Top 5 Dalit news: मुआवजे की बैसाखी या वास्तविक न्याय? पिछले 24 घंटे की 5 बड़ी खबरें जो बयां कर रही हैं देश में दलितों की जमीनी हकीकत

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Top 5 Dalit news: जब भी दलित उत्पीड़न होता है तो उन्हें राहत देने के लिए या तो मुआवजा या फिर नौकरी का झांसा दिया जाता है… ताकि उन्हें यकीन दिला सकें कि वो पीड़ित नहीं है.. लाभार्थी है… लेकिन सवाल ये है कि दलित न्याय के लिए ऐसे कानून क्यों नहीं बनते..जिससे जाति के नाम पर उनका उत्पीड़न ही न हो… आपने आज तक कितने ब्राह्मण या दूसरे उंचे समाज के शोषण की खबर सुनी है, केवल दलित ही क्यों निशाने पर है। तो चलिए आपको इस लेख में  पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली खबरो के बारे में बतायेंगे.. जो इस वक्त आपको देश में दलितो की वास्तविक स्थिति से अवगत करायेंगे.. साथ ही दलित न्याय की बात कैसे केवल एक मृगतृष्णा जैसी है।

गुजरात के साबरकांठा में दलितों का सामूहिक पलायन

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला गुजरात के साबरकांठा से है… एक तरफ देश के प्रधानमंत्री खुद को पिछड़ा कह कर दलितों और पिछड़ो का सांत्वना हासिल करने की कोशिश करते रहते है तो वहीं उनके ही गृह राज्य  में दलितो की स्थिति इतनी बद से बदतर हो गई है कि वहां पूरा दलित समाज सामूहिक पलायन कर रहा है। जी हां, हैरान करने वाली ये खबर साबरकांठा जिले के तलोद तालुका के रूपल गांव की है, जहां अनुसूचित जाति से आने वाले ग्रामीणों ने हिम्मतनगर जिला कार्यालय में रेजिडेंट एडिशनल कलेक्टर को एक ज्ञापन दिया है, जिसमें उन्होंन अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि कैसे उन्हें जातिगत रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

उन पर ऐसे ऐसे निय़म लगाये जा रहे है जो संवैधानिक रूप से गलत है लेकिन दबंगो को कानून का भी डर नहीं है और होगा भी क्यों… जब वो ही उनकी रक्षा कर रही है। दरअसल पीड़ितों ने खुलासा किया है कि अब तक करीब 6 अर्जी दी गई है लेकिन किसी भी पर कोई कार्यवाई नहीं हुई। हालांकि इस मुद्दों को बातचीत से भी सुलझाने की कोशिश की गई थी लेकिन मामला और बद से बदतर हो गया। उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। अर्जी में पीड़ितो ने कहा कि अगर जल्द से जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वो सामूहिक रूप से अपने पैतृक गांव से पलायन कर जायेंगें। अब देखना ये होगा कि जिला में अर्जी देने के बाद इस मामले में आगे क्या होता है।

एससी होने के कारण दो घंटे बाद ही नौकरी से निकाला

2,  दलितो से जुड़ा अगला मामला हरियाणा के पानीपत से है, जहां दलित जाति से होने के कारण एक युवक को नौकरी पर रखने के मात्र 2 घंटे बाद ही नौकरी से बाहर कर दिया गया। ये मामला पानीपत के बाबरपुर  का है, पीड़ित रिजुल कुमार ने बताया कि पानीपत जीटी रोड स्थित इला होम फैशन कंपनी में पूरे मैरिट के साथ उसका एचआर के रूप में सेलेक्शन हो गया था, जिसके बाद वो जीएम से मिलने पहुंचा.. जहां जीएम ने केवल उसके उसकी जाति पूछी थी, लेकिन जब वो घर लौट आया तो उसके करीब 2 घंटे बाद ही उसे कंपनी से कॉल आया कि शिड्यूल कास्ट का होने के कारण उसे नौकरी पर नहीं रखा जा सकता है।

रिजलु तुरंत अपनी बहन के साथ कंपनी पहुंचा और उनसे आगे गिड़गिड़ाया कि उसकी जाति पर नही काबिलियत पर नौकरी पर रखा जाये लेकिन जब मामला बढता गया तो उन लोगो ने उन दोनो को जातिसूचक गालियां दी। पीड़ित ने बताया कि कंपनी ने साफ कहा कि वो जाति देखकर ही कंपनी में रखते है… पीड़ित ने कंपनी के मालिक, उसकी मां और कंपनी के कुछ स्टाफ के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया। केवल जाति देखकर नौकरी पर रखने की बात से पूरे इलाके में हड़कंप है अब देखना ये होगा कि पुलिस की कार्य़वाई के बाद क्या पीड़ित को उसकी नौकरी फिर से मिलेगी।

