UP News: हाल ही में उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से एक मामला सामने आया है। जहाँ, एक दलित महिला को 25 साल बाद न्याय मिला। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर सरकार और प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर दलितों को न्याय मिलने में इतना समय क्यों लगता है, जबकि ऊंची जाति के लोगों को तुरंत मिल जाता है?
सालो बाद दलित महिला को मिला न्याय
अक्सर दलितों से जुड़े ऐसे मामले सामने आते हैं जहां दलितों को सालों बाद न्याय मिलता है, लेकिन इसका क्या फायदा जब आरोपी अपनी पूरी ज़िंदगी मौज-मस्ती में बिता दे। ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से है, जहां एक एक दलित महिला को अपने साथ हुए अन्याय के मामले में 25 सालो के बाद न्याय मिला है। ये बेहद हास्यस्पद ही लगता है कि दलित महिला को अपने साथ हुए मारपीट के मामले में आरोपी पिता पुत्र को सजा दिलवाने में 25 सालों का लंबा समय लग गया।
दरअसल, ये मामला हमीरपुर (Hamirpur) के राठ कोतवाली (Rath Kotwali) के सरसई गांव (Sarsai Village) का है, जब पीड़िता सुदामा ने 28 सितंबर 2001 को पुलिस को एक प्रार्थना पत्र दिया था, जिसके अनुसार पीड़िता के पति मोतीलाल को आवासीय पट्टा मिली था, जिसपर पीड़िता मवेशियों को बांधती थी, और जरूरी सामान रखा करती थी, बगल में ही आरोपी सोहनलाल की जमीन थी।
और पढ़े: भरत तिवारी मामले में गरमाई सियासत, मांझी का सवाल दलित और मुस्लिम एनकाउंटर पर दोहरा मापदंड क्यों?
दलित महिला की जमीन पर कब्ज़ा करने कोशिश
21 सितंबर 2001 को आरोपी ने अपने तीन बेटो के साथ मिलकर उसकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की , जिसका पीड़िता औऱ उसके पति ने विरोध किया था, लेकिन आऱोपी भड़क गया औऱ उसने जातिसूचक गालियां देते हुए दंपत्ति के साथ मारपीट की। पीड़िता ने इस मामले में पहले पुलिस से मदद मांगी लेकिन पुलिस वालों ने मामले को रफा दफा करने की कोशिश की, जिसके बाद उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
न्याय मिलने में लगे 25 साल
कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने जांच शुरु की.. हैरानी की बात कि इस मामले में न्याय आने में 25 साल लग गए। विशेष न्यायधीश एससी एसटी रणवीर सिंह ने चारो आरोपियों को दोषी करार दिया औऱ 3-3 साल की सजा सुनाई है, साथ ही 38 हजार रूपय का जुर्माना भी लगाया है। सुना था न्याय धीरे मिलते है, लेकिन इतना धीरे भी हो सकता है, ये बेहद हैरान करने वाला है।



