Top 5 Dalit news: दलितों को आज भी सभ्य समाज का हिस्सा मानने के मामले में लोगो की सोच कुछ ज्यादा अपग्रेड नहीं हुई..गांव भले ही शहर में तब्दील हो रहे है लेकिन दलितों और अछूतो की बस्ती अब भी उन्हें मूल गांव से अलग ही चाहिए.. क्योंकि सोच अब भी अपग्रेड नहीं हुई है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो विकास की उस एक पहिये की गाड़ी की सच्चाई को दर्शाता है जहां आज भी समाजिक समानता मात्र एक मृग तृष्णा है।
निजि ऑफिस में जातिगत टिप्पणी SC/ST ACT से बाहर
1, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजधानी दिल्ली से जुड़ा है, जहां दिल्ली हाइकोर्ट ने नीजि ऑफिस में जातिगत भेदभाव और टिप्पणी को लेकर बड़ा बयान देते हुए नीजि केबिन में अकेले में की गई जातिगत टिप्पणी एससीएसटी एक्ट के 3(1)(x) के दायरे में नहीं आयेगी.. इसका फैसला सुनाया है। दिल्ली हाईकोर्ट जज जस्टिस मधु जैन ने सीधे कहा कि एससी एसटी एक्ट के दायरे में आने के लिए अपमान सार्वजनिक नजर में होना चाहिए। यानि की अपमान करते समय अलग से भी लोग मौजूद हो..हालांकि ऐसे मामलो में भले ही एससी एसटी एक्ट लागू नहीं होगा लेकिन भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में मामला जरूर हो सकता है। एससी एसटी एक्ट एक गैर जमानती प्रावधान है… इसलिए जब तक अपराध उसके क्राइटेरियां में नहीं होता तब तक एससी एसटी एक्ट नहीं लगाया जा सकता है। बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 2008 के एक मामले में ट्रांस वर्ल्ड रेडियो इंडिया पर कानूनी कार्रवाई के दौरान ये फैसला सुनाया है। जिस पर एक कर्मचारी ने ऑफिस में जातिगत टिप्पणी का आरोप लगाया था.. जिसका फैसला करीब 18 सालो के बाद आया है। 18 साल बाद ही सहीं कंपनी को राहत मिली है,.. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि एससी एसटी एक्ट के लिए सार्वजनित तौर पर अपराध होना चाहिए, लेकिन अकेले में की गई टिप्पणी के कारण जो मानसिक आघात होता उसकी भरपाई कौन करेगा।
मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद की चेतावनी
2, दलितो से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जो पिछले 3 दिनों से संसद के बाहर जंतर मंतर पर धरना दे रहे छात्रों के लिए न्याय की मांग करने के लिए अनशन पर बैठे है। वहीं आजाद के इस अनशन को राजस्थान के नागौर से सांसद और दलित हितो के लिए लड़ने वाले नेता हनुमान बेनीवाल का भी साथ मिल गया है। वहीं भारतीय आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार राउत भी उनके साथ नजर आये। आजाद ने पहले ही चेतावनी जारी की थी कि जंतर मंतर पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिस वालों पर कार्यवाई नहीं होता और सरकार जल्द कोई फैसला नहीं करती तो वो 25 जुलाई को देश भर में बड़ा आंदोलन करेंगे.. वहीं उन्होंने खुद भी भूख हड़ताल पर बैठने की धमकी दी है, वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने फेसबुक लाइव आकर नीट परिक्षा को लेकर चर्चा की थी, जिसमें उन्होंने कई कानूनों को लेकर भी चर्चा की थी, जिसे लेकर आजाद ने पीएम को घेरा है। उन्होंने कहा कि जो भी कानून आप बनाने की बात कर रहे वो तो जब आयेगा तब आयेगा, लेकिन अभी जो हालात है उसपर उनका क्या फैसला है। उन्हें शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए, छात्रो पर कार्यवाई करने वाले पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी, चाहे हंस कर चाहे रो कर सरकार को हमारी मांगे माननी पड़ेगी, नहीं तो आने वाले समय में मार्च होंगे, जेल भरो आंदोलन होंगे, राज्य स्तर पर आंदोलन होंगे और तब भी नहीं माने तो भारत बंद आंदोलन होगा। आजाद ने सरकार को 15 दिनो का समय दिया है कोई फैसला लेने के लिए.. अब देखना ये होगा कि क्या सरकार वाकई में झुक जायेगी।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकार को घेरा
