Top 5 Dalit News: अमेठी दुष्कर्म से लेकर ओडिशा के नए SC/ST कोर्ट तक 5 बड़ी खबरें

Caste Discrimination, Sonbhadra News
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Top 5 Dalit News: मौजूदा समय में सच कहें तो दलितो को खुद भी ये समझ ही नहीं आता होगा कि आखिर वो ऐसा क्या करें कि उनकी उत्पीड़न रूक सकें, उन्हें प्रताड़ित करना बंद हो सकें.. क्योंकि वो जन्म कहां ले रहे है ये तो उनके हाथ में नहीं है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो सबसे बड़ा सवाल खड़ा करती है कि दलित कैसे रहे कि वो चैन से जी पायें, एक स्वतंत्र समाज को महसूस कर पायें।

अमेठी में नाबालिग का अपहरण कर दुष्कर्म

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले है, जहां एक मासूम नाबालिग बच्ची के साथ मानवता की सारी हदें पार कर दी है। बच्ची को जबरन अगवा किया गया और फिर उसका धर्म परिवर्तन करा दिया गया। ये मामला अमेठी के संग्रामपुर थाना क्षेत्र का है। पीड़िता की मां ने पुलिस को तहरीर दी कि 20 जुलाई को गांव का ही दूसरे समुदाय का व्यक्ति जाबिर उसकी बेटी को अगवा कर ले गया, और उसका दुष्कर्म कर उसका धर्म परिवर्तन करवा कर उससे ज़बरन शादी कर ली थी। दो समुदाय का मामला होने के कारण पुलिस ने बिना किसी देरी के मामले ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और नाबालिग पीड़िता को सही सलामत बरामद कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में एससीएसटी कानून के साथ साथ पॉक्सो एक्ट भी लगाया है। आरोपी से पूछताछ जारी है तो वहीं पीड़िता के मेडिकल रिपोर्ट के आने का इतंजार है। इस घटना ने एक बार फिर से यूपी में कानून का कितना डर है लोगों में, वो उजागर कर दिया है।  न दलित बेटियों का शोषण रुक रहा है और न ही उनका लव जिहाद। आपको क्या लगता है कि क्या समय आ गया है कि सरकार अब बदल जानी चाहिए, हमें कमेंट करके जरूर बताएं।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेता ने दलित को पीटा

दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के उज्जैन से है, जहां एक कांग्रेस नेता और उसके बेटे भतीजे ने एक दलित युवक पर चोरी का झूठ आरोप लगा न केवल घर में घुस कर उसे चप्पलों से पीटा, बल्कि उसके जाति सूचक गलियाँ देकर उसके साथ बदसलूकी भी की। ये घटना आगर-मालवा क्षेत्र के सुसनेर की है, पीड़िता ने पुलिस को तहरीर दी कि 15 जुलाई को कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश सचिव निजामुद्दीन मंसूरी उसका बेटा अजहर और भतीजा जावेद जबरन ताला तोड़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन तभी वहां पीड़ित की बहन आ गई, उसने ऐसा करने का कारण पूछा तक आरोपियों ने पीड़ित पर चोरी का आरोप लगाया । पीड़ित की बहन ने आराम से बात करने की बात करके ताला खोल दिया लेकिन वो लोग उसके घर में घुस गए, वो सो रहा था, उन लोगों ने बिना किसी बात के उसे चप्पलों से पीटना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं घर पर मारपीट के बाद उसे अपनी आरा मशीन फैक्ट्री के पास ले गए और वहां भी लात घुसो से पीटा था। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी काफी वायरल हो रहा है। आरोपियों ने पीड़ित को जान से मारने की धमकी दी । वहीं इस मामले में अब राजनीति शुरू हो गई है, बीजेपी नेता ने कांग्रेस को घेरते हुए कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ये गुंडागर्दी मध्य प्रदेश में नहीं चलेगी। वहीं पुलिस ने भी पीड़ितों की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद ही मामला साफ हो पायेगा, फिलहाल किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है।

