी गाली गलौच और मारपीट की गई, साथ ही दोनों को जान से मारने की धमकी भी दी। जिलाधिकारी की सख्ती के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है, लेकिन सोचने वाली बात है कि जब मामला दर्ज करने में दो सप्ताह लगा दिए तो न्याय कितन महीनों में मिलेगा।
कुशीनगर में दलितों के जमीन पर दबंगो का कब्जा
4, दलितो से जुड़ा यूपी के कुशीनगर से है, जहां दलितों और पिछड़ो की जमीन को हड़पने की साजिश का भंडाफोड़ होने का बाद कुशीनगर के डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने इसकी जांच के लिए समिती का गठन करने के आदेश दिये है। ये मामला कुशीनगर के रहसू जनौबी पट्टी समेत आसपास के मुसहर समुदाय के 4 गावों का है, गांव में रहने वाले मुसहर समुदाय के लोगो ने एकजुट हो डीएम को एक ज्ञापन सौंपा था जिसके अनुसार सरकार की तरफ से उन्हें पट्टा दियी गई जमीनों पर दबंगो और ठेकेदारों ने जबरन कब्जा कर लिया है, ग्रामीणो ने पहले पुलिस के भी मदद मांगी थी लेकिन पुलिस की लचरता से नाराज होकर उन्होंने आंदोलन शुरु कर दिया, जिसमें कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने भी समर्थन दिया और गांव वालो के साथ मिलकर डीएम ऑफिस पहुंच कर घेराव किया, जिसके बाद डीएम ने तुरंत 4 सदस्यों की एक समिति बनाई और इस मामले की निष्पक्ष जांच करने के आदेश दिये। डीएम ने गांव वालों को आश्वासन दिया है कि एक हफ्ते के अंदर रिपोर्ट आ जायेगी और उनकी हक उन्हें वापिस जरूर मिलेगा। हैरानी की बात है कि जब तक दलित आंदोलन नही करते, शोर नहीं मचाते, उन्हें उनका हक तक नहीं दिया जाता, दूसरे लाभो को तो छोड़ ही दिजिये।
मंडला में रिक्शा चालक को रिक्शे से बांध कर पीटा
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के मंडला से है, जहां एक दलित रिक्शा चालक को दबंगो को 2 किलोमीटर तक उसके ही रिक्शे में बाँध कर पीटा। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस ने तुरंक कार्यवाई शुरु की, जानकारी के मुताबिक दोनो युवको के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था, जिसके बाद आरोपी ने रिक्शा चालक पर हमला कर दिया, बदले में अपना बचाव करने के लिए रिक्शा चालक नें भी हमला किय, लेकिन गुस्साये आरोपी ने उसे उसके ही रिक्शे में बांध दिया, और चप्पल और छातों से पीटते हुए ले गया, इस दौरान उससे जबरन उसका रिक्शा भी चलवाया। इस घटना के सामने आने के बाद वहां की कानून व्यवस्था पर सवाल उठने लगे है। आखिर क्यों किसी को कानून का डर नहीं है। पीड़ित व्यक्ति की तहरीर पर मामले की जांच शुरु कर दी गई है.. मगर सवाल ये है कि आखिर क्यों लोग खुद ही कानून को अपने हाथों में ले लेते है। क्या वाकई में कानून की कोई वैल्यू नहीं रह गई है।



