Punjab Loan schemes: हाल ही में राजधानी दिल्ली से खबर सामने आई है, जहां संसद का मानसून सत्र शुरू हो गया है और उसके साथ ही बीजेपी जहां 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों से लगले दलित वोटर्स को साधने के लिए नए नए हथकंडे अपना रही है तो वहीं भरी संसद नमे विपक्ष भी बीजेपी को दलित मुद्दे पर ही घेरने से पीछे नहीं हट रही है।
और पढ़े: Chandrashekhar Azad: सुविधाओं की मांग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन, चंद्रशेखर आजाद ने सरकार को घेरा
स्टैंडअप इंडिया को लेकर केंद्र से सवाल
बीते दिन, कांग्रेस पार्टी द्वारा दलितों और पिछड़े वर्गों को लुभाने की कोशिशों के बारे में एक खबर सामने आई थी। जहाँ, कांग्रेस पार्टी ने डीसीसी अध्यक्ष पदों के लिए 50% आरक्षण लागू किया। ठीक उसी तरह बीजेपी भी दलित voters को लुभाने के लिए हाथ अजमा रही है…जी हाँ, साल 2016 में पंजाब (Punjab) की अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति (Scheduled Castes and Scheduled Tribes) और ओबीसी वर्ग (OBC category) के लिए शुरू किये गए लोन योजना (Loan schemes) को लेकर राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू (Rajya Sabha MP Satnam Singh Sandhu) ने केंद्र से तीखे सवाल किए थे।
और पढ़े: UP News: एक हफ्ते से लापता दलित किशोरी, पुलिस ने दर्ज किया गुमशुदगी का मुकदमा
दलित मुद्दों पर संसद में गरमाई सियासत
उन्होंने सीधे पूछा कि क्या वाकई में इससे राज्य के दलितों और पिछड़ों को लाभ मिला भी है या नहीं। जिस पर अब केंद्र सरकार ने जवाब दिया है। केंद्र के मुताबिक स्टैंडअप इंडिया योजना के तरह पीछे पांच सालों में 1,418 उधमियों को लोन दिया गया है साथ ही सरकार सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी योजना (सीजीटीएमएसई) लागू कर रही है। इस योजना के तहत पंजाब में 5,710 से ज्यादा लोगों के लोन को स्वीकार किया गया है जिसमें 25 प्रतिशत scst वर्ग को शामिल किया गया।
सरकार के इस जवाब से संधू ने कुछ संतुष्टि तो दिखाई लेकिन सवाल अब भी वही है क्या वाकई में दलितों और पिछड़ों तक इनका सही लाभ पहुंचा या नहीं उसकी रिपोर्ट कौन देगा। और सबसे बड़ा सवाल, इससे राज्य के कितन प्रतिशत दलित आर्थिक रूप से आजाद हुए है।