रोहिणी घावरी ने फिर आजाद को घेरा

दलितो से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद की कथित एक्स प्रेमिका रोहिणी घावरी को लेकर है, जिन्होंने जंतर मंतर पर क्रोकरोच जनता पार्टी के अहिंसक आंदोलन को हिंसक बनाने के लिए आजाद पर निशाना साधा है। घावरी ने आजाद को एक फेल नेता कहते हुए कहा कि बीजेपी का दामाद और अमित शाह का बेटा दिल्ली पुलिस की गाड़ी पर खड़े हो कर बोल रहा है पुलिस को लाठी का जवाब लाठी से देंगे , ये सुनकर तो पुलिसवालों को भी हंसी आ रही है, वहीं आजाद को भगोड़ा करार देते हुए घावरी ने कहा कि जब बच्चे पिट रहे थे तब वो एक महिला सांसद का हाथ पकड़ कर भाग गया, और फिर बाबा साहब की मूर्ति के नीचे बैठ कर धरना करने का ढोंग शुरु कर दिया। सीजेपी को आजाद की चाल का अहसास हो गया है तभी भी उसे फुटेज मिलना बंद हो गया.. खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी औऱ सपा नेता अखिलेश यादव के इस आंदोलन में पड़ने के बाद तो आजाद की बौखलाहट औ बढ़ गई है। आपको बता दें कि आजाद 21 तारीख से ही संसद भवन के बाहर धरने पर बैठे है तो वहीं अब उन्होंने चेतावनी जारी की है कि अगर 24 घंटे में छात्रों की समस्या का समाधान नहीं निकलता तो वो भूख हड़ताल पर चले जायेंगे। ऐसे मे रोहिणी घावरी का ये ट्विट इस आंदोलन को किस तरफ ले जायेगा, और क्या इससे आजाद की छवि को कोई नुकसान होगा।

फतेहपुर में दलित की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश

दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से है जहां दलित महिला कलावती धोबी की जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश और इनकार करने पर प्रताड़ित करने का खुलासा किया है। दबंगों द्वारा प्रताड़ना सहने के बाद आखिरकार उसने जिला मुख्यालयों में याचिका दी है, जिसमें उसने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उसकी छोटी की बैनामा की हुई जमीन है, जिस पर तिल की फसल लगी हुई थी, लेकिन गांव के ही कुछ दबंगों की नजर उसकी जमीन पर थी। उन लोगों ने जमीन के लिए पहले उसे प्रताड़ित करना शुरू किया, फिर उसके खेतों ने बनायी है झोपड़ी में आ लगा दी, जब उतने से भी दंबगों का दिल नहीं भरा तो उसकी फसल पर खरपतवार नाशक दवा का छिड़काव कर फसल खराब करने की कोशिश की गई। हद तो तब हो गई जब खेतों की सुरक्षा के लिए लगाई गई तारों को भी हटा दिया, जिससे जानवर खेतों में घुस आते और फासला को बर्बाद कर दी। ये घटना 20 जुलाई को घटित हुई थी, जिसमें पीड़िता ने दो आरोपियों धर्मेंद्र सिंह और अमरेंद्र सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। वहीं पीड़िता की आपबीती सुनने के बाद जिलाधिकारी ने इस मामले में निष्पक्ष जांच के आदेश दिए है । वहीं  पीड़ित परिवार ने अपने लिए सुरक्षा और उचित मुआवजा मिले। अब देखना ये होगा कि जहां कानून व्यवस्था चंद मुट्ठीभर लोगों के हाथों की कठपुतली है,  वहां क्या इन प्रभावशाली लोगों के खिलाफ उचित कार्यवाई होगी।

उड़ीसा में सरकार ने 6 नए एससीएसटी कोर्ट स्थापित किये

दलितों से जुड़ा अगला मामला उड़ीसा के भुवनेश्वर से है, जहां दलितों से जुड़े मामलो में तेजी से न्याय करने के लिए सरकार ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीशों के छह नए न्यायालयों की स्थापना की है। सरकार ने एक अधिसूचना जारी करते हुए अधिनियम की धारा 14 के तहत और उड़ीसा उच्च न्यायालय  की सलाह के बाद सरकार ने ये कदम उठाया है, इन 6 अदालतों में एससी एसटी एक्ट के तहत दर्ज होने वाले मामलों की सुनवाई की जायेगी, ताकि इस एक्ट के तहत पीड़ित को जल्द से जल्द न्याय मिल सकें। ये 6 न्यायलय भद्रक, बरहमपुर, जाजपुर, केंद्रपाड़ा, खुर्दाऔर पुरी के राजस्व क्षेत्रों के मामलों को कवर करेंगे। उड़ीसा सरकार के इस कदम से राज्य में दलित उत्पीड़न के बढ़ते मामलों में कमी आने की भी उम्मीद है, त्वरित कार्यवाई के डर से कहीं न कहीं दलितों और पिछड़ों का उत्पीड़न रूकेगा। वैसे आपको क्या लगता, क्या अन्य राज्यों में भी अलग से अतिरिक्त न्यायलयों की संख्या बढ़ानी चाहिए।

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