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के भोपाल से है, जहां राज्य सरकार ने दलितों और पिछड़ो की जमीनों से उन्हें जबरन बेदखल करने और उनपर कब्जा करने की जो रिपोर्ट दी है वो पूरी तरह से भ्रामक है। जिसे लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बेहद सख्त रवैया अपनाते हुए दलितों के शोषण करने के मामले को लेकर जिला कलेक्टर को मामले से जुड़े सभी दस्तावेजो के साथ कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है.. न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की पीठ ने सरकार की रिपोर्ट पर सवालिया निशान लगाते हुए पूछा कि एससी एसटी वर्ग को लोगो को जमीन से बेदखल किया गया या नहीं.. इसकी जो जांच हुई वो वास्कविकता से ज्यादा केवल कागजी औपचारिकता लग रही है। बता दें कि गुना जिले के 139 भूमि मालिकों की खेतिहर जमीन पर बटाईदारों द्वारा खेती की जाने की बात तो सामने आई है, लेकिन सरकार ये साबित करने में असफल हो गई कि ये जमीने वाकई में उनकी ही है या फिर दलितों की जमीनों पर जबरन कब्जा किया गया था। आपको बता दें कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई थी जिसमें गुना जिले में एससी एसटी वर्ग के लोगो का शोषण करने और उनकी जमीन पर गैरकानूनी रूप से कब्जा करने की बात कहीं गई थी, जिसे लेकर कोर्ट ने कफी रवैया अपनाया। कोर्ट का सरकार से सवाल पूछने के बाद अब देखना ये होगा कि कलेक्टर के दस्तावेज जमा करने के बाद मामले में क्या बदलाव आना वाले है। क्या दलितों और पिछड़ो को उनकी जमीने वापिस मिलेगी, या वो ताकतवर लोगो के कारण इस सिस्टम के भेंट चढ़ जायेंगे।
बिहार के वैशाली में दलित बस्ति का बुरा हाल
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार के वैशाली से है, जहां दलितों की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि शायद उन्हें आजादी से पहले का समय ही ठीक लगता होगा.. ये मामला वैशाली जिले के महनार प्रखंड की हसनपुर दक्षिणी पंचायत के वार्ड 3 का है, जहां एक दलित बस्ती में करीब 200 से ज्यादा दलित परिवार रहते है लेकिन जिन दलितों के कंधो पर बैठ कर सरकार ने सत्ता हासिल की थी, वहीं सरकार अब उन्हें अनदेखी भी कर रही है। बारिश के कारण पूरे गांव में कई फीट तक पानी भर गया, कीचड़ और जलभराव के कारण लोगो का आना जाना दूभर हो गया.. कई बार शिकायत करने के बाद भी दलिक बस्ती में सड़क बनवाने की अपील को अनसुना कर दिया गया.. जिससे अब यहां रहने वालो का जीवन ही अस्त व्यस्त हो गया है। आने जाने वाले लोग अक्सर कीचड़ के कारण गिर जाते है.. हैरानी की बात है कि विकास की बात करने वाली सरकार की तऱफ से आज तक इस गांव में सड़क बनवाने की बात भी सामने नहीं है, वजह साफ है दलितों को शायद इंसान के बराबर भी नहीं समझा जाता, तभी तो उनकी बस्तियों और उन्हें अनदेखा छोड़ दिया जाता है। ग्रामीणों की याचिका के बाद क्या प्रशासन नींद से जागेगा, या फिर से न्याय के लिए आंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा।
तिरूपति में दलित महिला और छात्रो के लिए बड़ी पहल
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला आंध्र प्रदेश के तिरूपति से है, जहां अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं और छात्रों को सशक्त बनाने के लिए डीएसटी-एसटीआई हब जारी किया गया है। जिसके तहत राज्य की सभी दलित और पिछड़ी जाति की महिलाओं को आर्थिक रूप से शसक्त बनाने के लिए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। तिरुपति के श्री पद्मवती महिला विश्व विद्यालयम में कुलपति वी. उमा ने इस हब का उद्घाटन किया जिसके तहत ‘रेशम उत्पादन, कृषि और आजीविका में Technology-based innovative practices पर जोर दिया जायेगा। ये एक तीन वर्षीय परियोजना होगी, जिसमें छात्रों और महिलाओं को वो कौशल सिखाये जायेंगे ताकि आगे जाकर वो खुद स्वालंबी और आत्मनिर्भर बन सकें। राज्य सरकार का ये कदम वाकई में सराहनीय है। अगर दलित और पिछड़ी जाति की महिलाओ को कौशल सिखाया जाता है तो उनके लिए अपने परिवार का आर्थिक रूप से समर्थन करना आसन हो जायेगा.. जिससे कहीं न कहीं उनकी स्थिति में काफी सुधार आयेगा।