मध्य प्रदेश के निवारी जिले दलित छात्रा ने लगाई फांसी

3, दलितो से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के निवारी जिले से है, जहां एक दसवी की दलित छात्रा ने पीछा करने औऱ उत्पीड़न से तंग आकर जब आवाज उठाने की कोशिश की तो बदले में मिली धमकियों से तंग आकर उसने मौत को गले लगाना ज्यादा बेहतर समझा। ये मामला निवारी जिले के पृथ्वीपुर पुलिस स्टेशन से करीब  18 किलोमीटर दूर सियाखास गांव  का है, जहां दसवी कक्षा में पढ़ने वाली दलित छात्रा ने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली। मृतका की भाभी ने बताया कि गांव के कुछ मनचले उसे लगातार परेशान कर रहे थे।

यहां तक कि कुछ दिनो पहले जब  अपनी भाभी के साथ मंदिर से घर लौट रही थी, तब उस पर अश्लील टिप्पणी की गई थी और उसे गलत इरादे से पकड़ा गया था, लेकिन वो किसी तरह से निकल गई। पीड़िता ने तीनों आरोपियो के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया था, जिसे वापिस लेने के भी आरोपी पीड़िता के परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दे रहे थे, रोज रोज के टॉर्चर से तंग आकर छात्रा ने फांसी लगा तक आत्महत्या कर ली। पुलिस ने अपनी कार्यवाई के दौरान एक आरोपी अभिषेक यादव को गिरफ्तार कर लिया है और बाकियों की तलाश जारी है।

बिहार से कैमूर जिले में महिला दारोगा ने गर्भवती को पीटा

4, दलितो से जुड़ा अगला मामला बिहार से कैमूर जिले से है, जहां एक आरोपी को पकड़ने गई पुलिस ने पूरे दलित बस्ती में पहले तो बिना सर्च वारंट के घर घर घुस कर खोजबीन की, वहीं जब एक दलित गर्भवती महिला ने इसका विरोध किया तो महिला थाना की दोरागा चंद्रप्रभा ने 8 महीने के गर्भवति महिला को बुरी तरह से पीटा। ये मामला कैमूर जिले के भभुआ नगर के वार्ड नंबर 14 की है, पीड़िता गुड़िया देवी ने बताया कि दरोगा चंद्रप्रभा सूरज नाम के आरोपी को गिरफ्तार करने पहुंची थी क्योंकि उसकी पत्नी ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया था, जिसकी खोजबीन के लिए दारोगा अपनी टीम के साथ आई थी, लेकिन जब वो अपने घर पर नहीं मिला तो बिना सर्च वारंट के वो बाकियों के घरों की तलाशी लेने लगी।

मगर पीड़िता गुड़िया देवी ने इसका विरोध किया, जिससे वो भड़क गई, और उसे बुरी तरह से पीटा। इस घटना से गांव की महिलाओ में भी दारोगा के खिलाफ काफी रोष है, तो वहीं  बीएसपी नेता संतोष कुमार ने महिला दारोगा चंद्रप्रभा को दलित विरोधी कहते हुए सख्त से सख्त कार्यवाई करने की मांग की है और  कैमूर एसपी से दारोगा को तुरंत निलंबित करने की मांग की है। केवल अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने के बदले उसे बुरी तरह से पीटा गया.. यहा तक कि पीड़िता पर ये भी तरस नहीं किया गया कि वो गर्भवति है.. फिर भला ये सिस्टम उन्हें कहां से न्याय देगा।

नागपुर में दलित उत्पीड़न सहने वालो को तोहफा

5, दलितो से जुड़ा अगला मामला महाराष्ट्र के नागपुर से है, जहां केंद्रिय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास अठावले ने दलित उत्पीड़न के शिकार लोगों को बड़ी राहत देने के लिए एक ऐलान किया है। उन्होंने नागपुर दौरे के दौरान एससी एसटी एक्ट के तहत अपराधिक उत्पीड़न सहने वाले लोगो के साथ सहानुभूति जताते हुए कहा कि अगर किसी दलित की हत्या होती है तो मुआवजे को तौर पर उसके परिवार को 8 लाख रूपये और एक सदस्य को सरकारी नौकरी जरूर दी जायेगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस भेदभाव को कम करने के लिए अंतरजातीय विवाह होने चाहिए.. तभी दलित और अन्य जातिय एकजुट हो पायेगी।

इसके अलावा कई और योजनाएं भी नागपुर में लागू होने वाली है। उन्होंने लगे हाथों महिला आरक्षण को फिर से लागू न कर पाने का अफसोस जताया तो वहीं पीएम मोदी की इस संकट में संयम से लोगो को जागरूक करने की तारीफ भी कर दी। हालांकि हम इस बात को भी इग्नोर नही कर सकते है कि महाराष्ट्र में जातिगत उत्पीड़न की खबरें तेजी से बढ़ रही है.. और ये मुआवजा अपराध होने के बाद मिलेगा.. यानि की दलितो के खिलाफ अपराध तो होंगे ही.. फिर इसके लिए क्या कर रही है सरकार।

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